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PM मोदी ने महाभारत की 'विदुर नीति' का श्लोक साझा किया, बुद्धिमानों के वचनों पर चिंतन से मिलती है दीर्घकालिक सफलता

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PM मोदी ने महाभारत की 'विदुर नीति' का श्लोक साझा किया, बुद्धिमानों के वचनों पर चिंतन से मिलती है दीर्घकालिक सफलता

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने महाभारत की विदुर नीति का वह श्लोक साझा किया जो धृतराष्ट्र को सुनाया गया था — सीख यह है कि बुद्धिमानों के वचनों पर गहन चिंतन करके दृढ़तापूर्वक कर्म करने वाला ही चिरस्थायी यश और राष्ट्र की उन्नति में भागीदारी का अधिकारी बनता है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक महाभारत के उद्योग पर्व की विदुर नीति के 39वें अध्याय के 31वें श्लोक से लिया गया है।
महात्मा विदुर ने यह श्लोक महाराजा धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध से पूर्व सुनाया था।
संदेश: ज्ञानी जनों के वचनों के परिणाम पर चिंतन कर दृढ़तापूर्वक कर्म करने वाला दीर्घकाल तक यश और सम्मान पाता है।
योजनाबद्ध और विवेकपूर्ण कार्य से मिलने वाला सम्मान क्षणिक लाभ से कहीं अधिक चिरस्थायी होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें यश, सम्मान और राष्ट्र की उन्नति में योगदान का संदेश निहित है। यह श्लोक महाभारत के उद्योग पर्व की विदुर नीति के 39वें अध्याय के 31वें श्लोक से लिया गया है।

कौन-सा श्लोक साझा किया गया

प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत श्लोक "सुव्याहृतानि धीराणां फलतः परिचिन्त्य यः। अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति॥" प्रस्तुत किया। इसका भावार्थ है — जो व्यक्ति धीर, बुद्धिमान और विवेकी जनों के सुविचारित वचनों के दूरगामी परिणामों पर गहन चिंतन करने के बाद अपने कर्मों में दृढ़तापूर्वक प्रयत्न करता है, वह दीर्घकाल तक यश और सम्मान का अधिकारी बनता है तथा राष्ट्र की उन्नति में भी अपना योगदान सुनिश्चित करता है।

श्लोक का ऐतिहासिक संदर्भ

यह श्लोक सनातन धर्म के महाकाव्य महाभारत के उद्योग पर्व में विदुर नीति के अंतर्गत आता है। महाभारत युद्ध से ठीक पहले महाराजा धृतराष्ट्र पांडवों के अधिकारों को लेकर गहरी चिंता में थे। उस अवसर पर महात्मा विदुर ने इस श्लोक के माध्यम से उन्हें श्रेष्ठ कर्म और विवेकपूर्ण निर्णय का मार्ग दिखाया था।

श्लोक का मूल संदेश

विदुर के इस उपदेश का सार यह है कि केवल ज्ञान की बातें सुनना अपर्याप्त है — असली सफलता उसे मिलती है जो ज्ञानी लोगों की सीख को समझकर उसके अच्छे-बुरे दूरगामी परिणामों का आकलन करता है और फिर दृढ़ संकल्प के साथ अपने कर्तव्य-पथ पर अग्रसर होता है। बिना विचारे उठाए गए कदम से क्षणिक लाभ मिल सकता है, किंतु योजनाबद्ध और विवेकपूर्ण कार्य से मिलने वाला सम्मान चिरस्थायी होता है।

व्यावहारिक महत्व

इस श्लोक के अनुसार, कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व अपने से अधिक अनुभवी और ज्ञानी व्यक्तियों का परामर्श लेना अनिवार्य है। केवल जोश या आवेग में आकर कार्य प्रारंभ करना उचित नहीं — भविष्य में उसके परिणामों का पूर्वानुमान लगाना भी उतना ही आवश्यक है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों के श्लोक और सुभाषित साझा करते रहते हैं, जो व्यक्तिगत और राष्ट्रीय जीवन दोनों के लिए प्रासंगिक संदेश देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सांस्कृतिक पहचान और शासन-दर्शन को एक साथ रेखांकित करता है। विदुर नीति का यह विशेष श्लोक — जो एक राजा को विवेकपूर्ण निर्णय और दूरगामी सोच की सीख देता है — राजनीतिक संदर्भ में भी प्रासंगिक माना जाएगा, भले ही प्रधानमंत्री ने इसे किसी नीतिगत घोषणा से न जोड़ा हो। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः ऐसे सांस्कृतिक संदेशों को सामान्य पोस्ट मानकर छोड़ देती है, जबकि ये भारतीय सार्वजनिक विमर्श में 'सॉफ्ट पावर' और 'सनातन मूल्यों' की राजनीति का अभिन्न हिस्सा हैं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 'सुव्याहृतानि धीराणां फलतः परिचिन्त्य यः। अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति॥' श्लोक साझा किया। यह महाभारत के उद्योग पर्व की विदुर नीति के 39वें अध्याय का 31वाँ श्लोक है।
इस श्लोक का हिंदी में क्या अर्थ है?
इस श्लोक का भावार्थ है — जो व्यक्ति बुद्धिमान और विवेकी लोगों के सुविचारित वचनों के दूरगामी परिणामों पर चिंतन करने के बाद दृढ़तापूर्वक अपने कर्मों में प्रयत्न करता है, वह दीर्घकाल तक यश और सम्मान प्राप्त करता है तथा राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान देता है।
विदुर नीति क्या है और यह महाभारत में कहाँ है?
विदुर नीति महाभारत के उद्योग पर्व का एक महत्वपूर्ण खंड है, जिसमें महात्मा विदुर ने महाराजा धृतराष्ट्र को नीति, धर्म और सुशासन का उपदेश दिया था। यह प्रसंग महाभारत युद्ध से ठीक पहले का है जब धृतराष्ट्र पांडवों के अधिकारों को लेकर चिंतित थे।
PM मोदी ने यह श्लोक कब साझा किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुभाषित 30 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर साझा किया।
इस श्लोक का व्यावहारिक जीवन में क्या महत्व है?
यह श्लोक सिखाता है कि कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले अनुभवी और ज्ञानी लोगों की सलाह लेनी चाहिए और उसके दूरगामी परिणामों का आकलन करना चाहिए। केवल आवेग में काम शुरू करने से क्षणिक लाभ हो सकता है, लेकिन योजनाबद्ध और विवेकपूर्ण कार्य से मिलने वाला सम्मान चिरस्थायी होता है।
राष्ट्र प्रेस
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