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गुजरात में पीएम राहत योजना: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर में त्वरित इलाज की आवश्यकता

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गुजरात में पीएम राहत योजना: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर में त्वरित इलाज की आवश्यकता

सारांश

गुजरात में पीएम-राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष पहल की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक बाधाओं के बिना दुर्घटना पीड़ितों का समय पर इलाज सुनिश्चित करना है।

मुख्य बातें

गुजरात में पीएम-राहत योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करना है।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों का समन्वय आवश्यक है।
'गोल्डन आवर' में उपचार पीड़ितों की जान बचाने में महत्वपूर्ण है।
1.5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध है।
सभी जिलों में इस योजना का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

गांधीनगर, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराने और आर्थिक कारणों से इलाज में देरी को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम-राहत योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु गुजरात में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

इसी संदर्भ में, गुजरात सड़क सुरक्षा प्राधिकरण ने गुरुवार को गांधीनगर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।

सरकार के इस प्रावधान के तहत सड़क दुर्घटना में शिकार लोगों को 'गोल्डन आवर' में तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान करने पर जोर दिया गया है। योजना के अनुसार, दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल में सात दिनों तक 1.5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है, ताकि पैसों की कमी के कारण इलाज में कोई बाधा न आए और अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।

कार्यशाला में गुजरात के सभी जिलों के रोड सेफ्टी नोडल अधिकारी, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में गुजरात रोड सेफ्टी अथॉरिटी के आयुक्त सतीश पटेल ने योजना का परिचय देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय यानी गोल्डन आवर में दिया गया उपचार पीड़ित की जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योजना को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और तालमेल बेहद आवश्यक है, ताकि इसका लाभ राज्य के हर जिले तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।

कार्यक्रम के दौरान राज्य ट्रैफिक शाखा के आईजी ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में पुलिस विभाग की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस की जिम्मेदारी केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं होती, बल्कि दुर्घटना की जानकारी का सही दस्तावेजीकरण करना और अस्पतालों के साथ समन्वय बनाकर घायलों को समय पर इलाज दिलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, राज्य ट्रैफिक शाखा की पुलिस अधिकारी साहित्‍य वी ने भी योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया और इसके संचालन तंत्र के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए और उसे योजना के तहत उपलब्ध कैशलेस इलाज का लाभ मिले।

कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मेडिकल टीम की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि अस्पतालों को इस योजना के तहत आने वाले मरीजों के इलाज में तत्परता दिखानी चाहिए, ताकि गोल्डन आवर के दौरान सही उपचार मिल सके और जान बचाने की संभावना बढ़ सके।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के डिप्टी डायरेक्टर उपेंद्र गांधी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की यह पहल सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस विभाग का काम दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को तुरंत अस्पताल तक पहुंचाना है और 24 घंटे के भीतर इलेक्ट्रॉनिक एक्सीडेंटल रिपोर्ट तैयार करना है, जबकि स्वास्थ्य विभाग का दायित्व घायल व्यक्ति को योजना में नामांकित कर यह सुनिश्चित करना है कि उसका पूरा इलाज राहत योजना के तहत किया जाए।

वहीं, राज्य ट्रैफिक शाखा की पुलिस अधिकारी साहित्‍य वी ने बताया कि पीएम राहत योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर उसका इलाज सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जब भी डायल-112 या 108 के माध्यम से दुर्घटना की सूचना मिलती है, पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर घायल को अस्पताल पहुंचाती है और यह सुनिश्चित करती है कि उसे जन आरोग्य योजना के तहत इलाज का लाभ मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आर्थिक बाधाओं को दूर करके अधिक लोगों की जान बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना इस योजना की सफलता के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-राहत योजना क्या है?
यह योजना सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई है।
गोल्डन आवर का क्या महत्व है?
गोल्डन आवर वह समय होता है जब दुर्घटना के तुरंत बाद दिए गए उपचार से पीड़ित की जान बचाने की संभावना सबसे अधिक होती है।
कैशलेस इलाज का लाभ कैसे मिलता है?
दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज अस्पताल में सात दिनों के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
इस योजना में किन विभागों की भागीदारी है?
पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।
क्या इस योजना का लाभ सभी जिलों में मिलेगा?
जी हाँ, योजना का लाभ राज्य के सभी जिलों तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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