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गुजरात में पॉक्सो मामले: पाँच साल में 1,785 फैसले, 908 दोषियों को उम्रकैद और 16 को फाँसी

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गुजरात में पॉक्सो मामले: पाँच साल में 1,785 फैसले, 908 दोषियों को उम्रकैद और 16 को फाँसी

सारांश

गुजरात की पॉक्सो अदालतों ने पाँच साल में 1,785 फैसले सुनाए — 908 उम्रकैद, 16 फाँसी। 2022 में जहाँ 194 फैसले आए, वहीं 2025 में 499 और 2026 में अगस्त तक ही 346 फैसले हो चुके हैं। यह आंकड़े बाल यौन अपराधों के विरुद्ध त्वरित न्याय की दिशा में राज्य की बढ़ती रफ्तार की कहानी कहते हैं।

मुख्य बातें

गुजरात की पॉक्सो अदालतों ने 2022 से अगस्त 2026 के बीच कुल 1,785 मामलों में फैसले सुनाए।
908 दोषियों को आजीवन कारावास और 16 दोषियों को फाँसी की सजा सुनाई गई।
वर्ष 2022 में 194 फैसले थे, जो 2025 में बढ़कर 499 हो गए — ढाई गुना से अधिक वृद्धि।
अगस्त 2026 में अकेले एक माह में 48 मामलों में सजा, जिनमें 35 उम्रकैद ।
सबसे अधिक 5,463 मामलों में 31 से 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल।
गंभीर मामलों में विशेष सरकारी अभियोजक की नियुक्ति और समय पर चार्जशीट पर विशेष ज़ोर।

गुजरात में पॉक्सो (POCSO) अदालतों ने 2022 से अगस्त 2026 के बीच कुल 1,785 मामलों में फैसले सुनाए, जिनमें 908 दोषियों को आजीवन कारावास और 16 दोषियों को फाँसी की सजा दी गई। आंकड़ों के अनुसार यह प्रदर्शन राज्य में बाल यौन अपराधों के विरुद्ध त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रगति दर्शाता है। राज्य सरकार का कहना है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जाँच, चार्जशीट और अदालती सुनवाई — तीनों स्तरों पर तेज़ी लाई जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम और आँकड़े

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में पॉक्सो अदालतों ने 194 मामलों में फैसले सुनाए, जिनमें 107 आरोपियों को उम्रकैद मिली। इसके विपरीत वर्ष 2025 में फैसलों की संख्या बढ़कर 499 हो गई और 340 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यह वृद्धि स्पष्ट रूप से अभियोजन प्रक्रिया में तेज़ी आने का संकेत देती है।

वर्ष 2026 में अगस्त तक ही 346 मामलों में निर्णय सुनाए जा चुके हैं और 241 दोषियों को उम्रकैद दी जा चुकी है। केवल अगस्त 2026 के एक महीने में 48 पॉक्सो मामलों में सजा सुनाई गई, जिनमें से 35 आरोपियों को आजीवन कारावास मिला।

चार्जशीट की गति: विशेष ध्यान

पिछले पाँच वर्षों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 दिनों के भीतर 140 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि 16 से 30 दिनों में 1,339 मामलों में आरोप-पत्र प्रस्तुत किए गए। सबसे अधिक — 5,463 मामलों में — 31 से 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल हुई। यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य में जाँच की निगरानी एक सुनिश्चित ढाँचे के तहत हो रही है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गांधीनगर के लॉ एंड ऑर्डर डीआईजी मकरंद चौहान ने कहा कि पॉक्सो मामलों में प्रभावी अभियोजन सजा दिलाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके अनुसार यदि कोई पुलिस इकाई किसी मामले को अत्यंत गंभीर मानती है, तो विशेष सरकारी अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति के लिए राज्य पुलिस मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाता है।

चौहान ने जोड़ा कि गंभीर मामलों में विशेष अभियोजक की मौजूदगी से पक्ष को अदालत में अपना केस प्रभावी ढंग से रखने में सहायता मिलती है। राज्य सरकार जिलों में सरकारी वकीलों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष ज़ोर दे रही है।

सूरत जिला एवं सत्र न्यायालय के सरकारी वकील नयन सुखड़वाला ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय-सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत मिलने की संभावना बनती है। उन्होंने कहा, 'समय बीतने के साथ गवाहों की याददाश्त और बयानों में अंतर आ सकता है, जिससे मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित होती है — इसलिए जाँच और सुनवाई दोनों में तेज़ी ज़रूरी है।'

सरकार की नीति और आगे की राह

राज्य सरकार बाल यौन अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करने की बात कहती है। इसी कड़ी में पुलिस जाँच, अभियोजन तैयारी और अदालती सुनवाई के बीच बेहतर समन्वय पर ज़ोर दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 2022 की तुलना में 2025 तक फैसलों की वार्षिक संख्या ढाई गुना से अधिक हो चुकी है, जो न्यायिक प्रणाली की बढ़ती क्षमता का संकेत देती है। यदि यही गति बनी रही, तो 2026 पूरे वर्ष का आँकड़ा पिछले किसी भी वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली पैमाना यह होना चाहिए कि दर्ज मामलों में से कितने प्रतिशत में सजा हुई — महज़ पूर्ण संख्या नहीं। गुजरात के आंकड़े चार्जशीट की गति को रेखांकित करते हैं, पर सज़ा-दर (conviction rate) का खुलासा नहीं करते, जो न्याय प्रणाली की वास्तविक कसौटी है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 31 से 45 दिनों में चार्जशीट दाखिल होना कानूनी रूप से स्वीकार्य है, लेकिन पीड़ित बच्चों के लिए हर दिन का अर्थ अलग होता है। राज्य की प्रगति को टिकाऊ बनाने के लिए सज़ा-दर, अपील में पलटने की दर और पीड़ित पुनर्वास के आँकड़े भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में पॉक्सो मामलों में पाँच साल में कितने फैसले आए?
2022 से अगस्त 2026 के बीच गुजरात की पॉक्सो अदालतों ने कुल 1,785 मामलों में फैसले सुनाए। इनमें 908 दोषियों को उम्रकैद और 16 दोषियों को फाँसी की सजा दी गई।
गुजरात में पॉक्सो फैसलों की संख्या साल-दर-साल कैसे बदली?
2022 में 194 फैसले आए थे, जो 2025 में बढ़कर 499 हो गए। 2026 में अगस्त तक ही 346 मामलों में निर्णय सुनाया जा चुका है, जो पूरे साल का नया रिकॉर्ड बन सकता है।
पॉक्सो मामलों में चार्जशीट कितने दिनों में दाखिल होती है?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 5,463 मामलों में 31 से 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई। 16 से 30 दिनों में 1,339 और 1 से 15 दिनों में 140 मामलों में चार्जशीट प्रस्तुत की गई। समय पर चार्जशीट न होने पर आरोपी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत मिलने का जोखिम रहता है।
पॉक्सो मामलों में विशेष सरकारी अभियोजक की भूमिका क्या होती है?
यदि कोई पुलिस इकाई किसी मामले को अत्यंत गंभीर मानती है, तो राज्य पुलिस मुख्यालय को विशेष सरकारी अभियोजक की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा जाता है। ये विशेष अभियोजक अदालत में मामले को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं, जिससे सजा सुनिश्चित होने की संभावना बढ़ती है।
गुजरात सरकार बाल यौन अपराधों के मामलों में तेज़ी कैसे ला रही है?
राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस जाँच, अभियोजन तैयारी और अदालती सुनवाई के बीच बेहतर समन्वय पर ज़ोर दे रही है। जिलों में सरकारी वकीलों की संख्या बढ़ाना और समय-बद्ध चार्जशीट दाखिल करना इस नीति के प्रमुख घटक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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