29 जून 2026
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उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम: महीसागर की 4,135 महिलाएं बनीं साक्षर, दूसरा चरण 15 जुलाई से

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उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम: महीसागर की 4,135 महिलाएं बनीं साक्षर, दूसरा चरण 15 जुलाई से

सारांश

गुजरात के महीसागर में 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' ने वह कर दिखाया जो दशकों से अधूरा था — 4,135 ग्रामीण महिलाएं अब खुद साइन करती हैं, घड़ी पढ़ती हैं और बैंक जाती हैं। 15 जुलाई से शुरू होने वाला दूसरा चरण जिले को 100% साक्षर बनाने की दिशा में अगला कदम है।

मुख्य बातें

भारत सरकार के 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत महीसागर जिले में पहले चरण में 4,697 निरक्षरों को चिन्हित कर शिक्षित किया गया।
4,561 लोगों ने मार्च 2026 में परीक्षा दी, जिनमें से 4,135 उत्तीर्ण हुए; सफल प्रतिभागियों को भारत सरकार का प्रमाण-पत्र मिलेगा।
कक्षाएँ रात 7:30 से 8:30 बजे आयोजित हुईं; 126 शिक्षकों की देखरेख में 532 विद्यार्थियों ने 6 महीने पढ़ाया।
दूसरा चरण 15 जुलाई से 15 अक्टूबर 2026 तक चलेगा, जिसमें शेष 347 गाँवों को कवर किया जाएगा।
लक्ष्य: महीसागर के सभी 717 गाँवों को 100 प्रतिशत साक्षर बनाना।

गुजरात के महीसागर जिले में भारत सरकार के 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' ने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित इस अभियान के पहले चरण में 4,135 निरक्षर लोग — जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं — पढ़ना-लिखना सीखकर अब बैंक, डेयरी और रोज़मर्रा के कामकाज खुद संभाल रही हैं। 29 जून 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, यह उपलब्धि प्रशासन, शिक्षकों और विद्यार्थियों की साझा मेहनत का नतीजा है।

अभियान का पहला चरण: आँकड़ों में सफलता

महीसागर जिले के कुल 717 गाँवों में से उन गाँवों का सर्वेक्षण किया गया जहाँ महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी। 2025 में हुए इस सर्वे में 4,697 निरक्षरों को चिन्हित किया गया। इन्हें 126 शिक्षकों की देखरेख में 532 विद्यार्थियों ने 6 महीने तक पढ़ाया।

जिले के पाखी, पट्टन, लिबोदरा और राणपुर समेत कई गाँवों में रात 7:30 से 8:30 बजे के बीच कक्षाएँ आयोजित की गईं — वह समय जब महिलाएं घरेलू कामकाज से मुक्त होती हैं। मार्च 2026 में हुई परीक्षा में 4,561 लोगों ने भाग लिया, जिनमें से 4,135 उत्तीर्ण हुए। सफल प्रतिभागियों को भारत सरकार की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।

महिलाओं की आवाज़: बदलाव की असली कहानी

अभियान में शामिल मगूबेन ने बताया, 'पहले मुझे अंगूठा लगाने आता था। आज साइन करना सीख लिया। टीचर आते हैं, जो कई प्रकार की शिक्षा देते हैं — जिसके कारण हमने तीन बार परीक्षा पास किया। हम इतनी उम्र में साइन करना सीख गए हैं; इसके लिए हम बहुत खुश हैं।'

एक अन्य प्रतिभागी भारतीबेन ने कहा कि घड़ी देखना और 100 तक गिनती बोलना उनके लिए पहले कठिन था। उनके बच्चों ने ये दोनों कौशल सिखाए। अब वे डेयरी में दूध भरते समय मिलने वाली पर्ची भी पढ़ सकती हैं — एक छोटा बदलाव जो उनकी आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया है।

जिला प्रशासन की भूमिका

महीसागर की जिला कलेक्टर अर्पित सागर ने बताया कि बच्चों ने रात 7:30 से 8:30 बजे — जब महिलाएं फ्री होती हैं — उस समय उन्हें पढ़ाया। उन्होंने कहा, 'बैंक में कैसे काम करना है, यह भी सिखाया। लिखना और पढ़ना सिखाया। सबसे अच्छी बात यह है कि महिलाओं ने काफी उत्साह से इस अभियान में हिस्सा लिया।' कलेक्टर सागर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल अक्षर-ज्ञान तक सीमित नहीं रहा — बैंकिंग, डेयरी और पोस्ट ऑफिस से जुड़े व्यावहारिक कौशल भी इसका हिस्सा रहे।

दूसरा चरण: 15 जुलाई से नई शुरुआत

जिला कलेक्टर के अनुसार अभियान का दूसरा चरण 15 जुलाई 2026 से शुरू होगा और 15 अक्टूबर 2026 तक कक्षाएँ चलेंगी। इस बार उन गाँवों का सर्वे किया जाएगा जहाँ महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से अधिक है — यानी शेष 347 गाँव इस चरण में कवर होंगे। मार्च तक परीक्षा की तैयारी पूरी कराने का लक्ष्य रखा गया है।

महीसागर को 100 प्रतिशत साक्षर बनाने का संकल्प लेकर चल रहे इस अभियान की सफलता यह साबित करती है कि समन्वित प्रयासों से निरक्षरता को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर वयस्क साक्षरता को नई शिक्षा नीति की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि साक्षरता का यह कौशल दीर्घकालिक आर्थिक स्वतंत्रता में कैसे बदलता है। रात की कक्षाओं और बच्चों द्वारा माताओं को पढ़ाने का यह मॉडल अभिनव है, किंतु 4,697 में से केवल 4,135 का उत्तीर्ण होना यह भी दर्शाता है कि ड्रॉपआउट और सीखने की बाधाएं अभी पूरी तरह दूर नहीं हुईं। दूसरे चरण में 347 गाँवों का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है — इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या पहले चरण की सीखें व्यवस्थित रूप से लागू की जाती हैं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम क्या है?
यह भारत सरकार का वयस्क साक्षरता अभियान है जिसके तहत निरक्षर नागरिकों — विशेषकर महिलाओं — को पढ़ना, लिखना और बुनियादी जीवन-कौशल सिखाए जाते हैं। महीसागर जिले में इसे जिला प्रशासन ने स्थानीय शिक्षकों और विद्यार्थियों की मदद से लागू किया।
महीसागर में पहले चरण में कितने लोग साक्षर हुए?
पहले चरण में 4,561 लोगों ने मार्च 2026 में परीक्षा दी, जिनमें से 4,135 उत्तीर्ण हुए। इन्हें भारत सरकार की ओर से प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।
उल्लास कार्यक्रम का दूसरा चरण कब शुरू होगा?
दूसरा चरण 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 15 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसमें जिले के शेष 347 गाँवों को कवर किया जाएगा और मार्च तक परीक्षा की तैयारी पूरी कराई जाएगी।
महीसागर में कक्षाएँ किस समय और कैसे आयोजित हुईं?
कक्षाएँ रात 7:30 से 8:30 बजे के बीच आयोजित की गईं — वह समय जब महिलाएं घरेलू कामकाज से मुक्त होती हैं। 126 शिक्षकों की देखरेख में 532 विद्यार्थियों ने 6 महीने तक पढ़ाया।
इस अभियान से महिलाओं के जीवन में क्या बदलाव आया?
महिलाएं अब खुद साइन कर सकती हैं, घड़ी पढ़ सकती हैं, 100 तक गिनती कर सकती हैं और डेयरी की पर्ची समझ सकती हैं। बैंक और पोस्ट ऑफिस के काम भी वे अब स्वयं कर सकती हैं, जो पहले संभव नहीं था।
राष्ट्र प्रेस
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