सीएम योगी का अयोध्या में उद्घोष: अयोध्या के राजा ज्ञान परंपरा और गोमाता की रक्षा करते हैं
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 जून 2026 को अयोध्या के दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित भगवान मुनि सुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लिया और कहा कि अयोध्या के राजा सदा से ज्ञान परंपरा तथा गोमाता, दोनों के संरक्षक रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने ऋषभदेव जन्मभूमि द्वार एवं 101 भगवान जिनमंदिर का लोकार्पण भी किया।
गोरक्षा का आह्वान
गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं से गोरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, 'गाय दैवीय विभूति है — सबको उसकी रक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास करना चाहिए।' उन्होंने जैन परिवारों से विशेष रूप से अपील की कि वे किसी गोशाला को गोद लें, वार्षिक सहयोग दें, या कम से कम एक गाय का वार्षिक खर्च वहन करें और वर्ष में दो-तीन बार गोशाला जाकर गोमाता के स्वास्थ्य की जानकारी लें।
सीएम ने भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का उल्लेख किया जिसमें पहला ग्रास गोमाता को और अंतिम ग्रास श्वान को दिया जाता है, तथा शाम को दीपक जलाने के बाद चींटियों को आटा-चीनी देने की रीत है। उन्होंने इसे 'जियो और जीने दो' की प्रेरणा का व्यावहारिक रूप बताया।
अयोध्या और जैन परंपरा का संगम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की जन्मभूमि अयोध्या ही है और वे धरती के पहले राजा हैं। उन्होंने बताया कि जैन धर्म के 24 में से सर्वाधिक तीर्थंकर उत्तर प्रदेश की धरती पर हुए। अयोध्या में पाँच तीर्थंकरों — भगवान ऋषभदेव (प्रथम), भगवान अजितनाथ (द्वितीय), भगवान अभिनंदननाथ (चतुर्थ), भगवान सुमतिनाथ (पंचम) और भगवान अनंतनाथ (14वें) — का प्रकटीकरण हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान ऋषभदेव के पुत्र भगवान जड़ भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम 'भारत' पड़ा। काशी में चार, श्रावस्ती में एक और हस्तिनापुर में भी तीर्थंकरों की समृद्ध परंपरा रही है।
रामायण प्रसंग और राजधर्म
सीएम ने रामायण में भगवान राम और बालि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम ने बालि को स्पष्ट किया था कि उसके कर्म ही उसकी अधोगति का कारण बने। उन्होंने कहा कि 'सागर और वन से आच्छादित संपूर्ण धरा अयोध्या के राजाओं की है' — यह वाक्य राजधर्म की व्यापकता को दर्शाता है।
कुशीनगर का नामकरण और पावागढ़
मुख्यमंत्री ने बताया कि 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने कुशीनगर में अंतिम उपदेश दिया था, जिससे वह भूमि पवित्र नगरी बनी। उन्होंने कहा कि बीच के कालखंड में उसे 'फाजिलनगर' कर दिया गया था, किंतु उन्होंने उसे पावागढ़ नाम देने की घोषणा की है।
आत्म अनुशासन और 'जियो और जीने दो'
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'जियो और जीने दो' का मंत्र केवल वही दे सकता है जो आत्म अनुशासन में बंधा हो। उन्होंने श्रद्धालुओं से तीर्थों की पवित्रता बनाए रखने के लिए स्वच्छता, पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्तव्यबोध के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश और समाज के प्रति कर्तव्य का ध्यान रखने से ही भारत और भारतीयता शाश्वत रहेगी। जैन तीर्थंकरों की साधना और वाणी ने विश्व मानवता को कल्याण की जो प्रेरणा दी, वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।