ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग: कांग्रेस सांसद हंडोरे की विवादित टिप्पणी, SIR विवाद में CEC पर लोकतंत्र खत्म करने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद चंद्रकांत हंडोरे ने 26 सितंबर 2026 को मुंबई में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखी और विवादित टिप्पणी करते हुए उनकी तत्काल गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की। SIR (Special Intensive Revision) विवाद की पृष्ठभूमि में की गई इस टिप्पणी में हंडोरे ने ज्ञानेश कुमार पर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप मढ़ा, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
हंडोरे के आरोप और माँगें
हंडोरे ने अपने बयान में कहा कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ज्ञानेश कुमार 'कौन हैं, जो पूरे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की स्थिति में हों।' उनका कहना था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे दिग्गजों के संघर्ष और बलिदान से आकार मिला — और उसकी रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हंडोरे ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी दलों और नागरिकों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की ज़रूरत है।
राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों से जोड़
कांग्रेस सांसद ने इस विवाद को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पिछले दो वर्षों से उठाए जा रहे 'वोट चोरी' के मुद्दे से जोड़ा। उनके अनुसार, राहुल गांधी पीपीटी प्रेजेंटेशन, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक बैठकों के ज़रिए लगातार चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। हंडोरे ने दावा किया कि 'अब राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों के सच होने की बात सामने आ रही है।'
हंडोरे ने सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के आंदोलन की घोषणा को भी सकारात्मक कदम बताया, हालाँकि उन्होंने ज़ोर दिया कि इस मोर्चे पर कांग्रेस पहले से सक्रिय रही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
हंडोरे ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का भी उल्लेख किया जिसके अनुसार तीन सदस्यीय चुनाव आयोग को साथ बैठकर निर्णय लेना होता है और फैसला सर्वसम्मति से, या आवश्यकता पड़ने पर बहुमत के आधार पर, किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद चुनाव आयोग के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने कई मुद्दे उठाए और कहा कि उनकी बात नहीं सुनी गई। उनके मुताबिक, एक अधिकारी द्वारा कथित तौर पर कई बार मनमाने तरीके से फैसले लिए गए।
राजनीतिक संदर्भ और विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब SIR विवाद को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया है।
हंडोरे की इस टिप्पणी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों को विवादित माना जा रहा है और यह बयान तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रिया का केंद्र बन गया है।
आगे क्या होगा
हंडोरे की माँग के बाद यह देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस बयान से कितनी दूरी बनाता है या समर्थन करता है। चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। SIR विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के मद्देनज़र यह पूरा प्रकरण आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।