चंद्रकांत हंडोरे का CEC ज्ञानेश कुमार पर अभद्र बयान, गिरफ्तारी की माँग — कौन हैं यह कांग्रेस सांसद?
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कांग्रेस के राज्यसभा सांसद चंद्रकांत हंडोरे एक विवादास्पद बयान के कारण सुर्खियों में आ गए हैं। 26 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवादों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया। साथ ही उन्होंने CEC को गिरफ्तार करने और उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग भी उठाई।
विवादास्पद बयान और लगाए गए आरोप
हंडोरे ने एक बातचीत के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से उठाए जा रहे 'वोट चोरी' के मुद्दे का भी संदर्भ दिया और दावा किया कि कांग्रेस लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती रही है। उनका यह बयान कथित तौर पर तब आया जब चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव चरम पर था।
चंद्रकांत हंडोरे का राजनीतिक सफर
चंद्रकांत दामोदर हंडोरे महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले वे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में केरोसिन एजेंट के रूप में कार्यरत थे। बाद में उन्होंने पूर्वी मुंबई की राजनीति में पैठ बनाई और 12वीं महाराष्ट्र विधानसभा में चेंबूर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
2004 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हंडोरे ने चेंबूर सीट से आरपीआई उम्मीदवार और कुख्यात गैंगस्टर छोटा राजन के भाई दीपक निखलजे को पराजित किया था — यह जीत उनके राजनीतिक करियर का एक निर्णायक मोड़ मानी जाती है। इसके बाद वे विलासराव देशमुख के नेतृत्व वाली सरकार में सामाजिक न्याय विभाग के कैबिनेट मंत्री भी बने।
संगठनात्मक पदों पर योगदान
हंडोरे 2014 से 2021 तक महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के उपाध्यक्ष रहे। 5 फरवरी 2021 को उन्हें MPCC का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके अलावा वे मुंबई प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी भी रहे। वे अंबेडकरवादी सामाजिक-राजनीतिक संगठन 'भीम शक्ति' के संस्थापक एवं अध्यक्ष भी हैं।
हार और वापसी
2022 में कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाया, लेकिन कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2024 में कांग्रेस ने उन पर फिर भरोसा जताते हुए राज्यसभा चुनाव में उतारा, जहाँ वे सफलतापूर्वक निर्वाचित हुए। एक समय चेंबूर, गोवंडी, मानखुर्द, घाटकोपर और आरसीएफ जैसे इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी, हालाँकि महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद उनका प्रभाव क्षेत्र संकुचित होता गया।
आगे क्या होगा
CEC के विरुद्ध इस तरह की भाषा का प्रयोग संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग पर निशाना साधना नया नहीं है, लेकिन किसी सांसद द्वारा अपशब्दों का सहारा लेना राजनीतिक विमर्श के गिरते स्तर को रेखांकित करता है। यह देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस बयान से किस तरह दूरी बनाता है अथवा उसका बचाव करता है।