मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विधानसभा चुनावों की नई दिशा दी: 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे
सारांश
Key Takeaways
- मतदान केंद्रों पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे।
- मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जाएगा।
- ईसीआई नेट एप्लिकेशन में लगभग 40 सेवाएं शामिल हैं।
- वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
- मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए नई पहलें लागू की गई हैं।
नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की आधिकारिक घोषणा की है। इन राज्यों के किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता उपस्थित नहीं होंगे।
ज्ञानेश कुमार के अनुसार, यह कदम भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए उठाया गया है, ताकि मतदान प्रक्रिया अधिक सुचारू हो सके। सभी चुनावी उम्मीदवारों को बूथ मतदान केंद्र से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर अपने कैंप स्थापित करने की अनुमति होगी। मतदाता सूचना पर्ची पर मतदान केंद्र का स्पष्ट नाम, संख्या, भाग संख्या और मतदाता का क्रमांक अंकित किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जानकारी दी कि पिछले 12 महीनों के दौरान चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा के लिए 13 से अधिक नई पहलों को लागू किया गया है। इनमें से एक प्रमुख पहल है मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, जो सुनिश्चित करता है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। मतदान केंद्र पर शत-प्रतिशत वेब प्रसारण की व्यवस्था की जाएगी।
हर मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी हर दो घंटे में डाले गए मतों की संख्या का रिकॉर्ड रखेंगे, जिससे मीडिया और जनता को वास्तविक मतदान प्रतिशत का पता चल सके। मतदान समाप्त होने के बाद, अंतिम आंकड़ों के अनुसार मतदान प्रतिशत तुरंत प्रदर्शित किया जाएगा। एक नई व्यवस्था के तहत, मतदाता मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर अपने मोबाइल फोन जमा कर सकेंगे और मतदान के बाद उन्हें वापस प्राप्त कर सकेंगे। यह व्यवस्था मतदान केंद्र में अनुशासन और गोपनीयता सुनिश्चित करेगी।
मतदाताओं की सुविधा के लिए, इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों पर सभी उम्मीदवारों के रंगीन चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को आसानी से पहचान सकें। चुनाव आयोग ने एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में सभी डिजिटल सेवाओं को एक ही मोबाइल अनुप्रयोग में एकीकृत किया है, जिसे 'ईसीआई नेट' कहा गया है। इस एकीकृत एप्लिकेशन में लगभग 40 विभिन्न सेवाएं शामिल हैं, जिनके माध्यम से मतदाता अपने पहचान पत्र, मतदान केंद्र की जानकारी, उम्मीदवारों का विवरण, उम्मीदवारों के शपथपत्र, मतदान की प्रगति और मतगणना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
चुनाव आयोग ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों के संबंध में जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिसमें 35 लाख से अधिक लोग भाग ले चुके हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक मतदाता मतदान प्रक्रिया को समझ सके और बिना किसी कठिनाई के अपना मत दे सके। मतदान केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
प्रत्येक मतदान केंद्र पर पेयजल, शौचालय, स्पष्ट संकेत पट्ट, रैंप, व्हीलचेयर, वॉलेंटियर्स, सहायता काउंटर, मतदाता सहायता केंद्र और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाएगी। मतदान कक्ष के अंदर भी पर्याप्त रोशनी और बाहर छाया की व्यवस्था की जाएगी ताकि मतदाताओं को कोई असुविधा न हो। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। मतदान केंद्र भूतल पर बनाए जाएंगे, और वहां रैंप की सुविधा उपलब्ध होगी। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं को मतदान में प्राथमिकता दी जाएगी।
मतदाता पहचान और सुविधा के लिए सभी बूथस्तर अधिकारियों को पहचान पत्र प्रदान किए गए हैं, ताकि नागरिक उन्हें आसानी से पहचान सकें। इसके साथ ही, चुनावी कर्मचारियों के कठिन परिश्रम को देखते हुए उनके मानदेय में भी वृद्धि की गई है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डाक मतपत्रों की गणना इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की गणना से दो चरण पहले की जाएगी। इसके अतिरिक्त, चुनाव से संबंधित सभी सांख्यिकीय आंकड़े मतगणना समाप्त होने के 72 घंटे के भीतर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के प्रत्येक मतदाता को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण में मतदान करने का अवसर मिले और लोकतंत्र का यह महोत्सव पूरी गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हो।