ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: पटना में गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
सीपीआई (एमएल) विधायक संदीप सौरव ने 12 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) और रेवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के कार्यकर्ता पटना के गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च निकालेंगे। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर लगाए जा रहे कथित प्रतिबंधों के विरुद्ध आवाज़ उठाना है।
मार्च का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
सौरव ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। कार्यकर्ता लोकतंत्र, संविधान और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने की माँग उठाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देशभर में चल रहे ऐसे आंदोलनों में एआईएसए की प्रमुख भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाने की कोशिश हो रही है। उनके अनुसार, युवाओं को अपने अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना होगा।
दिल्ली में प्रदर्शन पर पाबंदी का विरोध
सौरव ने जंतर-मंतर के बजाय अन्य स्थानों के विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के विभिन्न विभागों और दिल्ली मेट्रो को नोटिस जारी कर सड़कें बंद करने और बैरिकेडिंग जैसे कदमों पर सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के लिए व्यापक पाबंदियाँ लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध हैं।
मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
सौरव ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और उत्तर प्रदेश में 16 लाख अज्ञात नाम जोड़े गए हैं। उनके अनुसार इन मुद्दों पर समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो मौजूदा स्थिति पैदा नहीं होती।
गौरतलब है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर इस तरह के सवाल कोई नई बात नहीं है — विपक्षी दल पिछले कुछ समय से मतदाता पंजीकरण और चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने का प्रयास किया था और कथित तौर पर मुख्य न्यायाधीश से मिलने से इनकार किया गया।
न्यायपालिका के हस्तक्षेप की माँग
सौरव ने कहा कि इस पूरे मामले में न्यायपालिका का हस्तक्षेप ज़रूरी है। उनके अनुसार चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कमज़ोर होना लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से अपील की कि विरोध करने वालों से संवाद किया जाए और असहमति के लिए लोकतांत्रिक स्थान सुनिश्चित किया जाए।
पुलिस की भूमिका और आगे की राह
प्रस्तावित मार्च के दौरान पुलिस की भूमिका पर सौरव ने स्वीकार किया कि पुलिस कानून-व्यवस्था के नाम पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर सकती है। हालाँकि उन्होंने पुलिस से अपील की कि कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालने दिया जाए। आने वाले दिनों में यह मार्च बिहार में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता के इर्द-गिर्द उभर रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।