15 जुलाई 2026
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हलाल सर्टिफिकेशन विवाद: मौलाना इब्राहिम हुसैन और सिराज खान बोले — बहिष्कार से भारत के निर्यात को नुकसान

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हलाल सर्टिफिकेशन विवाद: मौलाना इब्राहिम हुसैन और सिराज खान बोले — बहिष्कार से भारत के निर्यात को नुकसान

सारांश

गोकुल डेयरी के हलाल सर्टिफिकेशन पर छिड़े बहिष्कार विवाद में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने साफ कहा — यह धर्म नहीं, व्यापार का सवाल है। मौलाना इब्राहिम हुसैन और सिराज खान ने चेताया कि इस विरोध से खाड़ी देशों को होने वाला भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकता है।

मुख्य बातें

मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन का विरोध उचित नहीं — यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात से जुड़ा विषय है।
जमीयत उलेमा-ए-मुंबई के अध्यक्ष सिराज खान ने गोकुल डेयरी बहिष्कार की माँग करने वाले संगठनों की आलोचना की।
सिराज खान के अनुसार, मलेशिया, इंडोनेशिया और खाड़ी देशों में हलाल प्रमाणित उत्पादों की माँग अधिक है और यह भारत के व्यापारिक हित से जुड़ा है।
हलाल सर्टिफिकेशन के लिए विस्तृत जाँच-पड़ताल और निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है — यह आसानी से नहीं मिलता।
सिराज खान ने संगठनों से अपील की कि धार्मिक विवादों के बजाय महंगाई और आर्थिक चुनौतियों पर ध्यान दें।

गोकुल डेयरी प्रोडक्ट्स को मिले हलाल सर्टिफिकेशन के विरोध में कुछ हिंदू संगठनों द्वारा चलाए जा रहे बहिष्कार अभियान के खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने 30 मई 2026 को कड़ा रुख अपनाया। धर्मगुरुओं का तर्क है कि हलाल प्रमाणन केवल धार्मिक मसला नहीं, बल्कि यह भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात से सीधे जुड़ा विषय है।

मौलाना इब्राहिम हुसैन का पक्ष

मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन का विरोध उचित नहीं है, क्योंकि इसकी एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रमाणन के ज़रिये भारतीय उत्पादों को खाड़ी देशों सहित कई मुस्लिम-बहुल देशों में स्वीकार्यता मिलती है, जिससे देश के निर्यात और अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलती है।

उन्होंने आगाह किया कि यदि इस प्रकार के प्रमाणपत्रों का विरोध जारी रहा, तो इसका नकारात्मक असर व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। साथ ही, उनका कहना था कि ऐसे विरोध से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

जमीयत उलेमा-ए-मुंबई की आलोचना

जमीयत उलेमा-ए-मुंबई के अध्यक्ष सिराज खान ने गोकुल डेयरी के बहिष्कार की माँग करने वाले संगठनों की आलोचना करते हुए कहा कि यदि हलाल सर्टिफिकेशन पर आपत्ति है, तो पहले यह भी पूछा जाना चाहिए कि संबंधित कंपनी ने यह प्रमाणपत्र क्यों प्राप्त किया। उनके अनुसार, मलेशिया, इंडोनेशिया और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में हलाल प्रमाणित उत्पादों की माँग अधिक होती है और वहाँ के उपभोक्ता इसी आधार पर उत्पादों का चयन करते हैं।

सिराज खान ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कंपनी को हलाल सर्टिफिकेशन आसानी से नहीं मिलता — इसके लिए विस्तृत जाँच-पड़ताल और निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है।

व्यापार बनाम धर्म: असली सवाल

सिराज खान ने सवाल उठाया कि इस विषय को धार्मिक या सांप्रदायिक दृष्टिकोण से क्यों देखा जा रहा है, जबकि यह मुख्य रूप से व्यापार और बाज़ार की आवश्यकता से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भारतीय कंपनी अपने उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने के लिए हलाल प्रमाणन प्राप्त करती है, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारत खाड़ी देशों के साथ अपने व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है। गौरतलब है कि हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर देश में यह पहली बार नहीं है कि इस तरह का विवाद सामने आया हो।

आर्थिक प्राथमिकताओं पर ज़ोर

सिराज खान ने महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और आम जनता की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठनों को धार्मिक विवादों के बजाय देश के विकास और आर्थिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनका कहना था कि देश में कई महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की स्थिति स्पष्ट है — जहाँ कुछ हिंदू संगठन हलाल सर्टिफिकेशन को धार्मिक दृष्टि से देख रहे हैं, वहीं मुस्लिम धर्मगुरु और व्यापार विशेषज्ञ इसे आर्थिक ज़रूरत बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और व्यापक रूप ले सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाज़ारों में हलाल प्रमाणन एक व्यावसायिक अनिवार्यता है। लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह सवाल चूक जाती है कि भारत में हलाल प्रमाणन की निगरानी और नियमन की कोई केंद्रीय व्यवस्था क्यों नहीं है। बहिष्कार की माँग और उसके जवाब — दोनों ही असली नीतिगत शून्य से ध्यान हटाते हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हलाल सर्टिफिकेशन क्या होता है और यह क्यों ज़रूरी है?
हलाल सर्टिफिकेशन एक प्रमाणन प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई उत्पाद इस्लामी मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। खाड़ी देशों, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे बाज़ारों में खाद्य और डेयरी उत्पादों के निर्यात के लिए यह प्रमाणन अनिवार्य शर्त होती है।
गोकुल डेयरी के हलाल सर्टिफिकेशन पर विवाद क्यों हुआ?
कुछ हिंदू संगठनों ने गोकुल डेयरी प्रोडक्ट्स को मिले हलाल सर्टिफिकेशन को धार्मिक दृष्टि से आपत्तिजनक बताते हुए बहिष्कार अभियान शुरू किया। इस पर मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे व्यापारिक आवश्यकता बताया।
मौलाना इब्राहिम हुसैन ने हलाल विवाद पर क्या कहा?
मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन का विरोध उचित नहीं है क्योंकि इससे भारतीय उत्पादों को खाड़ी देशों सहित कई मुस्लिम-बहुल देशों में स्वीकार्यता मिलती है। उन्होंने चेताया कि इस विरोध से भारत के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सिराज खान ने बहिष्कार अभियान की आलोचना क्यों की?
जमीयत उलेमा-ए-मुंबई के अध्यक्ष सिराज खान ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन मुख्य रूप से व्यापार और बाज़ार की ज़रूरत से जुड़ा मामला है, न कि धार्मिक या सांप्रदायिक। उन्होंने संगठनों से अपील की कि महंगाई और आर्थिक चुनौतियों जैसे असली मुद्दों पर ध्यान दें।
क्या हलाल सर्टिफिकेशन से भारत के निर्यात को फायदा होता है?
हाँ, मलेशिया, इंडोनेशिया और खाड़ी देशों के उपभोक्ता हलाल प्रमाणित उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए यह प्रमाणन भारतीय कंपनियों को इन बाज़ारों में प्रवेश दिलाने में सहायक होता है। धर्मगुरुओं के अनुसार, इसके विरोध से भारत के व्यापारिक हित प्रभावित हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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