16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हलाल सर्टिफिकेशन विवाद: मौलाना इब्राहिम हुसैन और सिराज खान ने गोकुल डेयरी बहिष्कार अभियान को बताया गलत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हलाल सर्टिफिकेशन विवाद: मौलाना इब्राहिम हुसैन और सिराज खान ने गोकुल डेयरी बहिष्कार अभियान को बताया गलत

सारांश

गोकुल डेयरी के हलाल सर्टिफिकेशन पर बहिष्कार की माँग के बीच मौलाना इब्राहिम हुसैन और जमीयत उलेमा-ए-मुंबई के सिराज खान ने इसे धार्मिक नहीं, बल्कि व्यापारिक मुद्दा करार दिया — और कहा कि खाड़ी व दक्षिण-पूर्व एशियाई बाज़ारों में निर्यात के लिए यह प्रमाणन ज़रूरी है।

मुख्य बातें

मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन का विरोध भारत के निर्यात और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकता है।
जमीयत उलेमा-ए-मुंबई के अध्यक्ष सिराज खान ने गोकुल डेयरी बहिष्कार अभियान की आलोचना करते हुए इसे व्यापारिक ज़रूरत बताया।
मलेशिया , इंडोनेशिया और खाड़ी देशों में हलाल-प्रमाणित उत्पादों की माँग अधिक है और निर्यात के लिए यह अनिवार्य शर्त है।
हलाल प्रमाणन के लिए विस्तृत जाँच और निर्धारित मानकों को पूरा करना होता है — यह प्रक्रिया स्वतः नहीं मिलती।
सिराज खान ने संगठनों से आग्रह किया कि वे धार्मिक विवादों की बजाय महंगाई और आर्थिक चुनौतियों पर ध्यान दें।

गोकुल डेयरी प्रोडक्ट्स को मिले हलाल सर्टिफिकेशन के विरोध में कुछ हिंदू संगठनों द्वारा चलाए जा रहे बहिष्कार अभियान के खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने 30 मई को कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। धर्मगुरुओं का तर्क है कि हलाल प्रमाणन केवल धार्मिक मामला नहीं, बल्कि भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात से जुड़ा एक आर्थिक विषय है।

मौलाना इब्राहिम हुसैन का रुख

मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन का विरोध करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, हलाल प्रमाणन की एक सुनिश्चित प्रक्रिया होती है और इसके ज़रिए भारतीय उत्पादों को खाड़ी देशों सहित कई मुस्लिम-बहुल देशों में स्वीकार्यता मिलती है, जिससे देश के निर्यात और अर्थव्यवस्था दोनों को बल मिलता है।

उन्होंने आगाह किया कि यदि इस तरह के प्रमाणपत्रों का विरोध जारी रहा, तो इसका नकारात्मक प्रभाव व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। साथ ही, उनके अनुसार, ऐसे विरोध से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

जमीयत उलेमा-ए-मुंबई की आलोचना

जमीयत उलेमा-ए-मुंबई के अध्यक्ष सिराज खान ने भी गोकुल डेयरी के बहिष्कार की माँग करने वाले संगठनों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि हलाल सर्टिफिकेशन पर आपत्ति है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि संबंधित कंपनी ने यह प्रमाणपत्र क्यों प्राप्त किया — और इसका उत्तर व्यापारिक ज़रूरत में छिपा है।

सिराज खान के अनुसार, मलेशिया, इंडोनेशिया और खाड़ी क्षेत्र के अनेक देशों में हलाल-प्रमाणित उत्पादों की माँग अधिक है और वहाँ के उपभोक्ता इसी आधार पर उत्पादों का चयन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई भारतीय कंपनी वैश्विक बाज़ार तक पहुँचने के लिए हलाल प्रमाणन लेती है, तो इसमें आपत्ति का कोई आधार नहीं है।

प्रमाणन प्रक्रिया और व्यापारिक महत्व

सिराज खान ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी कंपनी को हलाल सर्टिफिकेशन आसानी से नहीं मिलता — इसके लिए विस्तृत जाँच-पड़ताल और निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है। उनके अनुसार, कई देशों में खाद्य और डेयरी उत्पादों के निर्यात के लिए हलाल प्रमाणन एक आवश्यक शर्त है, और यह खाड़ी देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों को भी मज़बूत करता है।

आर्थिक प्राथमिकताओं पर जोर

सिराज खान ने कहा कि देश में महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और आम जनता की समस्याएँ जैसी गंभीर आर्थिक चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिन पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है। उनके अनुसार, संगठनों को धार्मिक विवादों के बजाय देश के विकास और आर्थिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

गौरतलब है कि हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारत अपने निर्यात को बढ़ाने के लिए खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाज़ारों पर ज़ोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि हिंदू संगठन और कंपनियाँ इस बहस पर क्या रुख अपनाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि भारत के कुल खाद्य निर्यात में खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाज़ारों की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है, और इन बाज़ारों में प्रवेश के लिए हलाल प्रमाणन एक व्यावसायिक अनिवार्यता है। बहिष्कार अभियान चलाने वाले संगठनों ने इस आर्थिक आयाम पर कोई ठोस विकल्प नहीं सुझाया है। विरोधाभास यह है कि 'स्वदेशी' और 'आत्मनिर्भर भारत' की वकालत करते हुए भी यदि निर्यात-सहायक प्रमाणन को लक्ष्य बनाया जाए, तो यह उसी लक्ष्य को कमज़ोर करता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हलाल सर्टिफिकेशन क्या होता है और यह क्यों ज़रूरी है?
हलाल सर्टिफिकेशन एक प्रमाणन प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई उत्पाद इस्लामी मानकों के अनुसार बना है। खाड़ी देशों, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम-बहुल देशों में खाद्य और डेयरी उत्पादों के निर्यात के लिए यह अनिवार्य शर्त है।
गोकुल डेयरी बहिष्कार अभियान क्यों शुरू हुआ?
कुछ हिंदू संगठनों ने गोकुल डेयरी प्रोडक्ट्स को मिले हलाल सर्टिफिकेशन पर आपत्ति जताते हुए बहिष्कार अभियान शुरू किया। उनका तर्क है कि एक डेयरी कंपनी को हलाल प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बहिष्कार अभियान का विरोध क्यों किया?
मौलाना इब्राहिम हुसैन और सिराज खान ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन मुख्यतः व्यापारिक और निर्यात से जुड़ा विषय है, धार्मिक नहीं। उनके अनुसार, इसके विरोध से भारत के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
हलाल सर्टिफिकेशन भारत के निर्यात को कैसे प्रभावित करता है?
हलाल प्रमाणन के ज़रिए भारतीय उत्पादों को खाड़ी देशों सहित कई मुस्लिम-बहुल देशों में स्वीकार्यता मिलती है, जिससे निर्यात बढ़ता है और देश की अर्थव्यवस्था को लाभ होता है। मलेशिया, इंडोनेशिया और खाड़ी क्षेत्र में यह प्रमाणन बाज़ार में प्रवेश की अनिवार्य शर्त मानी जाती है।
क्या हलाल सर्टिफिकेशन आसानी से मिल जाता है?
नहीं। सिराज खान के अनुसार, हलाल सर्टिफिकेशन के लिए कंपनियों को विस्तृत जाँच-पड़ताल से गुज़रना पड़ता है और निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया स्वतः या आसानी से पूरी नहीं होती।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले