14 जुलाई 2026
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हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल ढहा: 6 मजदूरों की मौत, बेतवा नदी पर तूफान में हुआ हादसा

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हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल ढहा: 6 मजदूरों की मौत, बेतवा नदी पर तूफान में हुआ हादसा

सारांश

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में तूफान की रात बेतवा नदी पर बन रहे पुल का स्लैब ढह गया। नीचे सो रहे मजदूर मलबे में दब गए — 6 की मौत, 3 अभी भी खंभे पर फंसे। SDRF और पुलिस युद्धस्तर पर बचाव में जुटी है।

मुख्य बातें

29 मई 2026 की रात करीब 2 बजे हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का स्लैब ढह गया।
भीषण तूफान के दौरान हुए इस हादसे में 6 मजदूरों की मौत हो गई, जो पुल के नीचे सो रहे थे।
3 लोग अभी भी पुल के खंभे पर फंसे हैं; एसडीआरएफ और पुलिस बचाव अभियान चला रही है।
मृतकों में बांदा और हमीरपुर जनपद के मजदूर शामिल; 5 की पहचान हो चुकी है।
पुल का निर्माण राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के प्रयासों से कराया जा रहा था; गुणवत्ता जाँच के लिए तकनीकी टीम बुलाई गई।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में 29 मई 2026 की रात भीषण तूफान के दौरान बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे मलबे में दबकर 6 मजदूरों की मौत हो गई। हादसे के समय पुल के नीचे सो रहे कई मजदूर मलबे में दब गए, और 3 लोग अभी भी खंभे पर फंसे बताए जा रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

28 और 29 मई की मध्यरात्रि करीब 2 बजे थाना लालपुर क्षेत्र में मोराकंदर और कुरारा की मवाईजार को जोड़ने के लिए बन रहे पुल का स्लैब अचानक गिर पड़ा। हादसे के वक्त पुल के नीचे बड़ी संख्या में मजदूर रात्रि विश्राम कर रहे थे, जो अचानक मलबे की चपेट में आ गए।

हमीरपुर के एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया, 'सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और हम सभी तत्काल मौके पर पहुंच गए। अभी तीन लोग खंभे पर फंसे हुए हैं। उन्हें बचाने के लिए एसडीआरएफ और हमारी टीम लगातार प्रयास कर रही है। छह लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है, जिनमें से पांच लोगों की पहचान कर ली गई है। स्लैब हटाकर उन्हें बाहर निकाला जाएगा।'

मृतकों की पहचान और पृष्ठभूमि

मृतकों में बांदा और हमीरपुर जनपद के मजदूर शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस पुल का निर्माण राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के प्रयासों से कराया जा रहा था। पाँच मृतकों की पहचान अधिकारियों द्वारा कर ली गई है, जबकि एक की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

बचाव अभियान

घटनास्थल पर एसडीआरएफ की टीमें, पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। खंभे पर फंसे 3 लोगों को सुरक्षित उतारने के प्रयास भी समानांतर रूप से चल रहे हैं।

जाँच और आगे की कार्रवाई

हादसे के कारणों की जाँच के लिए तकनीकी टीम को बुलाया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि पुल की संरचनात्मक गुणवत्ता में कोई कमी थी या तूफान की तीव्रता इसका प्रमुख कारण रही। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की गुणवत्ता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब निर्माण स्थल पर मजदूरों के रात्रि विश्राम की व्यवस्था बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के होती दिखती है। तकनीकी टीम की जाँच यह तय करेगी कि ढहने का कारण तूफान था या संरचनात्मक खामी — लेकिन दोनों ही स्थितियों में मजदूरों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही स्पष्ट है। यह पहली बार नहीं है जब यूपी में निर्माणाधीन ढाँचा जानलेवा साबित हुआ हो; जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हमीरपुर में कौन-सा पुल गिरा और कहाँ?
हमीरपुर जिले के थाना लालपुर क्षेत्र में मोराकंदर और कुरारा की मवाईजार को जोड़ने के लिए बेतवा नदी पर बन रहा पुल 29 मई 2026 की रात करीब 2 बजे ढह गया। यह पुल राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के प्रयासों से बनवाया जा रहा था।
हमीरपुर पुल हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
इस हादसे में 6 मजदूरों की मौत हो गई, जो हादसे के समय पुल के नीचे सो रहे थे। मृतकों में बांदा और हमीरपुर जनपद के मजदूर शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें से 5 की पहचान हो चुकी है।
क्या अभी भी कोई मलबे में फंसा है?
हाँ, एएसपी अरविंद कुमार वर्मा के अनुसार 3 लोग अभी भी पुल के खंभे पर फंसे हैं। एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें उन्हें सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास में लगी हैं।
पुल क्यों गिरा — तूफान या निर्माण में खामी?
अधिकारियों के अनुसार भीषण तूफान के दौरान पुल का स्लैब गिरा। हादसे के सटीक कारणों की जाँच के लिए तकनीकी टीम बुलाई जा रही है, जो यह निर्धारित करेगी कि संरचनात्मक गुणवत्ता में कोई कमी थी या नहीं।
बचाव अभियान में कौन-कौन शामिल है?
घटनास्थल पर एसडीआरएफ की टीमें, स्थानीय पुलिस बल, और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तैनात हैं। मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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