19 अक्टूबर 2026
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हरसिमरत कौर ने अमित शाह को लिखा पत्र, नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच माँगी

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हरसिमरत कौर ने अमित शाह को लिखा पत्र, नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच माँगी

सारांश

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या और उनके पिता के गंभीर आरोपों के बाद हरसिमरत कौर ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा। पुलिस अधिकारियों पर ड्रग नेटवर्क में शामिल होने के आरोप और एक जेल काट चुके आरोपी को हथियार लाइसेंस मिलने की कहानी पंजाब में ड्रग संकट की गहराई बताती है।

मुख्य बातें

SAD सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 19 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की सीबीआई जांच की माँग की।
झोटा ने मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं की बिक्री लाइव स्ट्रीम की थी, जिसके तुरंत बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
झोटा के पिता भीम सिंह ने बयान में तत्कालीन डीएसपी संजीव गोयल , एसएसपी नानक सिंह समेत कई पुलिस अधिकारियों पर ड्रग नेटवर्क में मिलीभगत का आरोप लगाया।
आरोपी अश्विनी कुमार को जेल से रिहाई के कुछ महीने बाद 2024 में तत्कालीन मानसा एसएसपी ने हथियार लाइसेंस जारी किया था।
यह पत्र गृह मंत्री के 20 अक्टूबर के पंजाब दौरे से एक दिन पहले भेजा गया।
हरसिमरत कौर ने सुनाम के मोहनजीत सिंह और गुलजार सिंह के मामलों का भी उल्लेख करते हुए व्हिसलब्लोअर्स के उत्पीड़न की व्यापक जांच की माँग की।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 19 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की सीबीआई जांच कराने की माँग की। उन्होंने साथ ही पंजाब में कथित राजनेता पुलिस ड्रग माफिया गठजोड़ की भी व्यापक जांच कराने की अपील की।

हत्याकांड का घटनाक्रम

परविंदर सिंह झोटा मानसा जिले में प्रतिबंधित दवाओं और सिंथेटिक नशों की अवैध बिक्री के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। हरसिमरत कौर के पत्र के अनुसार, झोटा ने घर से निकलने से पहले मानसा के डीएसपी को सूचित किया था और उस केमिस्ट की दुकान पर पहुँचने को कहा था जहाँ नशीली दवाएँ बेची जा रही थीं। बावजूद इसके, पुलिस समय पर नहीं पहुँची।

पत्र में बताया गया कि झोटा ने मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार द्वारा नशीली दवाओं की बिक्री का मामला लाइव स्ट्रीम करना शुरू किया। इसके तुरंत बाद अश्विनी ने फोन पर किसी से बात की और फिर झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए।

पीड़ित पिता के गंभीर आरोप

झोटा के पिता भीम सिंह ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि उनके बेटे को राज्य के डीजीपी और मानसा के एसएसपी की शह पर झूठे मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उनका आरोप है कि जेल में रहते हुए मानसा के तत्कालीन एसएसपी ने झोटा को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने ड्रग कारोबार के खिलाफ आवाज उठाना जारी रखा तो उन्हें 'खत्म' कर दिया जाएगा।

भीम सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि मानसा के तत्कालीन डीएसपी संजीव गोयल खुद नशीली दवाओं के निर्माण की इकाइयाँ चलाते थे। इसके अलावा, स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर शीशम मित्तल पर ड्रग माफिया से मिले होने और मेडिकल स्टोरों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने बेटे की हत्या के लिए मौजूदा सब डिवीजन डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल और एसएचओ बेअंत कौर को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।

हथियार लाइसेंस पर सवाल

हरसिमरत कौर ने पत्र में एक और गंभीर तथ्य उजागर किया: आरोपी अश्विनी कुमार पर पहले भी कई बार प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाएँ बेचने के आरोप लग चुके थे और वह जेल भी जा चुका था। इसके बावजूद, जेल से रिहाई के कुछ महीने बाद 2024 में तत्कालीन मानसा एसएसपी ने उसे हथियार लाइसेंस मंजूर कर दिया। कौर ने कहा, "यह सब बताता है कि अश्विनी के पीछे बहुत ताकतवर लोग थे।"

अन्य व्हिसलब्लोअर मामलों का उल्लेख

शिरोमणि अकाली दल की सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने पत्र में सुनाम के मोहनजीत सिंह का मामला भी उठाया, जिन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कार्यक्रम में 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग्स) की बिक्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने गुलजार सिंह की आत्महत्या का भी उल्लेख किया, जिन्होंने वित्त मंत्री एस. हरपाल चीमा से सवाल पूछा था कि 'चिट्टा' खुलेआम क्यों बिक रहा है — और जिसके बाद पुलिस प्रताड़ना के आरोप सामने आए।

कौर ने माँग की कि आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब में ड्रग तस्करी में ड्रग इंस्पेक्टरों की भूमिका तथा नशा विरोधी कार्यकर्ताओं को दबाने के लिए पुलिस बल के इस्तेमाल के हाल के सभी मामलों की जांच सीबीआई से कराई जाए।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह पत्र 20 अक्टूबर को गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से ठीक एक दिन पहले लिखा गया। गौरतलब है कि पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रही है और AAP सरकार पर इसे लेकर विपक्ष पहले भी सवाल उठाता रहा है। यह मामला ऐसे समय में और अधिक संवेदनशील हो गया है जब झोटा जैसे कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और ड्रग नेटवर्क में कथित सरकारी मिलीभगत के आरोप जनमानस में गहरी चिंता पैदा कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मारा जाता है, और हत्यारे को जेल के बाद भी हथियार लाइसेंस मिल जाता है। विपक्ष की सीबीआई जांच की माँग राजनीतिक दबाव का हिस्सा है, यह सच है — लेकिन पीड़ित पिता के बयान में जो नाम और आरोप हैं, वे जांच से परे नहीं जाने चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार राज्य पुलिस की जगह स्वतंत्र एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपती है, या यह पत्र भी उन दर्जनों राजनीतिक अपीलों की सूची में खो जाता है जो जवाब का इंतजार करती रहती हैं।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ सक्रिय कार्यकर्ता थे। वे एक मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं की बिक्री की लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे थे, तभी स्टोर मालिक अश्विनी कुमार ने उन्हें गोली मार दी; दो अन्य लोग भी घायल हुए।
हरसिमरत कौर ने सीबीआई जांच की माँग क्यों की?
हरसिमरत कौर का कहना है कि झोटा ने हत्या से पहले पुलिस को सूचित किया था, फिर भी पुलिस नहीं पहुँची। पीड़ित के पिता के बयान में कई पुलिस अधिकारियों पर ड्रग नेटवर्क में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं, इसलिए राज्य पुलिस की जगह निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है।
झोटा के पिता भीम सिंह ने किन अधिकारियों पर आरोप लगाए?
भीम सिंह ने अपने बयान में तत्कालीन डीएसपी संजीव गोयल पर ड्रग निर्माण इकाइयाँ चलाने, तत्कालीन एसएसपी नानक सिंह पर झोटा को झूठे मामलों में फँसाने, ड्रग इंस्पेक्टर शीशम मित्तल पर माफिया से मिलीभगत, और डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल व एसएचओ बेअंत कौर पर हत्या की जिम्मेदारी का आरोप लगाया।
आरोपी अश्विनी कुमार को हथियार लाइसेंस कैसे मिला?
अश्विनी कुमार पर पहले भी प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाएँ बेचने के आरोप थे और वह जेल जा चुका था। इसके बावजूद, 2024 में जेल से रिहाई के कुछ महीने बाद तत्कालीन मानसा एसएसपी ने उसे हथियार लाइसेंस मंजूर कर दिया, जो हरसिमरत कौर के अनुसार ताकतवर संरक्षण का संकेत है।
गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से यह पत्र कैसे जुड़ा है?
हरसिमरत कौर ने यह पत्र 19 अक्टूबर को लिखा, जो अमित शाह के 20 अक्टूबर के पंजाब दौरे से ठीक एक दिन पहले था। इससे पत्र का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है और यह केंद्र सरकार पर तत्काल कार्रवाई के लिए दबाव बनाने का प्रयास माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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