हार्ट फेलियर में बीटा-ब्लॉकर सभी मरीजों पर असरदार नहीं, JAMA में प्रकाशित नई स्टडी का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
हार्ट फेलियर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (HFpEF) से पीड़ित मरीजों में बीटा-ब्लॉकर दवाओं के उपयोग से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 74 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है — यह निष्कर्ष यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट के शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी में सामने आया है, जिसे JAMA नेटवर्क ओपन में प्रकाशित किया गया है। 12 जुलाई 2026 को सामने आए इस अध्ययन ने हार्ट फेलियर के इलाज में 'एक दवा, सभी के लिए' की अवधारणा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हार्ट फेलियर के दो अलग-अलग प्रकार
हार्ट फेलियर एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय शरीर की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप करने में असमर्थ हो जाता है। इसके कारण मरीजों को सांस लेने में कठिनाई, असामान्य थकान, पैरों व टखनों में सूजन और दैनिक गतिविधियों में परेशानी जैसी समस्याएँ होती हैं।
चिकित्सकीय दृष्टि से हार्ट फेलियर के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं। पहले प्रकार में — जिसे हार्ट फेलियर विद रिड्यूस्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (HFrEF) कहा जाता है — हृदय की मांसपेशियाँ कमज़ोर पड़ जाती हैं और रक्त को पर्याप्त बल से पंप नहीं कर पातीं। दूसरे प्रकार — HFpEF — में हृदय सामान्य मात्रा में रक्त पंप तो करता है, लेकिन हृदय की मांसपेशियाँ सख्त हो जाती हैं और प्रत्येक धड़कन के बीच पर्याप्त रूप से शिथिल नहीं हो पातीं, जिससे हृदय में रक्त भरने की क्षमता घट जाती है। गौरतलब है कि लगभग आधे हार्ट फेलियर मरीज इसी HFpEF श्रेणी में आते हैं।
स्टडी में क्या पाया गया
डॉ. टिमोथी प्लांटे के नेतृत्व में यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट की टीम ने अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा समर्थित TOPCAT क्लिनिकल ट्रायल के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस ट्रायल में शामिल लगभग 80 प्रतिशत मरीज पहले से बीटा-ब्लॉकर दवाएँ ले रहे थे, जिसने शोधकर्ताओं को दवा लेने और न लेने वाले मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों की तुलना करने का अवसर दिया।
अध्ययन के नतीजे उल्लेखनीय रहे: HFpEF यानी सख्त हृदय वाले जो मरीज़ बीटा-ब्लॉकर ले रहे थे, उनमें हार्ट फेलियर के बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती होने की आशंका 74 प्रतिशत अधिक पाई गई। यह वही दवाएँ हैं जो HFrEF मरीजों में अस्पताल भर्ती का जोखिम कम करने में प्रभावी मानी जाती हैं।
बीटा-ब्लॉकर HFpEF में क्यों हो सकती हैं नुकसानदेह
शोधकर्ताओं के अनुसार इसके पीछे एक संभावित जैविक कारण यह हो सकता है कि HFpEF में हृदय पहले से ही पर्याप्त रूप से शिथिल नहीं हो पाता। बीटा-ब्लॉकर दवाएँ हृदय गति को धीमा करती हैं, जिससे कुछ मरीजों में हृदय के भीतर दबाव बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में द्रव जमा होना, सांस फूलना और सूजन जैसी समस्याएँ और अधिक गंभीर हो सकती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब HFpEF के लिए प्रभावी उपचारों की कमी चिकित्सा जगत में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। HFrEF के विपरीत, जिसके लिए दशकों से स्थापित दवाएँ उपलब्ध हैं, HFpEF के इलाज में अब तक सीमित सफलता मिली है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि मरीज़ अपनी मर्जी से बीटा-ब्लॉकर दवाएँ बंद न करें। ये दवाएँ उच्च रक्तचाप, अनियमित हृदय गति और हार्ट अटैक के बाद सुरक्षा जैसे अन्य कारणों से भी दी जाती हैं। दवा में किसी भी प्रकार का बदलाव केवल चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
यह अध्ययन इस बात पर ज़ोर देता है कि HFpEF के लिए नए और अधिक लक्षित उपचार विकल्पों की खोज की आवश्यकता है, ताकि इस प्रकार के हार्ट फेलियर से पीड़ित करोड़ों मरीजों को बेहतर देखभाल मिल सके।