हिमंता बिस्वा सरमा ने शिक्षक दंपत्ति की तारीफ की, जिन्होंने जीवन भर की कमाई शिक्षण संस्थान को दान दी
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 31 जुलाई 2026 को अपने पूर्व शिक्षकों —著名 शिक्षाविद डॉ. नंदिता भट्टाचार्य गोस्वामी और डॉ. पन्नालाल गोस्वामी — को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दंपत्ति ने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शिक्षण संस्थान स्थापित करने के उद्देश्य से अपनी समस्त जीवन-भर की कमाई समर्पित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने इस निःस्वार्थ कदम को सच्ची विरासत का उदाहरण बताया।
एक्स पर मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'हम अक्सर विरासत की बात करते हैं। बहुत कम लोग ही इसे इतने सार्थक ढंग से जीते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि डॉ. नंदिता भट्टाचार्य गोस्वामी और डॉ. पन्नालाल गोस्वामी ने अपनी जीवन भर की कमाई एक ऐसे संस्थान के निर्माण में लगा दी है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित और शिक्षित करेगा। इस पोस्ट के साथ उन्होंने इस शिक्षाविद दंपत्ति का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उनके शैक्षणिक विजन को प्रस्तुत किया गया है।
शिष्य की विनम्रता
अपने शिक्षकों के साथ व्यक्तिगत संबंध को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, 'उनके छात्र के तौर पर मैं बहुत विनम्र महसूस कर रहा हूँ। उन्होंने दिखाया है कि ज्ञान से बड़ी कोई विरासत नहीं होती।' यह स्वीकृति इस बात का संकेत है कि राजनीतिक नेतृत्व भी शिक्षकों के दीर्घकालिक प्रभाव को महत्व देता है।
असम के शिक्षा तंत्र के संदर्भ में महत्व
यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब असम संस्थागत विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता के माध्यम से अपने शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दे रहा है। गौरतलब है कि राज्य में निजी और सामुदायिक स्तर पर शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा देने की नीति के बीच इस दंपत्ति का कदम एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। क्लासरूम से बाहर जन-सेवा के इस उदाहरण की व्यापक सराहना हो रही है।
शिक्षा को विरासत मानने का संदेश
मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए वीडियो में इस बात पर जोर दिया गया है कि शिक्षा ही वह सबसे स्थायी धरोहर है जिसे कोई व्यक्ति अपने पीछे छोड़ सकता है। डॉ. नंदिता भट्टाचार्य गोस्वामी और डॉ. पन्नालाल गोस्वामी का यह निर्णय असम में शिक्षा के प्रति समर्पण की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जो दशकों से राज्य के बौद्धिक विकास की नींव रही है। आने वाले समय में यह संस्थान किस रूप लेगा और कितने छात्रों को लाभान्वित करेगा, यह देखना शेष है।