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खगेन महंता की पुण्यतिथि पर CM हिमंत बिस्वा सरमा ने दी श्रद्धांजलि, 'बिहू के राजा' की विरासत को किया याद

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खगेन महंता की पुण्यतिथि पर CM हिमंत बिस्वा सरमा ने दी श्रद्धांजलि, 'बिहू के राजा' की विरासत को किया याद

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 'बिहू के राजा' खगेन महंता की पुण्यतिथि पर एक्स पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। महंता ने असमिया लोक संगीत को क्षेत्रीय सीमाओं से परे वैश्विक मंच तक पहुँचाया — उनकी विरासत आज भी बिहू उत्सवों में जीवंत है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 12 जून 2026 को खगेन महंता की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने महंता को 'बिहू के राजा' बताते हुए असमिया लोक संगीत में उनकी अमिट विरासत को याद किया।
महंता ने बिहू गीतों को पूरे भारत और विदेशों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
उनके गीत आज भी बिहू उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बजाए जाते हैं।
पुण्यतिथि पर राज्यभर के कलाकारों, प्रशंसकों और सांस्कृतिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 12 जून 2026 को प्रख्यात असमिया लोक गायक खगेन महंता की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने असमिया लोक संगीत और बिहू परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में महंता के अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में खगेन महंता को 'बिहू के राजा' की उपाधि से नवाज़ते हुए लिखा, 'आज हम 'बिहू के राजा' खगेन महंता को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। असमिया लोक संगीत के उस्ताद, उनकी आवाज़ ने सिर्फ़ गाने का काम नहीं किया, बल्कि असम की सांस्कृतिक धड़कन को ज़िंदा रखा और बिहू के जीवंत जोश को दुनिया के मंच तक पहुँचाया। उनकी कला पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, यह पक्का करते हुए कि उनकी धुन हमारे दिलों से कभी न मिटे। इस अमर कलाकार को श्रद्धांजलि।'

खगेन महंता: एक अमर विरासत

खगेन महंता असमिया संगीत जगत की उन विभूतियों में शुमार हैं, जिन्होंने पारंपरिक बिहू गीतों को अपनी अद्वितीय गायकी से नई ऊँचाइयाँ दीं। असम में जन्मे महंता ने अपना संपूर्ण जीवन स्थानीय लोक संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया। उनके गीत आज भी बिहू उत्सव और सांस्कृतिक आयोजनों में समान उत्साह से गाए जाते हैं।

सांस्कृतिक दूत की भूमिका

अपनी विशिष्ट गायन शैली और लोक परंपराओं की गहरी समझ के कारण महंता असम के सांस्कृतिक राजदूत बन गए। उन्होंने असमिया लोक परंपराओं को क्षेत्रीय सीमाओं से परे ले जाकर पूरे भारत और विदेशों के श्रोताओं तक पहुँचाया। गौरतलब है कि उनके प्रयासों ने कई पारंपरिक संगीत शैलियों को विलुप्त होने से बचाया और अनगिनत गायकों तथा संगीतकारों को प्रेरणा दी।

सम्मान और पहचान

कई दशकों के सक्रिय संगीत-जीवन में महंता को असमिया संगीत में उनके योगदान के लिए व्यापक सराहना और अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उनके निधन के वर्षों बाद भी संगीत प्रेमियों के बीच उनकी विरासत की गूँज बनी हुई है।

पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

इस अवसर पर राज्यभर के प्रशंसकों, कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने एकजुट होकर इस महान संगीतकार को याद किया। असम की सांस्कृतिक पहचान में महंता का योगदान आज भी अमिट है और आने वाली पीढ़ियाँ उनकी धुनों से प्रेरणा लेती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ लोक परंपराओं को राज्य-पहचान के केंद्र में रखा जाता है। खगेन महंता जैसे कलाकारों की विरासत को सरकारी स्तर पर याद करना उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें सांस्कृतिक प्रतीकों को सामाजिक एकजुटता के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। असली चुनौती यह है कि इन श्रद्धांजलियों के साथ-साथ लोक संगीत के जीवित कलाकारों और संस्थाओं को ठोस संसाधन और मंच भी मिले, ताकि महंता की विरासत केवल स्मृति न रहे, बल्कि जीवंत परंपरा बनी रहे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने खगेन महंता को श्रद्धांजलि क्यों दी?
12 जून को खगेन महंता की पुण्यतिथि के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने असमिया लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महंता के योगदान को रेखांकित किया।
खगेन महंता की विरासत असम के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
महंता ने असमिया लोक परंपराओं को क्षेत्रीय सीमाओं से परे ले जाकर पूरे भारत और विदेशों में पहुँचाया। उनके गीत आज भी बिहू उत्सवों और सांस्कृतिक आयोजनों में गाए जाते हैं और उन्होंने अनगिनत गायकों को प्रेरित किया।
बिहू संगीत में खगेन महंता का क्या योगदान था?
महंता ने पारंपरिक बिहू गीतों को अपनी विशिष्ट शैली से प्रस्तुत कर उन्हें सदाबहार क्लासिक का दर्जा दिलाया। उनके प्रयासों से कई पारंपरिक संगीत शैलियाँ विलुप्त होने से बचीं और असम की सांस्कृतिक पहचान मज़बूत हुई।
खगेन महंता की पुण्यतिथि पर क्या कार्यक्रम हुए?
12 जून को उनकी पुण्यतिथि पर राज्यभर के प्रशंसकों, कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने एकजुट होकर उन्हें याद किया। मुख्यमंत्री सरमा ने भी एक्स पर भावभीनी श्रद्धांजलि पोस्ट की।
राष्ट्र प्रेस
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