28 जुलाई 2026
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अम्मा केस: रमेश पिशारोडी ने मुंसिफ कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा — 'राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया'

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अम्मा केस: रमेश पिशारोडी ने मुंसिफ कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा — 'राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया'

सारांश

मलयालम अभिनेता और पलक्कड़ विधायक रमेश पिशारोडी ने अम्मा केस में आरोपी बनाए जाने को राजनीतिक साजिश बताया। कोर्ट में दाखिल हलफनामे में उन्होंने कहा कि चेयरमैन पद एक दिन में छोड़ दिया था और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।

मुख्य बातें

रमेश पिशारोडी ने 28 जुलाई को कोच्चि की मुंसिफ कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अम्मा केस में आरोपी बनाए जाने को गलत बताया।
पिशारोडी ने कहा कि उन्होंने एड-हॉक कमेटी का चेयरमैन पद स्वीकार किया था, लेकिन अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने अभिनेत्री श्वेता मेनन पर आरोप लगाया कि उन्होंने अम्मा की फाइलें और आधिकारिक दस्तावेज नई कमेटी को नहीं सौंपे।
पिशारोडी ने दावा किया कि पलक्कड़ से कांग्रेस विधायक बनने के बाद उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए उनका नाम केस में जोड़ा गया।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि उनका नाम आरोपियों की सूची से हटाया जाए।

मलयालम सिनेमा के जाने-माने अभिनेता और हास्य कलाकार रमेश पिशारोडी, जो हाल ही में कांग्रेस के टिकट पर पलक्कड़ विधानसभा सीट से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए हैं, ने 28 जुलाई को कोच्चि की एक स्थानीय मुंसिफ कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। इसमें उन्होंने एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (अम्मा) की एड-हॉक कमेटी से जुड़े मामले में आरोपी बनाए जाने को राजनीति से प्रेरित और तथ्यहीन बताया।

मामले की पृष्ठभूमि

विधायक बनने के कुछ ही समय बाद पिशारोडी का नाम अम्मा की एड-हॉक कमेटी से जुड़े एक विवाद में आरोपी के रूप में सामने आया। अम्मा मलयालम फिल्म उद्योग के कलाकारों का प्रमुख संगठन है, जो पिछले कुछ वर्षों से आंतरिक विवादों और नेतृत्व संकट के कारण सुर्खियों में रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया पहले से ही विवादों में घिरी थी।

हलफनामे में पिशारोडी के दावे

अपने हलफनामे में पिशारोडी ने स्पष्ट किया कि अम्मा की एड-हॉक कमेटी से उनका जुड़ाव अत्यंत संक्षिप्त और सीमित भूमिका में था। उनके अनुसार, संगठन के कठिन दौर में सदस्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कमेटी के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। हालाँकि, अगले ही दिन उन्हें यह अनुभव हुआ कि यह दायित्व उनके लिए उपयुक्त नहीं है, और उन्होंने तत्काल पद से इस्तीफा दे दिया।

पिशारोडी ने अदालत में तर्क दिया कि उनके विरुद्ध न कोई ठोस साक्ष्य है और न ही कोई ऐसा तथ्य जो उन्हें इस मामले में जिम्मेदार ठहराए। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया है कि उनका नाम आरोपियों की सूची से हटाया जाए।

श्वेता मेनन पर गंभीर आरोप

हलफनामे में पिशारोडी ने अभिनेत्री श्वेता मेनन पर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि अम्मा के प्रमुख पद से इस्तीफा देने के बावजूद श्वेता मेनन ने संगठन की महत्वपूर्ण फाइलें, मिनट्स बुक और अन्य आधिकारिक दस्तावेज नई अंतरिम कमेटी को नहीं सौंपे। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों के अभाव में एड-हॉक कमेटी को कामकाज संचालित करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

राजनीतिक साजिश का आरोप

पिशारोडी ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में उन्हें जानबूझकर घसीटा गया है। उनके अनुसार, पलक्कड़ से विधायक बनने के बाद उनकी बढ़ती राजनीतिक पहचान को धूमिल करने और जनता के बीच उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से उनका नाम इस केस में जोड़ा गया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी अभिनेता-राजनेता ने अम्मा से जुड़े विवाद में राजनीतिक दुर्भावना का आरोप लगाया हो।

उन्होंने अदालत से अपील की है कि निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर हो, न कि किसी पूर्वाग्रह या बाहरी दबाव के आधार पर।

आगे क्या होगा

मामला अब मुंसिफ कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। अदालत के निर्णय पर न केवल पिशारोडी की राजनीतिक साख, बल्कि अम्मा के पुनर्गठन की प्रक्रिया की वैधता पर भी असर पड़ सकता है। मलयालम फिल्म उद्योग और केरल की राजनीति — दोनों क्षेत्रों में इस मामले की गहरी नजर से निगरानी हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस मामले में एक नवनिर्वाचित विधायक का नाम घसीटा जाना — चाहे साजिश हो या संयोग — यह दर्शाता है कि संगठनात्मक पारदर्शिता की कमी अब न्यायिक दरवाजे तक पहुँच चुकी है। श्वेता मेनन पर दस्तावेज न सौंपने के आरोप, अगर सही साबित हुए, तो यह अम्मा के पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज एक अभिनेता-राजनेता का विवाद मानकर चल रही है, जबकि असली मुद्दा संस्थागत जवाबदेही और दस्तावेजी पारदर्शिता का है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रमेश पिशारोडी ने अम्मा केस में कोर्ट में क्या हलफनामा दाखिल किया?
पिशारोडी ने कोच्चि की मुंसिफ कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि उन्हें अम्मा की एड-हॉक कमेटी से जुड़े मामले में जानबूझकर और राजनीतिक कारणों से आरोपी बनाया गया है। उन्होंने अदालत से अपना नाम आरोपियों की सूची से हटाने की माँग की है।
रमेश पिशारोडी का अम्मा की एड-हॉक कमेटी से क्या संबंध था?
पिशारोडी ने कमेटी के चेयरमैन पद को संगठन के कठिन दौर में सदस्यों के हित में स्वीकार किया था, लेकिन अगले ही दिन यह महसूस होने पर कि यह जिम्मेदारी उनके लिए उचित नहीं है, उन्होंने तत्काल इस्तीफा दे दिया। उनके अनुसार, इस अत्यंत सीमित भूमिका के आधार पर उन्हें आरोपी बनाना उचित नहीं है।
पिशारोडी ने श्वेता मेनन पर क्या आरोप लगाए?
पिशारोडी ने हलफनामे में आरोप लगाया कि अभिनेत्री श्वेता मेनन ने अम्मा के प्रमुख पद से इस्तीफा देने के बाद भी संगठन की महत्वपूर्ण फाइलें, मिनट्स बुक और आधिकारिक दस्तावेज नई अंतरिम कमेटी को नहीं सौंपे। इससे एड-हॉक कमेटी को काम करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पिशारोडी ने राजनीतिक साजिश का आरोप क्यों लगाया?
पिशारोडी का कहना है कि पलक्कड़ विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनने के बाद उनकी बढ़ती राजनीतिक पहचान को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से उनका नाम इस केस में जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं।
अम्मा केस में अब आगे क्या होगा?
मामला कोच्चि की मुंसिफ कोर्ट में विचाराधीन है। अदालत पिशारोडी के हलफनामे और उनकी माँग पर विचार करेगी कि उनका नाम आरोपियों की सूची से हटाया जाए। इस निर्णय का असर अम्मा के पुनर्गठन की प्रक्रिया और पिशारोडी की राजनीतिक साख दोनों पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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