3 अगस्त 2026
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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 होगी, लोकसभा ने संशोधन विधेयक ध्वनि मत से पारित किया

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 होगी, लोकसभा ने संशोधन विधेयक ध्वनि मत से पारित किया

सारांश

लोकसभा ने हंगामे के बीच सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से 38 करने वाला विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया। यह मई 2026 के अध्यादेश की जगह लेगा और लंबित मामलों के बोझ से दबी न्यायपालिका को राहत देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

लोकसभा ने 3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित किया।
विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 होगी; मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य जजों की संख्या 33 से 37 होगी।
यह विधेयक मई 2026 में जारी अध्यादेश की जगह लेगा।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक सदन में पेश किया।
विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हुई और अंततः दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
उसी दिन बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 और ISI बिल भी सदन में प्रस्तुत किए गए।

लोकसभा ने 3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिसके तहत शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की जाएगी। विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के बीच यह विधेयक पारित हुआ और बाद में सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

विधेयक में क्या है

प्रस्तावित कानून के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी, जिससे कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। यह विधेयक मई 2026 में जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा। इस कदम का उद्देश्य न्यायपालिका पर बढ़ते कार्यभार और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या से निपटना है।

सदन में विधेयक पेश करने की प्रक्रिया

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया। कार्यवाही की अध्यक्षता कृष्णा प्रसाद टेनेटी कर रहे थे, जिन्होंने सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बार-बार अपील की। दोपहर में कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित हुई, लेकिन बाद में फिर शुरू हुई और विधेयक ध्वनि मत से पारित किया गया।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी सांसदों ने सदन में जोरदार नारेबाजी की और जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब माँगते रहे। हंगामे के कम होने के कोई आसार न दिखने पर अध्यक्ष ने अंततः लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

उसी दिन पेश हुए अन्य विधेयक

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 सदन में प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य बैंकिंग साक्ष्य से जुड़े कानूनी ढाँचे को डिजिटल युग के अनुरूप आधुनिक बनाना है। इसके अलावा, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल पेश किया, जिसका शैक्षणिक समुदाय के कुछ वर्गों और इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) के छात्रों की ओर से पहले ही विरोध किया जा चुका है।

आगे क्या होगा

लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक अब राज्यसभा में जाएगा। दोनों सदनों की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप लेगा और मई 2026 के अध्यादेश की जगह लेगा। न्यायपालिका में लंबित मामलों की विशाल संख्या को देखते हुए यह कदम न्यायिक सुधारों की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए यह कदम स्वागतयोग्य है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या चार अतिरिक्त जज उस संरचनात्मक बाधा को दूर कर पाएँगे जो नियुक्ति प्रक्रिया की सुस्ती और बुनियादी ढाँचे की कमी से पैदा होती है। यह ऐसे समय में आया है जब कॉलेजियम बनाम सरकार की खींचतान अभी भी अनसुलझी है। संख्या बढ़ाना ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं — जब तक नियुक्तियाँ तेज़ और पारदर्शी नहीं होतीं, नए पद भी खाली रह सकते हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने के लिए है। इसके तहत मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी, जिससे कुल संख्या 34 से 38 हो जाएगी। यह मई 2026 में जारी अध्यादेश की जगह लेगा।
यह विधेयक क्यों लाया गया?
न्यायपालिका पर बढ़ते कार्यभार और लंबित मामलों की विशाल संख्या को देखते हुए यह विधेयक लाया गया है। अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के निपटारे की गति बढ़ने की उम्मीद है।
लोकसभा में विधेयक पारित होने पर विपक्ष ने क्यों हंगामा किया?
विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब माँग रहे थे। इस मुद्दे पर हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित हुई और अंततः दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
अब यह विधेयक कानून कब बनेगा?
लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राज्यसभा में जाएगा। दोनों सदनों की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून बन जाएगा और मई 2026 के अध्यादेश की जगह लेगा।
उसी दिन लोकसभा में और कौन-से विधेयक पेश हुए?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पेश किया, जो डिजिटल बैंकिंग के अनुरूप साक्ष्य कानून को आधुनिक बनाएगा। इसके अलावा राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल प्रस्तुत किया, जिसका ISI छात्रों और शैक्षणिक समुदाय के कुछ वर्गों ने विरोध किया है।
राष्ट्र प्रेस
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