लोकसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित: अमित शाह की मौजूदगी की मांग पर विपक्ष का हंगामा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 4 अगस्त 2026 — लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार को फिर से शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई, जब विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति की माँग को लेकर जोरदार नारेबाजी पर उतर आए। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुई पुलिस कार्रवाई और नीट पेपर लीक मामले ने इस मानसून सत्र को बार-बार बाधित किया है।
सदन में क्या हुआ
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर बैठने और 'महत्वपूर्ण' प्रश्नकाल के दौरान शांति बनाए रखने का बार-बार आग्रह किया। हालाँकि, विपक्षी खेमे का शोर-शराबा थमा नहीं और अंततः कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष की मुख्य माँग यह है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित फायरिंग पर स्पष्टीकरण दें। सरकार की ओर से इस माँग पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सोमवार को हुई बड़ी विधायी कार्यवाही
इससे एक दिन पहले, सोमवार को विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया।
उस दौरान कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की बार-बार अपील की, लेकिन विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। इसके बावजूद विधेयक पारित हो गया।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ेगी
पारित विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) की जाएगी, जिससे अदालत में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
यह विधेयक मई 2026 में जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा। इसका उद्देश्य मामलों के बढ़ते लंबित बोझ और न्यायपालिका पर बढ़ते काम के दबाव को कम करना है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में लाखों मामले लंबित हैं और न्यायाधीशों की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
मानसून सत्र पर असर
यह ऐसे समय में हो रहा है जब संसद का मानसून सत्र नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई — दो अलग-अलग विवादों — के कारण लगातार बाधित हो रहा है। विपक्ष का तर्क है कि इन दोनों मुद्दों पर गृह मंत्री को जवाबदेह होना चाहिए। सरकार का पक्ष यह है कि सदन को कार्यशील रहना चाहिए और विधायी कार्य आगे बढ़ना चाहिए।
आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या विपक्ष और सरकार के बीच कोई सहमति बन पाती है, या मानसून सत्र इसी तरह बाधाओं के बीच आगे बढ़ता रहेगा।