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इबोला पर भारत सतर्क: जेपी नड्डा बोले — देश में अब तक कोई मामला नहीं, निगरानी तेज

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इबोला पर भारत सतर्क: जेपी नड्डा बोले — देश में अब तक कोई मामला नहीं, निगरानी तेज

सारांश

अफ्रीका में इबोला के प्रकोप और WHO की PHEIC घोषणा के बाद भारत सरकार हरकत में आई है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पुष्टि की कि देश में अब तक कोई मामला नहीं है, लेकिन हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग, SOP और राज्यों को निर्देश जारी कर एहतियाती तैयारी पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 25 मई 2026 को पुष्टि की कि भारत में इबोला का कोई मामला नहीं है।
WHO ने इबोला को PHEIC और अफ्रीका CDC ने PHECS घोषित किया है।
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और प्रवेश बिंदुओं पर गहन स्क्रीनिंग शुरू।
जाँच, क्वारंटाइन और क्लीनिकल मैनेजमेंट की SOP सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को साझा।
वर्तमान प्रकोप बंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन से है; इसके लिए कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं ।
ICMR महानिदेशक , NCDC निदेशक और स्वास्थ्य सचिव को निरंतर तैयारी बनाए रखने के निर्देश।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 25 मई 2026 को स्पष्ट किया कि भारत में अब तक इबोला का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के ताज़ा प्रकोप के मद्देनजर उन्होंने देशव्यापी तैयारियों और निगरानी उपायों की समीक्षा की और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए।

निगरानी ढाँचा: कौन-कौन सी एजेंसियाँ सक्रिय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ (DGHS), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), नागरिक उड्डयन और आव्रजन अधिकारियों समेत सभी संबंधित मंत्रालयों को एकजुट कर देशव्यापी जन स्वास्थ्य तैयारी को मजबूत किया है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर गहन जाँच व स्क्रीनिंग प्रक्रियाएँ तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई हैं।

एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) इकाइयों और हवाई अड्डा स्वास्थ्य संगठनों को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में अस्पष्टीकृत बुखार के किसी भी मामले पर तत्काल रिपोर्टिंग और प्रबंधन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

वैश्विक संदर्भ: WHO और अफ्रीका CDC की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला को अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है, जबकि अफ्रीका CDC ने इसे महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHECS) की श्रेणी में रखा है। इन दोनों अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं के बाद भारत सरकार ने एहतियाती कदमों को और तेज़ किया है।

गौरतलब है कि वर्तमान प्रकोप बंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण हो रहा है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। इबोला एक गंभीर वायरल रक्तस्रावी बुखार है जिसमें मृत्यु दर अत्यधिक होती है।

मानक प्रक्रियाएँ और राज्यों को निर्देश

जाँच, क्वारंटाइन, क्लीनिकल मैनेजमेंट, प्रयोगशाला परीक्षण और संक्रमण रोकथाम पर मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा की जा चुकी हैं। तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित हितधारकों के साथ बैठकें भी आयोजित की गई हैं।

नड्डा ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, ICMR के महानिदेशक और NCDC के निदेशक को ट्रैकिंग, परीक्षण और निगरानी की सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ निरंतर तैयार रखने का निर्देश दिया है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर संक्रामक रोगों की सीमापार आवाजाही को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है और किसी भी नए घटनाक्रम पर तुरंत प्रतिक्रिया के लिए तंत्र सक्रिय है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवेश बिंदुओं पर मज़बूत स्क्रीनिंग और राज्यों के साथ समन्वय ही इस चरण में सबसे प्रभावी रोकथाम उपाय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब किसी संदिग्ध मामले की पुष्टि होगी — उस समय SOP कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर काम करनी होगी। बंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत टीका न होना एक गंभीर वैज्ञानिक अंतराल है जिसे सिर्फ निगरानी से नहीं भरा जा सकता। यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर COVID-19 के बाद से स्क्रीनिंग क्षमता बेहतर हुई है, पर छोटे प्रवेश बिंदुओं पर तैयारी की स्थिति अभी भी अनिश्चित है। WHO की PHEIC घोषणा को गंभीरता से लेते हुए जन-संचार और जागरूकता अभियान की भी उतनी ही ज़रूरत है जितनी संस्थागत समन्वय की।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारत में इबोला का कोई मामला आया है?
नहीं। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 25 मई 2026 को स्पष्ट किया कि भारत में अब तक इबोला का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। सरकार एहतियात के तौर पर निगरानी और तैयारी के उपाय सक्रिय रूप से तेज़ कर रही है।
इबोला के लिए भारत सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और प्रवेश बिंदुओं पर गहन स्क्रीनिंग शुरू की है। जाँच, क्वारंटाइन, क्लीनिकल मैनेजमेंट और प्रयोगशाला परीक्षण की SOP सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साझा की गई है। NCDC, ICMR, DGHS और आव्रजन अधिकारियों के बीच समन्वय सक्रिय है।
WHO ने इबोला को किस श्रेणी में रखा है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला को 'अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित किया है। इसके साथ ही अफ्रीका CDC ने इसे 'महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHECS) की श्रेणी में रखा है।
बंडीबुग्यो इबोला वायरस स्ट्रेन क्या है और क्या इसका टीका है?
बंडीबुग्यो इबोला वायरस स्ट्रेन इबोला के कई प्रकारों में से एक है और वर्तमान अफ्रीकी प्रकोप इसी से जुड़ा है। अभी तक इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है।
इबोला का संदेह होने पर भारत में क्या करें?
IDSP इकाइयों और हवाई अड्डा स्वास्थ्य संगठनों को अस्पष्टीकृत बुखार के किसी भी मामले की तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध मामलों के लिए तत्काल क्वारंटाइन और प्रयोगशाला परीक्षण की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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