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प्रकाश राज ने एसआईआर को तुरंत रद्द करने की माँग की, 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकार पर उठाया सवाल

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प्रकाश राज ने एसआईआर को तुरंत रद्द करने की माँग की, 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकार पर उठाया सवाल

सारांश

अभिनेता प्रकाश राज ने तिरुवनंतपुरम में मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' को लोकतंत्र-विरोधी साजिश करार देते हुए तत्काल रद्द करने की माँग की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की अपील की।

मुख्य बातें

प्रकाश राज ने 7 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में मतदाता सूची के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) को तत्काल रद्द करने की माँग की।
राज के अनुसार यह प्रक्रिया देशभर में 13 करोड़ से अधिक नागरिकों के मताधिकार को खतरे में डाल सकती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और एसआईआर लागू करने वालों की कानूनी जवाबदेही की माँग की गई।
राज ने नागरिकों से विरोध-प्रदर्शन में उतरने और जन-अदालतों के माध्यम से आवाज़ उठाने की अपील की।
राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों ने भी एसआईआर प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने की आशंका जताई है।

अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने 7 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बात करते हुए मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) को फ़ौरन रद्द करने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया देशभर में 13 करोड़ से अधिक नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार पर सीधा हमला है और इसे लोकतंत्र को खत्म करने की सुनियोजित साजिश करार दिया।

मुख्य आरोप और माँगें

राज ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को लागू करने में शामिल सभी अधिकारियों एवं व्यक्तियों की कानूनी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

राज ने चेतावनी दी कि यदि यह प्रक्रिया जारी रही तो देश में नागरिकों के दो वर्ग बन जाएंगे — एक जिनके पास मतदान का अधिकार होगा और दूसरे जो इस अधिकार से वंचित रह जाएंगे। उनके अनुसार यह संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।

ऐतिहासिक संदर्भ

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए राज ने भारत की आज़ादी के बाद के दौर का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब संविधान बनाया जा रहा था, तब अंग्रेजों ने सुझाव दिया था कि मतदान का अधिकार केवल 'उच्च-वर्ग या अच्छी तरह से पढ़े-लिखे' लोगों तक सीमित रखा जाए। लेकिन डॉ. भीमराव अंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन नेताओं ने इस सुझाव को सिरे से नकार दिया।

राज ने कहा कि उन नेताओं ने निर्णय लिया कि यह देश हर किसी को — चाहे वे किसान हों, आदिवासी हों, दलित हों या अल्पसंख्यक — अपने प्रतिनिधि चुनने की शक्ति देगा। उनके अनुसार एसआईआर उसी लोकतांत्रिक सिद्धांत को कमज़ोर करने का प्रयास है।

जन-आंदोलन की अपील

राज ने आम नागरिकों से अपने मताधिकार की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन के और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि एसआईआर प्रक्रिया से कथित तौर पर प्रभावित नागरिकों के साथ जन-अदालतें (पब्लिक ट्रिब्यूनल) भी आयोजित की जाएंगी।

व्यापक विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों में एसआईआर को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। इन समूहों की मुख्य चिंता यह है कि इस संशोधन प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कट सकते हैं। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने पहले भी चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण माँगा है।

राज ने नागरिकों को सतर्क रहने और उन प्रयासों का विरोध करने को कहा, जिन्हें उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की कोशिश बताया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गतिविधियाँ तेज़ होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका स्रोत और आधार अभी स्पष्ट नहीं है। चुनाव आयोग की चुप्पी इस विवाद को और गहरा कर रही है — एक संस्था जिसकी विश्वसनीयता उसकी पारदर्शिता पर टिकी है, उसे इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना होगा।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) क्या है?
एसआईआर भारत के चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा की एक प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची में दर्ज नामों का व्यापक सत्यापन किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हट सकते हैं, जिससे उनके मताधिकार को खतरा है।
प्रकाश राज ने क्या-क्या माँगें रखी हैं?
प्रकाश राज ने एसआईआर को तत्काल रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और इस प्रक्रिया को लागू करने में शामिल सभी लोगों की कानूनी जवाबदेही तय करने की माँग की है। उन्होंने जन-अदालतें आयोजित करने और स्थानीय विरोध-प्रदर्शनों की भी घोषणा की है।
एसआईआर से कितने मतदाता प्रभावित हो सकते हैं?
प्रकाश राज ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से देशभर में 13 करोड़ से अधिक नागरिक अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। हालाँकि, इस आँकड़े का स्वतंत्र सत्यापन अभी तक नहीं हुआ है।
एसआईआर विवाद को लेकर अन्य दलों और संगठनों की क्या प्रतिक्रिया है?
कई राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों ने भी एसआईआर प्रक्रिया पर चिंता जताई है। उनकी मुख्य आशंका यह है कि इस संशोधन में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा सकते हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
क्या चुनाव आयोग ने एसआईआर विवाद पर कोई जवाब दिया है?
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत के चुनाव आयोग ने प्रकाश राज के आरोपों और माँगों पर सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह चुप्पी विपक्ष और नागरिक समाज की बेचैनी को और बढ़ा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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