बेंगलुरु मतदाता सूची से प्रकाश राज का नाम हटा, SIR प्रक्रिया पर उठाए तीखे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता प्रकाश राज ने दावा किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे उन कथित 65 लाख मतदाताओं में शामिल हैं जिनका वोट देने का अधिकार इस प्रक्रिया के तहत छिन गया है।
इंस्टाग्राम वीडियो से उठाई आवाज़
मंगलवार, 11 अगस्त को प्रकाश राज ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर पूरे मामले का खुलासा किया। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने इसे 'जोक' करार दिया। वीडियो में उन्होंने कहा, 'दोस्तों, मैं आपके साथ एक जोक शेयर करना चाहता हूँ। मैं उन 65 लाख वोटर्स में से एक हूँ, जिनका बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र में SIR के बाद वोट देने का अधिकार हटा दिया गया है। अच्छा मजाक है, है ना?'
बेंगलुरु से गहरा नाता
प्रकाश राज ने अपनी जड़ें इसी निर्वाचन क्षेत्र से जोड़ते हुए कहा कि उनका जन्म, स्कूल, कॉलेज और थिएटर सभी यहीं रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वे इसी क्षेत्र से लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार भी रह चुके हैं। यह तथ्य उनके दावे को और अधिक प्रासंगिक बनाता है, क्योंकि एक पूर्व चुनावी प्रत्याशी का नाम सूची से हटना गंभीर सवाल खड़े करता है।
सत्ता पर सीधा निशाना
वीडियो में प्रकाश राज ने बिना किसी का नाम लिए तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'सत्ता में बैठे लोग अपनी ताकत का इस्तेमाल कुछ नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने के लिए कर सकते हैं, जो शायद आपको वोट न दें। लेकिन मेरे दोस्त, क्या आप हमें उस ताकत से रोक सकते हैं, जिसके जरिए हम आपको सत्ता से बाहर कर सकते हैं?' वीडियो के अंत में उन्होंने कहा, 'बस पूछ रहा हूँ। बाय।'
निर्वाचन आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग (ECI) के अनुसार, SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए तय नियमों का पालन किया जाता है। आम तौर पर मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लोगों, डुप्लीकेट नामों और बार-बार सत्यापन के बावजूद जिन मतदाताओं का पता नहीं चल पाया, उनके नाम सूची से हटाए जाते हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
आगे क्या होगा
प्रकाश राज ने संकेत दिया है कि वे अपना वोटर आईडी वापस पाने की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से दिखाएँगे — यानी किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी और क्या कदम उठाने होंगे। उनके इस बयान के बाद SIR प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज हो गई है, और यह मामला मतदाता अधिकारों की व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।