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क्या आप जानते हैं हिंदू धर्म के 5 प्रमुख पावन स्नान कौन से हैं?

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क्या आप जानते हैं हिंदू धर्म के 5 प्रमुख पावन स्नान कौन से हैं?

सारांश

हिंदू धर्म में स्नान का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मकर संक्रांति से कार्तिक पूर्णिमा तक, ये पावन स्नान पर्व श्रद्धालुओं के लिए खास होते हैं। इस लेख में जानें इन पर्वों की विशेषताएं और महत्व।

मुख्य बातें

हिंदू धर्म में स्नान का धार्मिक महत्व है।
मकर संक्रांति से कार्तिक पूर्णिमा तक के स्नान पर्व विशेष हैं।
गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिलती है।
दान-पुण्य का महत्व इन पर्वों पर बढ़ जाता है।
स्नान करने से जीवन में सुख और शांति आती है।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू धर्म में स्नान का एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। विशेष रूप से गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान को पापों से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति का साधन माना जाता है। हर वर्ष मकर संक्रांति से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक ऐसे विशेष स्नान पर्व आते हैं, जिनका इंतजार करोड़ों श्रद्धालुओं को रहता है। इन दिनों स्नान करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इन पवित्र स्नानों की शुरुआत मकर संक्रांति से होती है, जो वर्ष 2026 में 14 और 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है।

मान्यता है कि इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है।

इसके बाद मौनी अमावस्या आती है, जो 18 जनवरी को पड़ेगी। माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है। श्रद्धालु इस दिन मौन रखकर गंगा स्नान करते हैं। कहा जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

तीसरा प्रमुख स्नान पर्व माघ पूर्णिमा है, जो 1 फरवरी को मनाई जाएगी। माघ पूर्णिमा का स्नान सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन स्नान के साथ-साथ तिल, अन्न, वस्त्र, घी और कंबल का दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

इसके बाद गंगा दशहरा आता है, जो 25 मई को मनाया जाएगा। यह पर्व मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन पूजा, दान और गंगा आरती का विशेष महत्व होता है।

वर्ष का अंतिम प्रमुख स्नान पर्व कार्तिक पूर्णिमा है, जो 24 नवंबर को पड़ेगी। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करने से आत्मिक शुद्धि होती है। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता है और दीपदान को बहुत शुभ माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो समाज में एकता और सामंजस्य का प्रतीक है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रांति क्या है?
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का पर्व है। यह उत्तरायण का आरंभ भी है।
गंगा स्नान का महत्व क्या है?
गंगा स्नान को पापों से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति का साधन माना जाता है।
मौनी अमावस्या कब मनाई जाती है?
मौनी अमावस्या माघ महीने की अमावस्या होती है, जो इस वर्ष 18 जनवरी को पड़ेगी।
कार्तिक पूर्णिमा का क्या महत्व है?
कार्तिक पूर्णिमा को आत्मिक शुद्धि का पर्व माना जाता है और इसे देव दीपावली भी कहा जाता है।
गंगा दशहरा कब मनाया जाता है?
गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाता है, जो मां गंगा के अवतरण की स्मृति में होता है।
राष्ट्र प्रेस
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