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होर्मुज जहाज हमले में हमीरपुर के डेक कैडेट आदित्य शर्मा शहीद, तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि

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होर्मुज जहाज हमले में हमीरपुर के डेक कैडेट आदित्य शर्मा शहीद, तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि

सारांश

होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट पालाउ-ध्वज वाले जहाज पर हुए हमले में हमीरपुर के 22-23 वर्षीय डेक कैडेट आदित्य शर्मा सहित तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है। इकलौते बेटे को खोने के बाद परिवार टूट गया है और शव वापसी तथा जाँच की माँग कर रहा है।

मुख्य बातें

होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट पालाउ-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हुई।
हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा (उम्र लगभग 22-23 वर्ष ) मृतकों में शामिल; वह अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे।
हमले में 21 नाविकों को सुरक्षित बचाया गया; तीन लापता बताए गए थे, अब सभी की मृत्यु की पुष्टि।
आदित्य ने 24 मई की वापसी तिथि से एक महीने के लिए कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया था।
परिजनों ने सांसद, मुख्यमंत्री, विदेश मंत्री और शिपिंग मंत्रालय से शव की शीघ्र वापसी और निष्पक्ष जाँच की माँग की।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के युवा डेक कैडेट आदित्य शर्मा की 11 जून 2026 को मौत की पुष्टि हो गई, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक पालाउ-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में लापता हुए तीनों भारतीय नाविकों के जीवित न होने की खबर सामने आई। 22-23 वर्षीय आदित्य अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और उन्होंने हाल ही में अपने समुद्री करियर की शुरुआत की थी।

हमले का घटनाक्रम

हमले के समय जहाज पर सवार कुल चालक दल में से 21 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन भारतीय नाविक लापता बताए जा रहे थे। अब इन तीनों की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। आदित्य के परिजनों को उनके लापता होने की सूचना पहले उनके भाई से मिली, जिसके बाद परिवार कंपनी से लगातार संपर्क करता रहा, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

परिवार की पीड़ा और माँगें

आदित्य के चाचा ने बताया कि वह 24 मई को वापस आने वाले थे, लेकिन उन्होंने एक महीने के लिए अपना कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया था। कुछ दिन पहले ही ग्रुप कॉल पर परिवार से उनकी बातचीत हुई थी। परिवार के बुजुर्ग सदस्य सिसकते हुए बोले कि उनका एकमात्र बच्चा चला गया। परिजनों ने सांसद, मुख्यमंत्री, विदेश मंत्री और शिपिंग मंत्रालय से अपील की है कि शव को जल्द से जल्द भारत लाया जाए।

उठाए गए सवाल

आदित्य के चाचा ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं — हमले के समय आदित्य इंजन रूम में क्या कर रहे थे? क्या उनसे ओवरटाइम काम करवाया जा रहा था? क्या उन्हें समय पर मदद मुहैया कराई गई? परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य ने यह भी सवाल उठाया कि जब कैप्टन को आगे बढ़ने से मना किया गया था, तो किसके निर्देश पर जहाज को खतरनाक क्षेत्र में ले जाया गया। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

आगे क्या होगा

परिजन और स्थानीय प्रशासन शव वापसी के लिए शिपिंग कंपनी और सरकारी तंत्र से समन्वय कर रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ पहले से बढ़ी हुई हैं। भारतीय नाविकों की इस क्षेत्र में तैनाती और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर अब नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना पर्याप्त संकट-प्रोटोकॉल के। परिवार का यह सवाल कि कैप्टन को रोके जाने के बाद भी जहाज आगे क्यों बढ़ा, शिपिंग कंपनियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। भारत सरकार के पास हाई-रिस्क ज़ोन में तैनात नाविकों के लिए कोई मज़बूत बीमा और त्वरित शव-वापसी तंत्र नहीं है — और यह पहली बार नहीं है जब कोई परिवार सरकारी दरवाज़े खटखटाते हुए जवाब माँग रहा है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज के पास जहाज पर हमले में क्या हुआ?
होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक पालाउ-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ, जिसमें 21 नाविकों को सुरक्षित बचाया गया और तीन भारतीय नाविक लापता हो गए। बाद में तीनों की मृत्यु की पुष्टि हो गई।
आदित्य शर्मा कौन थे और वे जहाज पर क्यों थे?
आदित्य शर्मा हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले लगभग 22-23 वर्षीय डेक कैडेट थे, जिन्होंने हाल ही में अपने समुद्री करियर की शुरुआत की थी। वह 24 मई को वापस आने वाले थे, लेकिन उन्होंने एक महीने के लिए अपना कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया था।
आदित्य शर्मा के परिवार ने सरकार से क्या माँग की है?
परिजनों ने सांसद, मुख्यमंत्री, विदेश मंत्री और शिपिंग मंत्रालय से शव को जल्द से जल्द भारत लाने की अपील की है। साथ ही मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग भी की गई है।
परिवार ने जहाज के कैप्टन पर क्या सवाल उठाए हैं?
परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य ने सवाल उठाया कि जब कैप्टन को आगे बढ़ने से मना किया गया था, तो किसके निर्देश पर जहाज को खतरनाक क्षेत्र में ले जाया गया। आदित्य के चाचा ने यह भी पूछा कि हमले के वक्त वह इंजन रूम में क्या कर रहे थे और क्या उन्हें समय पर मदद दी गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों के लिए खतरा क्यों बढ़ा है?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जहाँ हाल के वर्षों में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की घटनाएँ बढ़ी हैं। इस क्षेत्र में तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा और संकट-प्रोटोकॉल को लेकर अब नए सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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