हैदराबाद मेट्रो फेज-I वैल्यूएशन के लिए SBICAPS नियुक्त, ₹13,600 करोड़ लोन और फेज-II पर बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में हैदराबाद मेट्रो रेल के भविष्य को लेकर एक अहम निर्णय लिया गया — SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड (SBICAPS) को मेट्रो के फेज-I के मूल्यांकन, टेकओवर के लिए आवश्यक ऋण व्यवस्था और फेज-II के विकास पर विस्तृत अध्ययन करने हेतु सलाहकार नियुक्त किया गया है। यह निर्णय तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल के बीच हुई बैठक में लिया गया, जिसमें केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी भी उपस्थित रहे।
SBICAPS की भूमिका और अध्ययन का दायरा
SBICAPS को सौंपे गए कार्य में मुख्यतः तीन क्षेत्र शामिल हैं। पहला — हैदराबाद मेट्रो फेज-I का मूल्यांकन (वैल्यूएशन)। दूसरा — टेकओवर के लिए आवश्यक ऋण की व्यवस्था और ऋणदाता एजेंसियों का चयन। तीसरा — मेट्रो के विस्तार, निर्माण लागत और फेज-II की वित्तपोषण संरचना पर गहन अध्ययन।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस बैठक को 'फायदेमंद' करार दिया और कहा कि केंद्र व राज्य सरकार सलाहकार की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेंगी।
समन्वय के लिए दो वरिष्ठ अधिकारी नामित
बैठक में यह भी तय किया गया कि अध्ययन के दौरान केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार का एक वरिष्ठ अधिकारी और तेलंगाना के नगरपालिका प्रशासन एवं शहरी विकास (MA&UD) विभाग के विशेष मुख्य सचिव को प्रतिनिधि के रूप में नामित किया जाएगा। ये दोनों अधिकारी मिलकर अध्ययन और सरकारी प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने का काम करेंगे।
रेल मंत्री से मुलाकात और ₹13,600 करोड़ का मुद्दा
यह बैठक सोमवार की उस मुलाकात के ठीक एक दिन बाद हुई, जिसमें मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने किशन रेड्डी के साथ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की थी। उस बैठक में हैदराबाद मेट्रो फेज-I के लिए इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) से लिए गए ऋण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने केंद्र से हैदराबाद मेट्रो रेल फेज-I — जिसे राज्य सरकार ने लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) से अधिग्रहीत किया था — के लिए टर्म लोन रीफाइनेंसिंग के तौर पर ₹13,600 करोड़ बिना किसी देरी के जारी करने की माँग की थी, और यह माँग इस मुलाकात से लगभग एक सप्ताह पहले की गई थी।
पृष्ठभूमि: L&T से अधिग्रहण और केंद्र-राज्य समन्वय
हैदराबाद मेट्रो रेल का फेज-I पहले लार्सन एंड टुब्रो के अधीन था, जिसे तेलंगाना सरकार ने अधिग्रहीत किया। इसके बाद से ही टेकओवर की वित्तीय संरचना, लोन पुनर्वित्त और नए चरण की योजना पर केंद्र-राज्य स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य अपने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के लिए केंद्रीय वित्तपोषण पर निर्भर हैं।
आगे क्या होगा
SBICAPS की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र और तेलंगाना सरकार संयुक्त रूप से टेकओवर की शर्तें, ऋण संरचना और फेज-II की समयसीमा तय करेंगी। दोनों नामित अधिकारी इस प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। हैदराबाद मेट्रो के लाखों दैनिक यात्रियों के लिए यह निर्णय सेवा विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।