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हैदराबाद मेट्रो फेज-2 मंजूरी न मिलना रेवंत सरकार की नाकामी: केटीआर

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हैदराबाद मेट्रो फेज-2 मंजूरी न मिलना रेवंत सरकार की नाकामी: केटीआर

सारांश

बीआरएस के केटीआर ने CM रेवंत रेड्डी पर निशाना साधा — हैदराबाद मेट्रो फेज-2 की केंद्रीय मंजूरी न मिलना प्रशासनिक नाकामी है। दिल्ली की 71 यात्राएं, फिर भी खाली हाथ — और BJP से 'गुप्त समझौते' का आरोप तेलंगाना की राजनीति को नया मोड़ दे रहा है।

मुख्य बातें

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने 15 जून को हैदराबाद मेट्रो फेज-2 की मंजूरी न मिलने पर CM रेवंत रेड्डी को जिम्मेदार ठहराया।
केटीआर के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने दिल्ली की 71 यात्राएं कीं, फिर भी केंद्रीय स्वीकृति नहीं मिली।
केंद्र उत्तर प्रदेश, अहमदाबाद और विशाखापत्तनम की मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दे चुका है।
केटीआर ने कथित तौर पर BJP से गुप्त समझौते और 'वोट के बदले नोट' मामले में दबाव का आरोप लगाया।
केटीआर ने तेलंगाना की चार करोड़ जनता को जवाब देने की माँग की।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के. तारक रामाराव (केटीआर) ने सोमवार, 15 जून को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हैदराबाद मेट्रो के द्वितीय चरण के लिए केंद्र की मंजूरी न मिल पाना राज्य सरकार की प्रशासनिक अक्षमता का खुला प्रमाण है। केटीआर के अनुसार, रेवंत रेड्डी इस विफलता को छिपाने के लिए भ्रामक बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं।

मुख्य आरोप: दिल्ली की 71 यात्राएं, फिर भी खाली हाथ

केटीआर ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश, अहमदाबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहरों की मेट्रो परियोजनाओं को हरी झंडी दे रही है, तो हैदराबाद की परियोजना क्यों अटकी हुई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की 71 यात्राएं करने के बावजूद रेवंत रेड्डी केंद्रीय नेतृत्व को मंजूरी के लिए राजी नहीं कर सके — यह उनके अकुशल प्रशासन की स्पष्ट मिसाल है।

गुप्त समझौते का आरोप

बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ 'गुप्त समझौते' कर रखे हैं। केटीआर के अनुसार, 'वोट के बदले नोट' मामले में कानूनी दबाव के चलते मुख्यमंत्री केंद्र की आलोचना करने से परहेज कर रहे हैं और इसके बदले तेलंगाना में बीआरएस को निशाना बनाकर जनता का ध्यान भटका रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

केसीआर के कार्यकाल से तुलना

केटीआर ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के नेतृत्व में मेट्रो परियोजनाओं के लिए स्वीकृतियाँ और ऋण तेज़ गति से प्राप्त किए गए थे, जबकि वर्तमान सरकार के तहत विकास कार्य ठहर गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेवंत रेड्डी ने खुद स्वीकार किया है कि दिल्ली में उनकी छवि अनुकूल नहीं है।

जनता को जवाब देने की माँग

केटीआर ने माँग की कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी हैदराबाद की जनता को स्पष्ट रूप से बताएं कि मेट्रो फेज-2 की मंजूरी क्यों नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के चार करोड़ लोग यह समझ चुके हैं कि यह सरकार बीआरएस पर हमले करने के अलावा ठोस काम करने में असमर्थ है। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें एक वैध प्रशासनिक सवाल भी छिपा है — जब अन्य राज्यों की मेट्रो परियोजनाएं केंद्रीय मंजूरी पा रही हैं, तो हैदराबाद फेज-2 क्यों अटकी है? इसका जवाब केवल दिल्ली-तेलंगाना संबंधों में नहीं, बल्कि डीपीआर की तकनीकी स्थिति और वित्तीय मॉडल में भी खोजना होगा। 'गुप्त समझौते' जैसे आरोप बिना साक्ष्य के राजनीतिक बयानबाजी की श्रेणी में आते हैं, लेकिन रेवंत सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि मंजूरी में देरी का वास्तविक कारण क्या है — वरना विपक्ष का यह आख्यान जनता के बीच पैठ बनाता रहेगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद मेट्रो फेज-2 को केंद्र की मंजूरी क्यों नहीं मिली?
केंद्र सरकार ने अभी तक हैदराबाद मेट्रो के द्वितीय चरण को औपचारिक मंजूरी नहीं दी है। बीआरएस के केटीआर का आरोप है कि यह तेलंगाना सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और केंद्र के साथ कमज़ोर समन्वय का नतीजा है, हालांकि राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
केटीआर ने रेवंत रेड्डी पर क्या आरोप लगाए?
केटीआर ने आरोप लगाया कि CM रेवंत रेड्डी ने दिल्ली की 71 यात्राएं करने के बावजूद मेट्रो मंजूरी नहीं दिला सके। उन्होंने यह भी कहा कि रेवंत रेड्डी ने कथित तौर पर BJP से गुप्त समझौते किए हैं और 'वोट के बदले नोट' मामले के दबाव में केंद्र की आलोचना से बच रहे हैं।
अन्य किन शहरों को हाल ही में मेट्रो मंजूरी मिली है?
केटीआर के अनुसार, केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, अहमदाबाद और विशाखापत्तनम की मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसी तुलना के आधार पर उन्होंने हैदराबाद की अनदेखी को राज्य सरकार की विफलता बताया।
बीआरएस और रेवंत रेड्डी सरकार के बीच यह विवाद क्यों बढ़ रहा है?
तेलंगाना में बीआरएस मुख्य विपक्षी दल है और केटीआर पूर्व मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर के पुत्र हैं। हैदराबाद मेट्रो जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, और इसकी देरी विपक्ष को सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर हमले का अवसर दे रही है।
केसीआर के कार्यकाल में हैदराबाद मेट्रो की स्थिति कैसी थी?
केटीआर का दावा है कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में मेट्रो परियोजनाओं के लिए स्वीकृतियाँ और ऋण तेज़ गति से मिले थे। हालांकि, यह बीआरएस का पक्ष है और इसकी स्वतंत्र तुलनात्मक पुष्टि आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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