23 अक्टूबर 2026
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अमित शाह के '30 साल' वाले बयान पर इमरान मसूद का पलटवार — 'चुनाव आयोग बंधक, नतीजे पहले से तय'

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अमित शाह के '30 साल' वाले बयान पर इमरान मसूद का पलटवार — 'चुनाव आयोग बंधक, नतीजे पहले से तय'

सारांश

सहारनपुर सांसद इमरान मसूद ने अमित शाह के '30 साल' वाले बयान पर पलटवार करते हुए चुनाव आयोग को 'बंधक' बताया। साथ ही रेहान गांधी की कलाकृति हटाए जाने को लोकतंत्र के क्षरण का संकेत कहा। यूपी एमएलसी चुनाव के बीच यह बयानबाज़ी विपक्ष की चुनावी रणनीति को दर्शाती है।

मुख्य बातें

इमरान मसूद ने 23 अक्टूबर 2026 को अमित शाह के '30 साल' वाले बयान पर तीखा पलटवार किया।
मसूद का आरोप — सत्तारूढ़ दल ने चुनाव आयोग को 'बंधक' बना लिया है और नतीजे पहले से 'सेट' हैं।
चल रहे यूपी एमएलसी चुनाव के बीच यह बयान आया; चुनाव आयोग की कोई प्रतिक्रिया नहीं।
रेहान गांधी की कलाकृति हटाए जाने पर मसूद ने कहा — 'आलोचना से चिढ़ना लोकतंत्र के बिगड़ने का संकेत है।' आज़म खान से अखिलेश यादव की जेल मुलाकात को मसूद ने 'हर पार्टी की जिम्मेदारी' बताया।
सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर बातचीत जारी, ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सहारनपुर सांसद इमरान मसूद ने 23 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर तीखा पलटवार किया, जिसमें शाह ने कथित तौर पर कहा था कि अगले 30 वर्षों तक कांग्रेस और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नंबर नहीं आने वाला। मसूद ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने चुनाव आयोग को 'बंधक' बना लिया है, इसीलिए नतीजे पहले से 'सेट' हैं।

मुख्य आरोप और बयान

मसूद ने कहा, 'जब उन्होंने पूरा चुनाव आयोग को बंधक बना लिया है, तो उन्हें पूरा चुनाव परिणाम पहले से ही पता चल रहा है ना।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब 'सब कुछ सेट है तो कुछ करने की जरूरत ही नहीं है।' कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के ऐसे भाषणों का 'कोई मतलब नहीं है।'

गौरतलब है कि ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव जारी हैं। मसूद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता जीत का दावा इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने 'चुनाव आयोग को पहले ही बंधक बना लिया है।' चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रेहान गांधी की कलाकृति विवाद

इमरान मसूद ने एक प्रदर्शनी से प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान की कलाकृति हटाए जाने के विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'ये असल में डरे हुए लोग हैं। जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगने लगें तो यह चिंता का विषय बन जाता है।' मसूद ने आलोचना को लोकतंत्र का अनिवार्य स्तंभ बताते हुए कहा कि कलाकार अपनी रचनाओं — 'कार्टून हो या तस्वीरें' — के ज़रिए विचार व्यक्त करते हैं।

उन्होंने आगाह किया, 'जब लोग आलोचना से चिढ़ने लगें तो समझिए कि लोकतंत्र बिगड़ रहा है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब विपक्ष लगातार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर केंद्र सरकार को घेरता रहा है।

आज़म खान और सपा-कांग्रेस गठबंधन पर रुख

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की सपा नेता आज़म खान से जेल में मुलाकात पर मसूद ने कहा, 'आज़म खान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और अपने नेता की रक्षा करना हर पार्टी की जिम्मेदारी है।' यह टिप्पणी उन्होंने सपा और कांग्रेस के साझा राजनीतिक हितों को रेखांकित करते हुए दी।

यूपी चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन के सीट-बंटवारे को लेकर उन्होंने कहा कि यह 'पार्टी का आंतरिक मामला है' और 'सारा नेतृत्व इस पर चर्चा कर रहा है।' सीट-साझेदारी के ब्यौरे अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की अपनी रणनीति तेज़ कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि चुनाव आयोग पर इस तरह के आरोप संस्थागत विश्वसनीयता को कमज़ोर कर सकते हैं, जबकि BJP ने ऐसे बयानों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। एमएलसी चुनावों के नतीजों और आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र सपा-कांग्रेस गठबंधन की रूपरेखा आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक गंभीर संस्थागत सवाल को सनसनीखेज़ अंदाज़ में उठाता है — जो उसकी विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है। विपक्ष के पास चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए तथ्यपरक तर्क हो सकते हैं, लेकिन 'बंधक' जैसी भाषा बहस को तथ्य से हटाकर आरोप की दिशा में ले जाती है। दूसरी ओर, BJP के लिए '30 साल' जैसे दावे प्रचार की दृष्टि से तो कारगर हो सकते हैं, पर वे मतदाताओं को नीतिगत एजेंडे से दूर ले जाते हैं। असली मुद्दा — यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन की व्यावहारिकता और एमएलसी चुनावों का वास्तविक समीकरण — इस शोर में दब जाता है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमरान मसूद ने अमित शाह के '30 साल' वाले बयान पर क्या कहा?
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि BJP ने चुनाव आयोग को 'बंधक' बना लिया है, इसीलिए अमित शाह को नतीजे पहले से पता हैं। उन्होंने कहा कि 'जब सब कुछ सेट है तो कुछ करने की जरूरत ही नहीं है।'
रेहान गांधी की कलाकृति हटाने के विवाद पर मसूद का क्या कहना है?
मसूद ने इसे लोकतंत्र के बिगड़ने का संकेत बताया। उनका कहना था कि 'जब लोग आलोचना से चिढ़ने लगें तो समझिए कि लोकतंत्र बिगड़ रहा है।' उन्होंने कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बचाव किया।
यूपी एमएलसी चुनाव में इमरान मसूद का BJP पर क्या आरोप है?
मसूद ने कहा कि BJP वाले जीत का दावा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने चुनाव आयोग को 'पहले ही बंधक बना लिया है।' चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आज़म खान से अखिलेश यादव की जेल मुलाकात पर मसूद ने क्या कहा?
मसूद ने इसे स्वाभाविक बताया और कहा कि 'अपने नेता की रक्षा करना हर पार्टी की जिम्मेदारी है।' उन्होंने इस मुलाकात को पार्टी के प्रति वफादारी की मिसाल के रूप में पेश किया।
सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे की स्थिति क्या है?
इमरान मसूद ने इसे 'पार्टी का आंतरिक मामला' बताते हुए कहा कि सारा नेतृत्व इस पर चर्चा कर रहा है। सीट-साझेदारी का अंतिम ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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