भारत-इजरायल कृषि सहयोग: नई तकनीक और अवसरों की ओर बढ़ता कदम
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नई दिल्ली, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यरुशलम यात्रा के दौरान कृषि क्षेत्र में भारत-इजरायल सहयोग को एक नया आयाम मिला है। इस यात्रा के दौरान उच्च तकनीक वाले कृषि केंद्रों के रूप में और अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुँचाने की योजना पर चर्चा की गई। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, द डिप्लोमैटिस्ट पत्रिका में प्रकाशित लेख में बताया गया है कि ये सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इजरायली विशेषज्ञों और भारतीय कृषि संस्थानों द्वारा मिलकर बनाए गए हैं।
इनमें से 32 पहले से ही सक्रिय हैं, जबकि 18 और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम जारी है। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने इन सेंटर की संख्या को 100 तक पहुँचाने का इरादा व्यक्त किया, जिससे भारतीय किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सके।
इन सेंटरों ने ड्रिप सिंचाई, उर्वरक, संरक्षित खेती, कीट प्रबंधन, नर्सरी प्रौद्योगिकी और जल-कुशल बागवानी में इजरायली नवाचारों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाला है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पंजाब से लेकर कर्नाटक तक के राज्यों में हजारों किसानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है।
लेख में यह भी बताया गया है कि प्रारंभिक सर्वेक्षणों से पता चलता है कि फसल की गुणवत्ता में सुधार और इनपुट की बर्बादी में कमी के कारण किसानों ने अपनी मासिक आय में वृद्धि दर्ज की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर 'विलेजेस ऑफ एक्सीलेंस' नामक एक नई पहल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य इजरायली प्रौद्योगिकियों को सीधे भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में लाना है। इसका मतलब है कि किसान केवल सेंटर का दौरा नहीं करेंगे, बल्कि वे अपने जिलों में नवीनतम सिंचाई प्रणालियों और अन्य तकनीकी सहायता का अनुभव कर सकेंगे।
इस दीर्घकालिक साझेदारी ने दोनों देशों के लिए लाभ सुनिश्चित किया है। भारतीय किसानों ने जल संरक्षण और उपज बढ़ाने के नए तरीके सीखे हैं। इजरायली तकनीकें जल उपयोग को 40-60 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं, जो भारत के जल संकट को कम करने में मदद कर सकती हैं।
इसके साथ ही, बागवानी फसलों की पैदावार में भी सुधार हुआ है, जैसे कि टमाटर, शिमला मिर्च और खरबूजे की पैदावार में 20 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
इस साझेदारी से इजरायली किसानों और कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी लाभ हुआ है, क्योंकि भारतीय मांग ने उन्हें एक नया बाजार प्रदान किया है।