मध्य वर्ग बना भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़: 12 वर्षों के सुधारों से ₹12 लाख तक की आय पर शून्य टैक्स
सारांश
मुख्य बातें
बीते 12 वर्षों में केंद्र सरकार के कर सुधारों, बैंकिंग पहुँच के विस्तार, बीमा कवरेज और पेंशन योजनाओं ने भारत के मध्य वर्ग को वित्तीय रूप से पहले से अधिक मज़बूत बनाया है, और यह वर्ग अब देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरा है। रियायती दरों पर ऋण, डिजिटल सुधारों और सरल कराधान ने बचत, निवेश तथा फाइनेंशियल प्लानिंग को मध्यवर्गीय परिवारों के लिए कहीं अधिक सुलभ कर दिया है।
कर सुधार: ₹2.5 लाख से ₹12 लाख तक का सफर
सरकार के कर सुधारों ने मध्यम वर्ग पर वित्तीय बोझ को उल्लेखनीय रूप से घटाया है। 2014 में ₹2.5 लाख तक की वार्षिक आय कर-मुक्त थी। 2023 में लागू नई कर प्रणाली के तहत अब ₹12 लाख तक की वार्षिक आय वालों (वेतनभोगियों के लिए मानक कटौती सहित ₹12.75 लाख) को शून्य कर देना होता है। इससे करोड़ों परिवारों की बचत और व्यय-योग्य आय में बढ़ोतरी हुई है।
GST: स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार
जुलाई 2017 में लागू हुआ वस्तु एवं सेवा कर (GST) स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर सुधार माना जाता है, जिसने केंद्र और राज्यों के कई करों को एकीकृत कर एक साझा राष्ट्रीय बाज़ार खड़ा किया। आवश्यक वस्तुओं पर कम दरों और तर्कसंगत स्लैबों ने दैनिक उपभोग को किफायती बनाया है।
आँकड़ों के अनुसार, GST करदाताओं का आधार 2017 के 66.5 लाख से बढ़कर अप्रैल 2026 तक 1.64 करोड़ पहुँच गया है — लगभग नौ वर्षों में ढाई गुने से अधिक की वृद्धि।
UPS: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पेंशन सुरक्षा
अप्रैल 2025 से प्रभावी एकीकृत पेंशन योजना (UPS) केंद्र सरकार के कर्मचारियों — जो मध्य वर्ग का बड़ा हिस्सा हैं — की सेवानिवृत्ति सुरक्षा को मज़बूत करती है। अंशदायी संरचना के तहत यह योजना कर्मचारी और सरकारी योगदान को जोड़ती है तथा मुद्रास्फीति-संबद्ध, सुनिश्चित पेंशन देती है। न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पर सेवानिवृत्ति के बाद ₹10,000 प्रति माह की न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी गई है।
बीमा और घरेलू वित्त में बदलाव
प्रीमियम मात्रा के आधार पर भारत वैश्विक स्तर पर 10वाँ सबसे बड़ा बीमा बाज़ार बनकर उभरा है, जो वित्तीय सुरक्षा के विस्तार का संकेत है। घरेलू वित्त में बीमा और पेंशन फंडों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018-19 के 28.6% से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 29.6% हो गई है — जो दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा की ओर परिवारों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
आगे क्या: 2030-35 में चीन से आगे निकलने का अनुमान
OECD के पूर्वानुमानों के अनुसार, 2030 से 2035 के बीच भारत मध्यम वर्ग की आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा। यह बढ़ती आय, विस्तारित आर्थिक अवसरों और बेहतर जीवन स्तर का प्रतीक है, साथ ही मज़बूत उपभोक्ता मांग और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते प्रभाव का भी संकेत है। बुनियादी ढाँचे तक बेहतर पहुँच, सुलभ स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा-कौशल विकास और डिजिटल शासन — ये सभी मिलकर मध्य वर्ग के लिए धन सृजन का सुरक्षित मार्ग बना रहे हैं।