भारत-ओमान 11वीं एयर स्टाफ वार्ता मस्कट में संपन्न, इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त प्रशिक्षण पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायु सेना के एयर वाइस मार्शल संजीव कुमार तालियान और रॉयल एयर फोर्स ऑफ ओमान के एयर कमोडोर खालिद मोहम्मद अब्दुल्ला अल अबरी की सह-अध्यक्षता में 1 से 2 जुलाई 2025 के बीच मस्कट, ओमान में 11वीं भारत-ओमान एयर स्टाफ वार्ता आयोजित हुई। इस द्विपक्षीय बैठक में इंटरऑपरेबिलिटी, संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान को गहरा करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
दो दिवसीय इस वार्ता में दोनों वायु सेनाओं के अधिकारियों ने रक्षा सहयोग के ठोस पहलुओं पर चर्चा की। भारतीय वायु सेना ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पुष्टि की कि यह बातचीत मस्कट में आयोजित हुई और इसमें दोनों देशों के बीच सहयोग की रूपरेखा को और सुदृढ़ करने पर सहमति बनी।
बैठक के दौरान भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधिमंडल ने ओमान की वायु सेना की आधुनिक प्रशिक्षण और रखरखाव सुविधाओं का स्थलीय दौरा भी किया, जिससे दोनों पक्षों को एक-दूसरी क्षमताओं की व्यावहारिक समझ मिली।
राजदूत से मुलाकात और कूटनीतिक आयाम
3 जुलाई को एयर वाइस मार्शल तालियान ने ओमान में भारत के राजदूत प्रशांत पिसे से भेंट की और भारत-ओमान रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की जानकारी साझा की। भारतीय दूतावास के अनुसार, तालियान भारतीय वायु सेना में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (अंतर्राष्ट्रीय रक्षा सहयोग) के पद पर हैं — एक भूमिका जो इस वार्ता के कूटनीतिक महत्व को और रेखांकित करती है।
ओमान: खाड़ी में भारत का सबसे करीबी रक्षा साझेदार
दूतावास ने स्पष्ट किया कि ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का सबसे निकटतम रक्षा साझेदार है। गौरतलब है कि ओमान वह पहला खाड़ी देश है जिसके साथ भारत की तीनों सेनाएँ — थल सेना, नौसेना और वायु सेना — संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं। यह तथ्य इस द्विपक्षीय संबंध की गहराई और रणनीतिक प्रासंगिकता को दर्शाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने इस क्षेत्र में समन्वित समुद्री निगरानी और सुरक्षा सहयोग को भी मज़बूत किया है।
आम जनता और रणनीतिक हितों पर असर
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की नियमित एयर स्टाफ वार्ताएँ न केवल सैन्य तैयारी को बेहतर बनाती हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास का भी निर्माण करती हैं। ओमान की भौगोलिक स्थिति — होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट — भारत के ऊर्जा और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
इस 11वीं वार्ता के बाद दोनों वायु सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों और पेशेवर आदान-प्रदान की गति बढ़ने की उम्मीद है। यह बैठक भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति के अंतर्गत खाड़ी देशों के साथ रक्षा संबंधों को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक और सुदृढ़ कदम मानी जा रही है।