11 अगस्त 2026
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पॉलीमर नोट ट्रायल को केंद्र की मंजूरी: ₹10 और ₹20 के 2 अरब नोट जारी होंगे

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पॉलीमर नोट ट्रायल को केंद्र की मंजूरी: ₹10 और ₹20 के 2 अरब नोट जारी होंगे

सारांश

भारत की मुद्रा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी — केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 के कुल 2 अरब पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को हरी झंडी दे दी है। RBI का लक्ष्य 2027-28 तक इन्हें प्रचलन में लाना है, जो टिकाऊपन और नकली नोटों पर अंकुश की दिशा में निर्णायक कदम होगा।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी।
दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब (100 करोड़) यानी कुल 2 अरब नोट जारी करने का प्रस्ताव स्वीकृत।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 11 अगस्त 2026 को राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
पॉलीमर नोट मौजूदा कागजी नोटों के साथ समानांतर रूप से जारी किए जाएंगे।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक प्रचलन में लाना है।
खरीद प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में; लागत और सटीक समयसीमा अभी अनिश्चित ।

केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को औपचारिक मंजूरी दे दी है — दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब (100 करोड़) यानी कुल 2 अरब नोट जारी करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया है। 11 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी संसद को दी।

प्रस्ताव कैसे आया सामने

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपने केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश के आधार पर RBI अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया था कि फील्ड ट्रायल में सफल परिणाम मिलने पर इन मूल्यवर्गों में पॉलीमर नोटों को नियमित रूप से जारी करने की योजना भी बनाई जाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा, 'सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। RBI के अनुसार, इन पॉलीमर बैंक नोटों को मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से जारी करने का प्रस्ताव है।'

पॉलीमर नोट क्यों हैं खास

पॉलीमर बैंक नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक-आधारित पदार्थ से निर्मित होते हैं। ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और नमी, धूल तथा सामान्य घिसावट का बेहतर सामना करने में सक्षम हैं। इनकी आयु अधिक होने से बार-बार नोट छापने की आवश्यकता घटती है, जिससे मुद्रण लागत में कमी आ सकती है।

इसके अतिरिक्त, पॉलीमर नोटों में उन्नत सुरक्षा विशेषताएँ जोड़ना अपेक्षाकृत सरल होता है, जो नकली नोटों पर अंकुश लगाने में सहायक हो सकती हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देश पहले से ही पॉलीमर मुद्रा का उपयोग कर रहे हैं।

खरीद प्रक्रिया और समयसीमा

वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद को सूचित किया कि RBI ने सरकार को बताया है कि इन नोटों के लिए आवश्यक खरीद प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है। इसलिए फिलहाल यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि पॉलीमर नोट आम जनता के बीच कब तक पहुँचेंगे और इस परियोजना की कुल लागत क्या होगी।

इस महीने की शुरुआत में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट जारी है। उन्होंने कहा था, 'पॉलीमर नोटों पर अभी परीक्षण चल रहा है। बाज़ार में लाने से पहले इन नोटों की पूरी तरह जाँच की जाएगी।'

RBI का लक्ष्य और आगे की राह

RBI गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, केंद्रीय बैंक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाना है। फील्ड ट्रायल के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही व्यापक स्तर पर इनके प्रचलन को लेकर अंतिम निर्णय किया जाएगा। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो यह स्वतंत्र भारत की मुद्रा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब संसदीय स्वीकृति मिलना एक ठोस कदम है। लेकिन असली सवाल यह है कि खरीद प्रक्रिया 'प्रारंभिक चरण' में होने के बावजूद 2027-28 का लक्ष्य कितना व्यावहारिक है। दुनिया के देशों के अनुभव बताते हैं कि पॉलीमर नोटों की शुरुआती लागत अधिक होती है, भले ही दीर्घकालिक बचत हो — और भारत जैसे विशाल व विविध जलवायु वाले देश में फील्ड ट्रायल के नतीजे निर्णायक होंगे। नकली नोटों पर अंकुश का दावा भी तभी सार्थक होगा जब सुरक्षा विशेषताओं की स्वतंत्र जाँच हो।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में पॉलीमर नोट क्या होते हैं और ये कागजी नोटों से कैसे अलग हैं?
पॉलीमर नोट विशेष प्लास्टिक-आधारित पदार्थ से बने होते हैं जो कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। ये नमी, धूल और घिसावट का बेहतर सामना करते हैं, इनकी आयु अधिक होती है और इनमें उन्नत सुरक्षा विशेषताएँ जोड़ना सरल होता है।
सरकार ने कितने पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मंजूरी दी है?
सरकार ने ₹10 और ₹20 दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब (100 करोड़) यानी कुल 2 अरब पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी है। यह प्रस्ताव RBI ने अपने केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश पर RBI अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत केंद्र सरकार को भेजा था।
पॉलीमर नोट आम जनता को कब तक मिलेंगे?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाना है। हालाँकि, खरीद प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है, इसलिए सटीक तारीख और परियोजना की कुल लागत फिलहाल अनिश्चित है।
क्या पॉलीमर नोट आने पर कागजी नोट बंद हो जाएंगे?
नहीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोट मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से जारी किए जाएंगे। फील्ड ट्रायल के सफल नतीजों के बाद ही व्यापक स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
दुनिया के किन देशों में पॉलीमर नोट पहले से चलन में हैं?
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन सहित कई देश पहले से ही पॉलीमर मुद्रा का उपयोग कर रहे हैं। इन देशों के अनुभव के आधार पर ही RBI ने भारत में इनके फील्ड ट्रायल की सिफारिश की है।
राष्ट्र प्रेस
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