24 जुलाई 2026
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भारत का फिनिश्ड स्टील उत्पादन अप्रैल-जून 2026 में 4.06 करोड़ टन, सालाना 4.9% की वृद्धि

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भारत का फिनिश्ड स्टील उत्पादन अप्रैल-जून 2026 में 4.06 करोड़ टन, सालाना 4.9% की वृद्धि

सारांश

भारत के स्टील सेक्टर ने अप्रैल-जून 2026 में 4.9% की वृद्धि के साथ 4.06 करोड़ टन फिनिश्ड स्टील उत्पादन दर्ज किया। जून में खपत 25.6% उछली — इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की रफ्तार साफ़ दिख रही है। SAIL का ₹1,10,810 करोड़ का राजस्व रिकॉर्ड और 2030 तक 30 करोड़ टन क्षमता का लक्ष्य — तस्वीर बड़ी है।

मुख्य बातें

इस्पात मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 में फिनिश्ड स्टील उत्पादन 4.06 करोड़ टन रहा — सालाना 4.9% की वृद्धि।
जून 2026 में फिनिश्ड स्टील की खपत में सालाना 25.6% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई।
तिमाही में क्रूड स्टील उत्पादन 4.21 करोड़ टन , सालाना 3% अधिक।
भारत की कुल क्रूड स्टील क्षमता जून 2026 तक 22.2 करोड़ टन प्रति वर्ष हुई; 2030 तक 30 करोड़ टन का लक्ष्य।
SAIL ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.993 करोड़ टन की रिकॉर्ड बिक्री और ₹1,10,810 करोड़ का राजस्व दर्ज किया।
SAIL और NMDC रूस में कोकिंग कोल व निकेल परिसंपत्तियों के अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

इस्पात मंत्रालय द्वारा 24 जुलाई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के स्टील सेक्टर ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में मजबूत रफ्तार बनाए रखी। इस अवधि में देश का फिनिश्ड स्टील उत्पादन 4.06 करोड़ टन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 3.87 करोड़ टन की तुलना में 4.9 प्रतिशत अधिक है। हाईवे, रेलवे और बंदरगाह जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सरकारी निवेश की तेज रफ्तार को इस वृद्धि का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

तिमाही के प्रमुख उत्पादन आंकड़े

जून 2026 में अकेले फिनिश्ड स्टील उत्पादन 1.35 करोड़ टन रहा, जो जून 2025 के 1.30 करोड़ टन की तुलना में 3.8 प्रतिशत अधिक है। इसी महीने क्रूड स्टील उत्पादन 1.41 करोड़ टन दर्ज किया गया — जून 2025 के 1.35 करोड़ टन से 4.5 प्रतिशत की बढ़त।

पूरी तिमाही में क्रूड स्टील उत्पादन 4.21 करोड़ टन रहा, जो एक साल पहले की समान तिमाही के 4.08 करोड़ टन की तुलना में 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

खपत में उल्लेखनीय उछाल

आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में फिनिश्ड स्टील की खपत में सालाना आधार पर 25.6 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई — जो उत्पादन वृद्धि से कहीं अधिक है। यह संकेत देता है कि घरेलू माँग तेज़ी से बढ़ रही है और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में इस्पात की खपत अपेक्षा से अधिक रही।

गौरतलब है कि सरकार की राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और पीएम गतिशक्ति योजना के तहत सड़क, रेल और बंदरगाह परियोजनाओं में भारी निवेश जारी है, जो इस्पात की माँग को सीधे प्रभावित करता है।

उत्पादन क्षमता और 2030 का लक्ष्य

सरकारी बयान के अनुसार, जून 2026 तक भारत की कुल क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 22.2 करोड़ टन प्रति वर्ष हो गई है। राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत देश ने 2030 तक 30 करोड़ टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है — यानी अभी भी लगभग 7.8 करोड़ टन की क्षमता और जोड़नी होगी।

सेल का रिकॉर्ड प्रदर्शन और विदेशी संपत्तियों की तलाश

मई 2026 में सरकारी इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी करते हुए 1.993 करोड़ टन की रिकॉर्ड बिक्री और ₹1,10,810 करोड़ के राजस्व की घोषणा की। कंपनी की बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 11.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इसके अतिरिक्त, SAIL और NMDC रूस में कोकिंग कोल और निकेल परिसंपत्तियों के अधिग्रहण की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं। मई 2026 में रूस दौरे के बाद SAIL ने संभावित अवसरों के मूल्यांकन के लिए एक आंतरिक समिति गठित की है, जबकि NMDC दीर्घकालिक कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए विदेशों में कोकिंग कोल परिसंपत्तियों का आकलन कर रही है।

ग्रीन स्टील की दिशा में कदम

SAIL के भिलाई स्टील प्लांट को उसके टीएमटी बार के लिए एनवायरनमेंटल प्रोडक्ट डिक्लेरेशन (EPD) प्रमाणन प्राप्त हुआ है। प्लांट की 15 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना हर वर्ष लगभग 3.43 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन करती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा रही है। सरकार के अनुसार, ये पहल घरेलू और वैश्विक बाज़ार में ग्रीन स्टील की बढ़ती माँग के अनुरूप हैं और भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिला सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी खपत में 25.6% की उछाल में छिपी है — यह अंतर बताता है कि माँग आपूर्ति से तेज़ दौड़ रही है, जो आयात दबाव या मूल्य वृद्धि का संकेत हो सकता है। 2030 तक 30 करोड़ टन क्षमता के लक्ष्य के मुकाबले अभी 22.2 करोड़ टन पर खड़े हैं — यानी चार वर्षों में लगभग 35% क्षमता विस्तार चाहिए, जो बड़े पूंजी निवेश और भूमि अधिग्रहण की माँग करता है। SAIL और NMDC का रूस में कोकिंग कोल की तलाश करना दीर्घकालिक कच्चे माल की सुरक्षा की दृष्टि से समझदारी है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम और पश्चिमी प्रतिबंधों की छाया इस रणनीति पर सवाल खड़े करती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अप्रैल-जून 2026 में भारत का फिनिश्ड स्टील उत्पादन कितना रहा?
इस्पात मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत का फिनिश्ड स्टील उत्पादन 4.06 करोड़ टन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 3.87 करोड़ टन की तुलना में 4.9 प्रतिशत अधिक है।
जून 2026 में स्टील की खपत इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ी?
जून 2026 में फिनिश्ड स्टील की खपत सालाना आधार पर 25.6 प्रतिशत बढ़ी। सरकार के अनुसार, हाईवे, रेलवे और बंदरगाह जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेज़ निवेश इस उछाल का प्रमुख कारण है।
भारत का 2030 तक स्टील उत्पादन क्षमता का लक्ष्य क्या है?
राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत भारत ने 2030 तक 30 करोड़ टन प्रति वर्ष क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है। जून 2026 तक देश की क्षमता लगभग 22.2 करोड़ टन प्रति वर्ष तक पहुँच चुकी है।
SAIL ने वित्त वर्ष 2025-26 में कैसा प्रदर्शन किया?
SAIL ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.993 करोड़ टन की रिकॉर्ड बिक्री और ₹1,10,810 करोड़ का राजस्व दर्ज किया। कंपनी की बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 11.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
SAIL और NMDC रूस में क्या कर रहे हैं?
SAIL और NMDC रूस में कोकिंग कोल और निकेल परिसंपत्तियों के अधिग्रहण की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं। मई 2026 में रूस दौरे के बाद SAIL ने इसके लिए एक आंतरिक समिति गठित की है, जबकि NMDC दीर्घकालिक कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करने के उद्देश्य से विदेशी कोकिंग कोल परिसंपत्तियों का आकलन कर रही है।
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