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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी युद्धपोत 'अमिनी', पनडुब्बी रोधी क्षमता में बड़ा इज़ाफ़ा

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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी युद्धपोत 'अमिनी', पनडुब्बी रोधी क्षमता में बड़ा इज़ाफ़ा

सारांश

भारतीय नौसेना को मिला एक और स्वदेशी 'दांत' — GRSE निर्मित पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'अमिनी' अब बेड़े का हिस्सा है। 80% स्वदेशी सामग्री, वाटरजेट प्रणाली और अत्याधुनिक सोनार के साथ यह हिंद महासागर में बढ़ती पनडुब्बी चुनौतियों का जवाब है।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना में स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'अमिनी' को 6 नवंबर 2026 को शामिल किया गया।
युद्धपोत का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) , कोलकाता ने किया है।
यह टॉरपीडो , रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली से लैस है।
युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
इसका नाम लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया; 2002 में सेवामुक्त पेट्या-3 श्रेणी के पूर्ववर्ती युद्धपोत की विरासत को आगे बढ़ाया गया।
वाटरजेट प्रणाली से संचालित यह जहाज़ तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में उच्च गतिशीलता सुनिश्चित करता है।

भारतीय नौसेना में 6 नवंबर 2026 को स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'अमिनी' को औपचारिक रूप से शामिल किया गया, जो समुद्र के उथले पानी में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने में सक्षम है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत के रक्षा क्षेत्र में एक ठोस कदम है।

युद्धपोत की प्रमुख विशेषताएँ

युद्धपोत अमिनी हल्के टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली से लैस है। सोनार तकनीक की मदद से पानी के भीतर मौजूद पनडुब्बियों और अन्य जलीय खतरों की पहचान की जा सकती है, जबकि टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर के ज़रिए तत्काल जवाबी कार्रवाई संभव है।

नौसेना के अनुसार, अमिनी उन चुनिंदा बड़े युद्धपोतों में शामिल है जो वाटरजेट प्रणाली से संचालित होते हैं। यह तकनीक जहाज़ को तटीय और कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में बेहतर गति, चपलता और युद्धाभ्यास क्षमता प्रदान करती है।

डिज़ाइन और निर्माण

युद्धपोत का डिज़ाइन और निर्माण GRSE ने भारतीय जहाज़रानी रजिस्टर (Indian Register of Shipping) के वर्गीकरण मानकों के अनुसार किया है। यह पनडुब्बी रोधी उथले जल वाले युद्धपोतों (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) की श्रेणी में आता है, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

नौसेना के अधिकारियों के अनुसार, 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण और प्रणालियों के उपयोग ने न केवल निर्माण लागत को नियंत्रित किया, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी प्रत्यक्ष बढ़ावा दिया है।

नाम की ऐतिहासिक विरासत

युद्धपोत का नाम लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह नामकरण नौसेना की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जिसमें जहाज़ों को भारत के द्वीपों और तटीय क्षेत्रों के नामों से जोड़ा जाता है। इससे पहले आईएनएस अमिनी नाम का एक पेट्या-3 श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत भारतीय नौसेना में सेवारत था, जिसे वर्ष 2002 में सेवामुक्त किया गया था। नए युद्धपोत को वही नाम देकर उस गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित किया गया है।

समुद्री सुरक्षा पर असर

नौसेना का कहना है कि अमिनी के बेड़े में शामिल होने से पनडुब्बी रोधी अभियानों के साथ-साथ तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता भी सुदृढ़ होगी। विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों को देखते हुए यह अतिरिक्त सक्षमता रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी समुद्री सीमाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा रहा है और 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा निर्यात को भी प्रोत्साहित कर रहा है। GRSE जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड इकाइयों के लिए यह परियोजना विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक ठोस नज़ीर भी पेश करती है।

आने वाले समय में नौसेना इसी श्रेणी के और युद्धपोतों को बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे भारत की समग्र पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह सामग्री प्रदर्शन और विश्वसनीयता के मोर्चे पर आयातित विकल्पों की बराबरी करती है। हिंद महासागर में पनडुब्बी गतिविधियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए यह श्रेणी और समय दोनों सही हैं, लेकिन एक अकेले जहाज़ से बड़ा फ़र्क नहीं पड़ेगा — असल परिवर्तन तब आएगा जब इस श्रेणी की पूरी शृंखला समयबद्ध तरीके से बेड़े में शामिल हो।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युद्धपोत 'अमिनी' क्या है और इसे किसने बनाया है?
युद्धपोत 'अमिनी' एक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी उथले जल वाला युद्धपोत है, जिसे कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया है। इसे 6 नवंबर 2026 को नौसेना में शामिल किया गया।
'अमिनी' में कौन-कौन से हथियार और प्रणालियाँ हैं?
युद्धपोत में हल्के टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली शामिल हैं। सोनार पानी के भीतर पनडुब्बियों की पहचान करता है, जबकि टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर जवाबी कार्रवाई के लिए उपयोग में आते हैं।
युद्धपोत का नाम 'अमिनी' क्यों रखा गया?
युद्धपोत का नाम लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया है। इससे पहले पेट्या-3 श्रेणी का 'आईएनएस अमिनी' नौसेना में सेवारत था, जिसे 2002 में सेवामुक्त किया गया था; नया युद्धपोत उसी विरासत को आगे बढ़ाता है।
इस युद्धपोत में स्वदेशी सामग्री कितनी है और इसका क्या महत्व है?
'अमिनी' में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और प्रणालियाँ उपयोग की गई हैं। यह आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस युद्धपोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना को क्या फ़ायदा होगा?
'अमिनी' की तैनाती से नौसेना की पनडुब्बी रोधी अभियान क्षमता, तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता मज़बूत होगी। वाटरजेट प्रणाली के कारण यह तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में तेज़ गति से संचालन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
राष्ट्र प्रेस
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