आईएनएस 'उदयगिरी', 'कवरत्ती' और 'शक्ति' थाईलैंड के सत्ताहिप पहुंचे, भारत-थाई समुद्री साझेदारी होगी और मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना के ईस्टर्न फ्लीट के तीन युद्धपोत — आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति — ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट के तहत थाईलैंड के प्रमुख नौसैनिक बंदरगाह सत्ताहिप पहुंचे। रियर एडमिरल आलोक आनंद की अगुवाई में पहुंचे इन जहाजों का रॉयल थाई नेवी ने औपचारिक स्वागत किया। यह पोर्ट कॉल दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सक्रिय समुद्री कूटनीति का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
ईस्टर्न फ्लीट के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में यह तीनों युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे। आईएनएस उदयगिरी और आईएनएस कवरत्ती स्वदेशी डिजाइन और मॉड्यूलर निर्माण पर आधारित आधुनिक युद्धपोत हैं, जबकि आईएनएस शक्ति एक फ्लीट टैंकर के रूप में लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करता है। इन जहाजों की उपस्थिति भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करती है।
यात्रा के दौरान होने वाली गतिविधियाँ
इस पोर्ट कॉल के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच प्रोफेशनल एक्सचेंज, क्रॉस-डेक विजिट, ऑपरेशनल बातचीत, खेल-कूद और सामुदायिक आउटरीच जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनका मुख्य उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और परिचालन समन्वय को बढ़ाना है। गौरतलब है कि भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री साझेदारी दशकों पुरानी है, और यह यात्रा उसी निरंतरता की कड़ी है।
वियतनाम यात्रा के बाद थाईलैंड का दौरा
थाईलैंड पहुंचने से पहले आईएनएस उदयगिरी और आईएनएस कवरत्ती ने 22 से 24 जून 2026 तक वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में तीन दिवसीय पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा किया। वहाँ वियतनाम पीपुल्स नेवी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिनमें समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा रणनीतिक हितों पर व्यापक चर्चा की गई। दोनों नौसेनाओं ने द्विपक्षीय अभ्यासों और पेशेवर संवाद के ज़रिए परस्पर समझ को गहरा किया।
भारत की समुद्री कूटनीति का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ नियमित नौसैनिक जुड़ाव भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित युद्धपोतों का इस डिप्लॉयमेंट में शामिल होना यह भी दर्शाता है कि भारत रक्षा निर्यात और तकनीकी साझेदारी के क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभर रहा है।
आगे की दिशा
थाईलैंड की यात्रा के बाद यह ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में भी जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के नियमित पोर्ट कॉल न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढाँचे में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करते हैं।