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नोएडा इस्कॉन मंदिर को ध्वस्तीकरण नोटिस, प्रबंधन बोला — 25 साल पुराने मंदिर का हो रहा पुनर्निर्माण

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नोएडा इस्कॉन मंदिर को ध्वस्तीकरण नोटिस, प्रबंधन बोला — 25 साल पुराने मंदिर का हो रहा पुनर्निर्माण

सारांश

नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-151 के इस्कॉन मंदिर को ध्वस्तीकरण नोटिस थमाया — आरोप है बिना अनुमति डबल बेसमेंट निर्माण का। मंदिर प्रबंधन का पलटवार: 25 साल पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है, दस्तावेज़ दे दिए गए हैं, और कार्रवाई चयनात्मक है।

मुख्य बातें

नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-151 के कामबख्शपुर गाँव स्थित इस्कॉन मंदिर को ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किया।
प्राधिकरण के अनुसार बिना स्वीकृत नक्शे और अनुमति के डबल बेसमेंट का निर्माण हो रहा है।
मंदिर प्रबंधन का दावा — नक्शा, ड्राइंग और रजिस्ट्री समेत सभी दस्तावेज़ पहले ही प्राधिकरण को सौंपे जा चुके हैं।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह करीब 25 वर्ष पुराने जर्जर मंदिर का पुनर्निर्माण है, नया निर्माण नहीं।
प्रबंधन ने आरोप लगाया कि भूमि प्राधिकरण की अधिसूचित ज़मीन नहीं है और भूमि उपयोग परिवर्तन का प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका है।
मंदिर प्रबंधन ने चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया — आसपास के अवैध निर्माणों पर कोई कदम नहीं।

नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-151 के कामबख्शपुर गाँव में निर्माणाधीन इस्कॉन मंदिर को ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किया है, जिसके बाद मंदिर प्रबंधन और अधिकारियों के बीच विवाद तेज़ हो गया है। प्राधिकरण का आरोप है कि बिना स्वीकृत भवन मानचित्र और आवश्यक अनुमति के निर्माण कार्य जारी है, जबकि मंदिर प्रबंधन इन आरोपों को सिरे से नकारता है।

प्राधिकरण का पक्ष

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार मंदिर परिसर में डबल बेसमेंट का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए न तो भवन मानचित्र स्वीकृत कराया गया और न ही निर्माण की अनुमति ली गई। अधिकारियों का यह भी कहना है कि धार्मिक स्थलों के निर्माण या विस्तार के लिए जिला प्रशासन और जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई।

मंदिर प्रबंधन का पक्ष

इस्कॉन मंदिर प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि मंदिर से संबंधित नक्शा, ड्राइंग और रजिस्ट्री सहित सभी आवश्यक दस्तावेज़ पहले ही नोएडा प्राधिकरण को सौंपे जा चुके हैं। प्रबंधन के अनुसार यह कोई नया धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि करीब 25 वर्षों से अस्तित्व में रहे पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण और विस्तार किया जा रहा है।

प्रबंधन का कहना है कि कामबख्शपुर गाँव स्थित पुराना इस्कॉन मंदिर जर्जर अवस्था में पहुँच चुका था, जिसके चलते उसे तोड़कर आधुनिक स्वरूप में नए मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। यह भी दावा किया गया है कि मंदिर का डिज़ाइन उसी वास्तुकार द्वारा तैयार किया गया है, जिन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर की वास्तुकला से जुड़े कार्यों में योगदान दिया है।

भूमि विवाद का पहलू

विवाद तब और गहरा गया जब मंदिर प्रबंधन ने आरोप लगाया कि जिस भूमि पर मंदिर स्थित है, वह नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित (नोटिफाइड) ज़मीन नहीं है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर है। इसके समर्थन में प्रबंधन ने एक पत्र भी सार्वजनिक किया है, जिसमें उक्त भूमि को धार्मिक उपयोग के लिए पहले से प्रयुक्त बताया गया है। प्रबंधन के अनुसार भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज़ कन्वर्ज़न) का प्रस्ताव पहले ही प्राधिकरण के समक्ष रखा जा चुका है।

चयनात्मक कार्रवाई का आरोप

मंदिर प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि आसपास के क्षेत्र में कई अवैध निर्माण मौजूद हैं, लेकिन प्राधिकरण की कार्रवाई केवल मंदिर निर्माण तक सीमित है। प्रबंधन का कहना है कि अन्य अवैध संरचनाओं पर कोई आपत्ति नहीं जताई जा रही, जबकि मंदिर को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। फिलहाल दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और मामला अनसुलझा बना हुआ है।

आगे क्या होगा

इस विवाद का अंतिम निपटारा इस बात पर निर्भर करेगा कि भूमि स्वामित्व और दस्तावेज़ों की जाँच में क्या सामने आता है। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में धार्मिक स्थलों के निर्माण और नियामकीय अनुमतियों को लेकर विवाद बढ़ते देखे जा रहे हैं। आने वाले दिनों में प्राधिकरण और मंदिर प्रबंधन के बीच कानूनी या प्रशासनिक कार्यवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ध्वस्तीकरण नोटिस की वैधता ही प्रश्नों के घेरे में आ जाती है। दूसरी ओर, 'चयनात्मक कार्रवाई' का आरोप — जो धार्मिक संस्थाएँ अक्सर उठाती हैं — तब तक विश्वसनीय नहीं होता जब तक आसपास के अवैध निर्माणों की स्थिति स्वतंत्र रूप से सत्यापित न हो। इस मामले की असली कसौटी यह होगी कि भूमि स्वामित्व और दस्तावेज़ों की जाँच पारदर्शी तरीके से हो — न कि दबाव में।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा प्राधिकरण ने इस्कॉन मंदिर को ध्वस्तीकरण नोटिस क्यों जारी किया?
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार सेक्टर-151 के कामबख्शपुर गाँव स्थित इस्कॉन मंदिर में बिना स्वीकृत भवन मानचित्र और आवश्यक अनुमति के डबल बेसमेंट का निर्माण किया जा रहा है। धार्मिक स्थलों के निर्माण या विस्तार के लिए जिला प्रशासन और जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई — ऐसा प्राधिकरण का कहना है।
इस्कॉन मंदिर प्रबंधन ने नोटिस पर क्या कहा?
मंदिर प्रबंधन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नक्शा, ड्राइंग और रजिस्ट्री समेत सभी आवश्यक दस्तावेज़ पहले ही नोएडा प्राधिकरण को सौंपे जा चुके हैं। प्रबंधन का यह भी कहना है कि यह करीब 25 वर्ष पुराने जर्जर मंदिर का पुनर्निर्माण है, न कि कोई नया धार्मिक निर्माण।
क्या इस्कॉन मंदिर की भूमि नोएडा प्राधिकरण की है?
मंदिर प्रबंधन का दावा है कि यह भूमि नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित (नोटिफाइड) ज़मीन नहीं है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर है। इसके समर्थन में प्रबंधन ने एक पत्र भी सार्वजनिक किया है, जिसमें भूमि को धार्मिक उपयोग के लिए पहले से प्रयुक्त बताया गया है।
मंदिर का डिज़ाइन किसने तैयार किया है?
मंदिर प्रबंधन के अनुसार नए इस्कॉन मंदिर का डिज़ाइन उसी वास्तुकार ने तैयार किया है, जिन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर की वास्तुकला से जुड़े कार्यों में योगदान दिया है। यह दावा प्रबंधन की ओर से किया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस विवाद का अगला कदम क्या होगा?
फिलहाल नोएडा प्राधिकरण और मंदिर प्रबंधन दोनों अपने-अपने पक्ष पर अडिग हैं। मामले का निपटारा भूमि स्वामित्व दस्तावेज़ों की जाँच और भूमि उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव की समीक्षा पर निर्भर करेगा, जिसके बाद कानूनी या प्रशासनिक कार्यवाही की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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