जादू के सम्राट: आधुनिक भारतीय जादू का सूत्रधार

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जादू के सम्राट: आधुनिक भारतीय जादू का सूत्रधार

सारांश

क्या जानते हैं आप उस भारतीय जादूगर के बारे में जिसने अपनी अनोखी कला से दुनिया को चौंका दिया? जानिए पीसी सरकार की प्रेरणादायक कहानी और उनके जादुई करतबों के पीछे की सच्चाई।

Key Takeaways

  • पीसी सरकार ने भारतीय जादू को एक नई पहचान दी।
  • उनकी कला में गणित और ज्यामिति का अद्भुत मिश्रण था।
  • उन्होंने जादू को केवल तमाशा नहीं, बल्कि एक विज्ञान माना।
  • उनका प्रसिद्ध करतब 'भारत का जल' था।
  • उन्होंने ऑल इंडिया मैजिक सर्कल की स्थापना की।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। 9 अप्रैल 1956 को लंदन में बीबीसी के प्रसिद्ध लाइव टेलीविजन शो 'पैनोरमा' का प्रसारण हो रहा था। लाखों ब्रिटिश दर्शक अपने टीवी स्क्रीन के सामने थे। तभी अचानक स्क्रीन पर एक भारतीय व्यक्ति प्रकट हुआ, जिसकी शाही वेशभूषा, सिर पर चमचमाती पगड़ी और आंखों में एक रहस्यमयी चमक थी।

वह अपनी 17 वर्षीय महिला सहायक को सम्मोहित कर एक टेबल पर लिटाते हैं, जिसके हाथ में लकड़ी और कंकाल काटने वाली एक खतरनाक, मोटर से चलने वाली इलेक्ट्रिक आरी होती है। आरी चालू होते ही उसकी डरावनी आवाज स्टूडियो में गूंजने लगती है। जादूगर उस आरी को लड़की के पेट की ओर लाते हैं। जैसे ही आरी रीढ़ की हड्डी के करीब पहुंचती है, अचानक टीवी स्क्रीन काली हो जाती है। लाइव प्रसारण कट जाता है।

लोगों को लगता है कि लाइव टीवी पर एक विदेशी ने एक लड़की की नृशंस हत्या कर दी है। बीबीसी के टेलीफोन लाइन जाम हो जाते हैं। अगले दिन के अखबारों की सुर्खियां थीं, 'टीवी पर लड़की को बीच से काटा गया!' लेकिन यह कोई हत्या नहीं थी, यह एक जीनियस की सबसे बड़ी 'पीआर रणनीति' थी। जिस व्यक्ति ने दुनिया के सबसे बड़े समाचार नेटवर्क को चकमा दिया था, वह कोई और नहीं, बल्कि भारत के महान जादूगर पीसी सरकार थे।

इस घटना ने उन्हें रातों-रात दुनिया का सबसे बड़ा शोमैन बना दिया। 23 फरवरी 1913 को अविभाजित बंगाल (अब बांग्लादेश) के अशेकपुर गांव में जन्मे प्रतुल चंद्र सरकार की रगों में जादू दौड़ता था। उनके परिवार में पिछले सात पीढ़ियों से रहस्यवाद और जादू की परंपरा चली आ रही थी। सरकार खुद कहते थे, 'जब मैं सोता हूं, तो जादू की सांस लेता हूं। जब जागता हूं, तो जादू जीता हूं।'

लेकिन सरकार कोई साधारण जादूगर नहीं थे। वे एक कुशाग्र बुद्धि वाले छात्र थे जिन्होंने 1933 में गणित में ऑनर्स के साथ ग्रेजुएशन किया। यही गणितीय प्रज्ञा उनके जादू की रीढ़ बनी। उनका जादू कोई अंधविश्वास नहीं था, बल्कि यह ज्यामिति, प्रकाशिकी, और मानव मनोविज्ञान का एक सटीक विज्ञान था। प्रसिद्ध गुरु गणपति चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में, उन्होंने अपने करतबों को एक महाकाव्यात्मक रूप दिया और इसे 'इंद्रजाल' नाम दिया।

उस समय पश्चिमी दुनिया भारतीयों को बहुत ही हीन दृष्टि से देखती थी। उनके लिए भारतीय जादू का मतलब था फटे-पुराने कपड़े पहने सपेरे या भूखे-नंगे फकीर। पीसी सरकार ने इस रूढ़िवादी औपनिवेशिक सोच को बदल दिया।

जब वे विदेशी मंचों (लंदन, पेरिस, शिकागो) पर उतरते थे, तो वे एक 'महाराजा' की तरह दिखते थे। रेशमी शेरवानी, भारी आभूषण और रत्नों से जड़ी पगड़ी में जब वे मंच पर आते, तो पश्चिमी दर्शक अवाक रह जाते।

पीसी सरकार के जीवन का सबसे रोमांचक अध्याय वह है जिसके बारे में इतिहास की किताबें अक्सर खामोश रहती हैं। कलकत्ता की गलियों में उनकी मुलाकात महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस से हुई थी। नेताजी के उग्र राष्ट्रवाद ने पीसी सरकार को अंदर तक झकझोर दिया।

एक 'घूमने वाले जादूगर' का पेशा किसी भी खुफिया एजेंट के लिए सबसे बेहतरीन नकाब होता है। सरकार ने अपने जादू के बड़े-बड़े बक्सों और ट्रंकों में ब्रिटिश पुलिस की नाक के नीचे से नेताजी के गुप्त दस्तावेज और खुफिया संदेश एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाए।

नेताजी की सलाह पर ही वे 1932 में जापान गए, जहां उन्होंने रासबिहारी बोस के साथ मिलकर काम किया। वहां अपने जादू के शो से उन्होंने जो भी पैसा कमाया, उसका हर एक पैसा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए दान कर दिया।

उनके जादुई करतबों ने दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के पसीने छुड़ा दिए थे। उनका प्रसिद्ध करतब 'भारत का जल', जिसमें एक जग से पानी कभी खत्म नहीं होता था, वास्तव में फ्लूइड मैकेनिक्स और 'अनंत' (इनफिनिटी) के दर्शन का शानदार मिश्रण था।

उनका 'एक्स-रे दृष्टि' करतब तो और भी खौफनाक था। आंखों पर आटे की लोई, स्पंज और पट्टियों की कई परतें बांधने के बाद भी वे ब्लैकबोर्ड पर जापानी और चीनी जैसी मुश्किल भाषाओं को पढ़ और लिख लेते थे। पश्चिमी मीडिया ने उन्हें 'द मैन विद द एक्स-रे आइज' का नाम दे दिया था।

पीसी सरकार मानते थे कि जिस तरह भारतीय नाट्यशास्त्र में भावनाएं होती हैं, वैसे ही जादू में भी '13 रस' होते हैं। उन्होंने जादू को केवल हाथों की सफाई नहीं, बल्कि हिंदू दर्शन की 'माया' का भौतिक रूप माना।

सरकार का सपना था कि जादू को एक सड़क छाप तमाशा न मानकर इसे ललित कलाओं और विज्ञान की तरह विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाए। इसी मकसद से उन्होंने 1954 में 'ऑल इंडिया मैजिक सर्कल' की स्थापना की। उन्होंने सम्मोहन और रहस्यवाद पर बंगाली, हिंदी और अंग्रेजी में 22 से अधिक किताबें लिखीं, जो आज भी जादूगरों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पीसी सरकार ने 6 जनवरी 1971 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

Point of View

बल्कि भारतीयता को भी गर्व के साथ प्रस्तुत किया। उनका जीवन और कार्य हमें प्रेरणा देते हैं कि हम अपनी कला को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करें।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

पीसी सरकार कौन थे?
पीसी सरकार एक प्रसिद्ध भारतीय जादूगर थे, जिन्हें आधुनिक भारतीय जादू का जनक माना जाता है।
उन्होंने अपनी कला में क्या खास किया?
उनकी कला में गणित, ज्यामिति और मानव मनोविज्ञान का अद्भुत मिश्रण था।
क्या उनका जादू केवल दिखावा था?
नहीं, उनका जादू विज्ञान और तकनीक पर आधारित था, जो दर्शकों को चौंका देता था।
उनका सबसे प्रसिद्ध करतब क्या था?
उनका प्रसिद्ध करतब 'भारत का जल' था, जिसमें पानी कभी खत्म नहीं होता था।
उन्होंने जादू को किस तरह से पेश किया?
उन्होंने जादू को एक कला और विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे यह उच्च शिक्षा का विषय बन सके।
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