30 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जगन मोहन रेड्डी ने लंका जमीन विवाद में किसानों को कानूनी मदद का भरोसा दिया, TDP पर गंभीर आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जगन मोहन रेड्डी ने लंका जमीन विवाद में किसानों को कानूनी मदद का भरोसा दिया, TDP पर गंभीर आरोप

सारांश

कृष्णा जिले के किसान 1952 से जिन जमीनों पर खेती कर रहे हैं, उन पर कथित बेनामी कब्जे का मामला सामने आया है। जगन मोहन रेड्डी ने कानूनी लड़ाई का भरोसा दिया; वाईएसआरसीपी ने ₹300 करोड़ के संसाधनों पर कब्जे का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की माँग की।

मुख्य बातें

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 30 सितंबर 2026 को ताडेपल्ली में लंकापल्ली गांव के किसानों से मुलाकात कर उन्हें कानूनी सहायता का भरोसा दिया।
विवाद लगभग 600 एकड़ 'लंका जमीन' को लेकर है जिस पर किसानों के परिवार 1952 से खेती करते आ रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि TDP नेताओं और बेनामी व्यक्तियों के नाम पर गलत पट्टादार पासबुक जारी की गई हैं।
पूर्व विधायक काइले अनिल कुमार ने ₹300 करोड़ के सरकारी संसाधनों पर कब्जे का आरोप लगाया।
वाईएसआरसीपी ने न्यायालय जाने और न्यायिक जांच की माँग करने की चेतावनी दी है।

वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 30 सितंबर 2026 को ताडेपल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में कृष्णा जिले के पमिदिमुक्काला मंडल के लंकापल्ली गांव के किसानों से मुलाकात की। इन किसानों ने लगभग 600 एकड़ 'लंका जमीन' से जुड़े विवाद में सहायता की माँग की, जिस पर उनके परिवार 1952 से खेती करते आ रहे हैं।

किसानों की शिकायतें

किसानों ने जगन मोहन रेड्डी को बताया कि दशकों से उनके परिवार इन जमीनों पर निर्भर हैं, परंतु उनके अधिकारों को कथित तौर पर नजरअंदाज किया जा रहा है। किसानों के अनुसार, स्थानीय तेलुगु देशम पार्टी (TDP) नेताओं और राजस्व अधिकारियों ने कथित रूप से TDP नेताओं और उनके बेनामी व्यक्तियों के नाम पर पट्टादार पासबुक जारी की हैं। किसानों ने दावा किया कि पमिदिमुक्काला के तहसीलदार के. नवीन कुमार ने इस प्रक्रिया की देखरेख की।

किसानों ने वाईएसआरसीपी से अपील की कि वह इस पूरे मामले की जांच की माँग करे और न्याय मिलने तक उनके साथ खड़ी रहे।

जगन मोहन रेड्डी का आश्वासन

किसानों की शिकायतें सुनने के बाद जगन मोहन रेड्डी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वाईएसआरसीपी जरूरी कानूनी मदद प्रदान करेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के प्रयासों में उनका साथ देगी। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में भूमि अधिकारों को लेकर विवाद तेज होते जा रहे हैं।

पूर्व विधायक के आरोप

मीडिया से बात करते हुए पूर्व विधायक काइले अनिल कुमार ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पमर्रु में TDP नेता री-सर्वे, जाली दस्तावेजों और ऐसे नामों पर जारी पट्टादार पासबुक के जरिए एससी सोसाइटी लंका की लगभग 350 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो असली रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं हैं।

अनिल कुमार के अनुसार, पमर्रु में कुल 1,200 एकड़ जमीन है, जिसमें से असली किसान लगभग 250 एकड़ पर खेती करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शेष 350 एकड़ जमीन स्थानीय नेता घंटा सुरेश की देखरेख और विधायक वरला कुमार राजा के कथित समर्थन से अन्य लोगों को ट्रांसफर की जा रही है।

सरकारी जमीन और रेत खनन का विवाद

पूर्व विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि एससी सोसाइटी की 600 एकड़ जमीन को सरकारी जमीन के रूप में दिखाया जा रहा है, जिसमें रेत निकालने के लिए प्रस्तावित लगभग 100 एकड़ जमीन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जमीन, रेत और मिट्टी के सौदों के जरिए लगभग ₹300 करोड़ के सरकारी संसाधनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब आंध्र प्रदेश में नदी किनारे की 'लंका जमीन' पर कब्जे के आरोप सामने आए हैं। अनुसूचित जाति समुदायों की जमीनों पर बेनामी कब्जे के ऐसे मामले राज्य में लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं।

आगे क्या होगा

अनिल कुमार ने चेतावनी दी कि वाईएसआरसीपी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और गैर-कानूनी पासबुक को रद्द करवाने तथा न्यायिक जांच की माँग करेगी। पार्टी ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की भी माँग की है। यह मामला राज्य में भूमि अधिकार और अनुसूचित जाति समुदायों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को नए सिरे से उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पट्टादार पासबुक जैसी प्रशासनिक प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग इस संवेदनशील मुद्दे को और उलझाता है। विपक्ष में बैठी वाईएसआरसीपी के लिए यह एक राजनीतिक अवसर भी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या न्यायालय में जाने की चेतावनी से किसानों को वास्तविक राहत मिलेगी या यह राजनीतिक दबाव की एक और कवायद बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लंका जमीन विवाद क्या है?
यह आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पमिदिमुक्काला मंडल के लंकापल्ली और पमर्रु क्षेत्र में लगभग 600 एकड़ नदी किनारे की उपजाऊ जमीन को लेकर विवाद है। किसानों का दावा है कि उनके परिवार 1952 से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं, लेकिन कथित तौर पर TDP नेताओं और बेनामी व्यक्तियों के नाम पर फर्जी पट्टादार पासबुक जारी की जा रही हैं।
वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने किसानों को क्या आश्वासन दिया?
जगन मोहन रेड्डी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वाईएसआरसीपी उन्हें जरूरी कानूनी मदद देगी और उनके अधिकारों की रक्षा के प्रयासों में साथ खड़ी रहेगी। पार्टी ने न्यायालय जाने और न्यायिक जांच की माँग करने की भी चेतावनी दी है।
इस विवाद में कितनी जमीन और कितनी राशि दांव पर है?
पूर्व विधायक काइले अनिल कुमार के अनुसार, पमर्रु में कुल 1,200 एकड़ जमीन में से लगभग 350 एकड़ एससी सोसाइटी की जमीन कथित तौर पर दूसरों को ट्रांसफर की जा रही है। जमीन, रेत और मिट्टी के सौदों के जरिए लगभग ₹300 करोड़ के सरकारी संसाधनों पर कब्जा करने का प्रयास बताया गया है।
TDP नेताओं और राजस्व अधिकारियों पर क्या आरोप हैं?
किसानों ने आरोप लगाया है कि TDP नेताओं और राजस्व अधिकारियों ने मिलकर बेनामी व्यक्तियों के नाम पर फर्जी पट्टादार पासबुक जारी कीं। तहसीलदार के. नवीन कुमार पर इस प्रक्रिया की देखरेख करने का आरोप है, जबकि स्थानीय नेता घंटा सुरेश और विधायक वरला कुमार राजा पर जमीन ट्रांसफर में भूमिका का आरोप लगाया गया है।
वाईएसआरसीपी आगे क्या कदम उठाएगी?
वाईएसआरसीपी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने, गैर-कानूनी पट्टादार पासबुक रद्द करवाने और न्यायिक जांच की माँग करने की घोषणा की है। पार्टी ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की भी अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले