जगन मोहन रेड्डी ने लंका जमीन विवाद में किसानों को कानूनी मदद का भरोसा दिया, TDP पर गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 30 सितंबर 2026 को ताडेपल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में कृष्णा जिले के पमिदिमुक्काला मंडल के लंकापल्ली गांव के किसानों से मुलाकात की। इन किसानों ने लगभग 600 एकड़ 'लंका जमीन' से जुड़े विवाद में सहायता की माँग की, जिस पर उनके परिवार 1952 से खेती करते आ रहे हैं।
किसानों की शिकायतें
किसानों ने जगन मोहन रेड्डी को बताया कि दशकों से उनके परिवार इन जमीनों पर निर्भर हैं, परंतु उनके अधिकारों को कथित तौर पर नजरअंदाज किया जा रहा है। किसानों के अनुसार, स्थानीय तेलुगु देशम पार्टी (TDP) नेताओं और राजस्व अधिकारियों ने कथित रूप से TDP नेताओं और उनके बेनामी व्यक्तियों के नाम पर पट्टादार पासबुक जारी की हैं। किसानों ने दावा किया कि पमिदिमुक्काला के तहसीलदार के. नवीन कुमार ने इस प्रक्रिया की देखरेख की।
किसानों ने वाईएसआरसीपी से अपील की कि वह इस पूरे मामले की जांच की माँग करे और न्याय मिलने तक उनके साथ खड़ी रहे।
जगन मोहन रेड्डी का आश्वासन
किसानों की शिकायतें सुनने के बाद जगन मोहन रेड्डी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वाईएसआरसीपी जरूरी कानूनी मदद प्रदान करेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के प्रयासों में उनका साथ देगी। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में भूमि अधिकारों को लेकर विवाद तेज होते जा रहे हैं।
पूर्व विधायक के आरोप
मीडिया से बात करते हुए पूर्व विधायक काइले अनिल कुमार ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पमर्रु में TDP नेता री-सर्वे, जाली दस्तावेजों और ऐसे नामों पर जारी पट्टादार पासबुक के जरिए एससी सोसाइटी लंका की लगभग 350 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो असली रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं हैं।
अनिल कुमार के अनुसार, पमर्रु में कुल 1,200 एकड़ जमीन है, जिसमें से असली किसान लगभग 250 एकड़ पर खेती करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शेष 350 एकड़ जमीन स्थानीय नेता घंटा सुरेश की देखरेख और विधायक वरला कुमार राजा के कथित समर्थन से अन्य लोगों को ट्रांसफर की जा रही है।
सरकारी जमीन और रेत खनन का विवाद
पूर्व विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि एससी सोसाइटी की 600 एकड़ जमीन को सरकारी जमीन के रूप में दिखाया जा रहा है, जिसमें रेत निकालने के लिए प्रस्तावित लगभग 100 एकड़ जमीन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जमीन, रेत और मिट्टी के सौदों के जरिए लगभग ₹300 करोड़ के सरकारी संसाधनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब आंध्र प्रदेश में नदी किनारे की 'लंका जमीन' पर कब्जे के आरोप सामने आए हैं। अनुसूचित जाति समुदायों की जमीनों पर बेनामी कब्जे के ऐसे मामले राज्य में लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं।
आगे क्या होगा
अनिल कुमार ने चेतावनी दी कि वाईएसआरसीपी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और गैर-कानूनी पासबुक को रद्द करवाने तथा न्यायिक जांच की माँग करेगी। पार्टी ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की भी माँग की है। यह मामला राज्य में भूमि अधिकार और अनुसूचित जाति समुदायों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को नए सिरे से उजागर करता है।