जावेद अली के 'जहरीले' बयान पर अयोध्या में सियासी घमासान, महंत सीताराम दास ने सपा को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जावेद अली के विवादित बयान के बाद अयोध्या में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने 15 जून को इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह के बयान सनातन संस्कृति को धूमिल और बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश है। यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई तल्खी का संकेत दे रहा है।
महंत सीताराम दास का पलटवार
महंत सीताराम दास ने कहा कि जो लोग भारत में रहकर यहाँ के संसाधनों का उपभोग करते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं, यदि वे फिर भी इस तरह की भावनाएँ रखते हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'भाजपा के शासनकाल में निष्पक्षता, पारदर्शिता और शुचिता आई है।'
महंत ने सपा के शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में 700 दंगे हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि उस वक्त इन लोगों की मंशा कहाँ थी? उन्होंने यह भी कहा कि संपूर्ण हिंदू जनमानस ऐसे बयानों का जवाब देने के लिए तैयार है।
मंत्री और सांसदों की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'जिनके अंदर जहर है वो जहर उगलेंगे और जिनके अंदर अमृत है वो अमृत उगलेंगे।' उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' की भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए जावेद अली के बयान को इसके विपरीत बताया।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। उन्होंने कहा, 'अगर कोई देश के बहुसंख्यक समाज को जहर कह रहा है, तो असल में वही लोग जहर फैलाने और बंटवारा करने की कोशिश कर रहे हैं।' पाल ने यह भी कहा कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने वाली ममता बनर्जी की पार्टी को आज पश्चिम बंगाल में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और उत्तर प्रदेश की जनता भी ऐसे बयानबाज़ों को सबक सिखाएगी।
BJP के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने कहा, 'अगर समाजवादी पार्टी हिंदुओं को जहरीला बता रही है, तो जनता भी उसी हिसाब से जवाब देगी। हिंदू धर्म एक ऐसी विचारधारा है जो सबका भला चाहती है — इसे जहरीला कहना स्वीकार्य नहीं है।'
सपा और सांप्रदायिक राजनीति का पुराना संदर्भ
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक बयानों को लेकर विवाद नया नहीं है। आलोचकों का कहना है कि चुनावी मौसम में इस तरह के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं और विभिन्न दल अपनी-अपनी ज़मीन मजबूत करने में जुटे हैं।
आगे क्या
इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। BJP नेताओं ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएँगे। सपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। उत्तर प्रदेश की सियासत में यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।