15 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयपुर: पैटी गले में फंसने से 12वीं के छात्र प्रिंस की मौत, महाराणा प्रताप स्कूल पर लापरवाही का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयपुर: पैटी गले में फंसने से 12वीं के छात्र प्रिंस की मौत, महाराणा प्रताप स्कूल पर लापरवाही का आरोप

सारांश

जयपुर के झोटवाड़ा स्थित महाराणा प्रताप स्कूल में 12वीं के छात्र प्रिंस की लंच के दौरान पैटी गले में फंसने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने 40-45 मिनट तक न उचित सूचना दी, न इलाज कराया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के आदेश दिए हैं और जाँच शुरू कर दी है।

मुख्य बातें

14 अगस्त 2026 को जयपुर के झोटवाड़ा स्थित महाराणा प्रताप सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं के छात्र प्रिंस की मौत हुई।
सहपाठी के अनुसार लंच में कैंटीन की पैटी गले में फंसने से दम घुटा; अन्य छात्र बीमार नहीं पड़े।
पिता अमित सोनू के अनुसार स्कूल से सूचना मिलने के 40-45 मिनट बाद पहुँचे, तब तक बच्चे की साँसें थम चुकी थीं।
डॉक्टरों ने कहा कि समय पर अस्पताल लाया जाता तो जान बचाई जा सकती थी ।
भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने पूर्ण जाँच का आश्वासन दिया; मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार के समर्थन का भरोसा दिलाया।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा; स्कूल प्रशासन का आधिकारिक बयान अभी नहीं आया।

जयपुर के झोटवाड़ा स्थित महाराणा प्रताप सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 14 अगस्त 2026 को 12वीं कक्षा के छात्र प्रिंस की स्कूल कैंटीन की पैटी खाने के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने न तो समय पर सूचना दी और न ही आपातकालीन चिकित्सा सहायता में तत्परता दिखाई, जिससे बच्चे की जान बचाने का मौका चूक गया।

घटनाक्रम: कैसे हुई मौत

प्रिंस के एक सहपाठी के अनुसार, लंच के समय प्रिंस ने स्कूल कैंटीन से पैटी खाई। खाली पेट जल्दी-जल्दी खाने के कारण पैटी का टुकड़ा गले में फंस गया। पानी पीने के बावजूद वह बाहर नहीं निकला। इसके बाद प्रिंस की तबीयत बिगड़ने लगी।

उल्लेखनीय है कि उस दिन कैंटीन से अन्य छात्रों ने भी पैटी खाई थी, लेकिन कोई और बीमार नहीं पड़ा — जो यह संकेत देता है कि मौत का कारण खाद्य विषाक्तता नहीं, बल्कि दम घुटना (चोकिंग) हो सकता है। हालाँकि मौत की आधिकारिक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

परिजनों की पीड़ा: 'शरीर नीला पड़ चुका था'

प्रिंस के पिता अमित सोनू ने बताया कि दोपहर 11:30 से 12 बजे के बीच स्कूल से फोन आया कि बच्चा बीमार है और चार पहिया वाहन से आने की सलाह दी गई, लेकिन बीमारी की प्रकृति नहीं बताई गई। उनके पहुँचने तक 40 से 45 मिनट बीत चुके थे और तब तक प्रिंस का शरीर ठंडा पड़ चुका था और सांसें थम चुकी थीं।

प्रिंस की माँ ने बताया कि स्कूल पहुँचने पर उन्हें ऑफिस में ले जाया गया, जहाँ दरवाजे और खिड़की पर पर्दे लगे थे, कमरे में गर्मी थी और पंखा धीमी गति से चल रहा था। उन्होंने रोते हुए कहा, 'जब टीचर एक तरफ हटा तो मुझे सोफे पर प्रिंस के पैर दिखाई दिए। पास गई तो देखा उसका शरीर नीला पड़ चुका था, हाथ ठंडे थे, आँखें नीली हो गई थीं।' परिजन तत्काल प्रिंस को अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि समय पर लाया गया होता तो शायद उसे बचाया जा सकता था।

विरोध-प्रदर्शन और मांगें

घटना की जानकारी फैलते ही शुक्रवार को स्कूल के बाहर परिजन और छात्र एकत्र हो गए और स्कूल प्रशासन तथा कैंटीन संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि स्कूल स्टाफ ने समय पर एम्बुलेंस बुलाई होती या प्राथमिक उपचार किया होता, तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी।

भाजपा विधायक की प्रतिक्रिया

भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) विधायक बालमुकुंद आचार्य ने घटना को 'बहुत दुखद' बताते हुए कहा, 'मैं पूरे सोनी परिवार को भरोसा दिलाता हूँ कि मौत की असली वजह पता लगाने के लिए पूरी जाँच की जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार और प्रशासन दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूँकि अन्य छात्र बीमार नहीं पड़े, इसलिए सही कारण जानना जरूरी है।

जाँच और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने प्रिंस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। स्कूल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह मामला स्कूलों में आपातकालीन चिकित्सा तैयारी और कैंटीन निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यहाँ 40-45 मिनट तक न एम्बुलेंस बुलाई गई, न परिजनों को सही जानकारी दी गई। राजस्थान सहित अधिकांश राज्यों में स्कूलों के लिए अनिवार्य प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण और आपातकालीन कार्ययोजना के नियम तो हैं, पर उनका पालन कितना होता है — यह मामला उस खाई को उजागर करता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तथ्य स्पष्ट होंगे, लेकिन असली जवाबदेही सिर्फ एक स्कूल की नहीं, पूरे तंत्र की है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर के महाराणा प्रताप स्कूल में छात्र प्रिंस की मौत कैसे हुई?
सहपाठी के अनुसार, 14 अगस्त 2026 को लंच के दौरान प्रिंस ने स्कूल कैंटीन से पैटी खाई जो खाली पेट जल्दी खाने के कारण गले में फंस गई। पानी पीने के बावजूद वह नहीं निकली और उसकी तबीयत बिगड़ती गई। मौत की आधिकारिक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।
परिजनों का स्कूल प्रशासन पर क्या आरोप है?
परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने बच्चे की गंभीर स्थिति की सही जानकारी समय पर नहीं दी और न ही तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाई। पिता अमित सोनू के अनुसार, फोन आने के 40-45 मिनट बाद वे पहुँचे और तब तक बच्चे की साँसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने कहा कि समय पर लाया जाता तो जान बचाई जा सकती थी।
क्या पैटी दूषित थी या यह चोकिंग की घटना है?
स्कूल प्रशासन के अनुसार उस दिन अन्य छात्रों ने भी उसी कैंटीन से पैटी खाई, लेकिन कोई और बीमार नहीं पड़ा। यह संकेत देता है कि मौत खाद्य विषाक्तता से नहीं, बल्कि गले में पैटी फंसने (चोकिंग) से हुई हो सकती है। हालाँकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही निश्चित कारण सामने आएगा।
इस मामले में पुलिस और सरकार क्या कदम उठा रही है?
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जाँच शुरू कर दी है। भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने पूर्ण जाँच का आश्वासन दिया है और कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार परिवार के साथ है। पोस्टमार्टम और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
स्कूलों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या नियम हैं?
भारत में स्कूलों के लिए आपातकालीन चिकित्सा प्रोटोकॉल और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में उन नियमों का पालन हुआ या नहीं, यह जाँच का विषय है। यह घटना स्कूल कैंटीन की निगरानी और आपातकालीन तैयारी पर गंभीर सवाल उठाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले