जयपुर: पैटी गले में फंसने से 12वीं के छात्र प्रिंस की मौत, महाराणा प्रताप स्कूल पर लापरवाही का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर के झोटवाड़ा स्थित महाराणा प्रताप सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 14 अगस्त 2026 को 12वीं कक्षा के छात्र प्रिंस की स्कूल कैंटीन की पैटी खाने के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने न तो समय पर सूचना दी और न ही आपातकालीन चिकित्सा सहायता में तत्परता दिखाई, जिससे बच्चे की जान बचाने का मौका चूक गया।
घटनाक्रम: कैसे हुई मौत
प्रिंस के एक सहपाठी के अनुसार, लंच के समय प्रिंस ने स्कूल कैंटीन से पैटी खाई। खाली पेट जल्दी-जल्दी खाने के कारण पैटी का टुकड़ा गले में फंस गया। पानी पीने के बावजूद वह बाहर नहीं निकला। इसके बाद प्रिंस की तबीयत बिगड़ने लगी।
उल्लेखनीय है कि उस दिन कैंटीन से अन्य छात्रों ने भी पैटी खाई थी, लेकिन कोई और बीमार नहीं पड़ा — जो यह संकेत देता है कि मौत का कारण खाद्य विषाक्तता नहीं, बल्कि दम घुटना (चोकिंग) हो सकता है। हालाँकि मौत की आधिकारिक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
परिजनों की पीड़ा: 'शरीर नीला पड़ चुका था'
प्रिंस के पिता अमित सोनू ने बताया कि दोपहर 11:30 से 12 बजे के बीच स्कूल से फोन आया कि बच्चा बीमार है और चार पहिया वाहन से आने की सलाह दी गई, लेकिन बीमारी की प्रकृति नहीं बताई गई। उनके पहुँचने तक 40 से 45 मिनट बीत चुके थे और तब तक प्रिंस का शरीर ठंडा पड़ चुका था और सांसें थम चुकी थीं।
प्रिंस की माँ ने बताया कि स्कूल पहुँचने पर उन्हें ऑफिस में ले जाया गया, जहाँ दरवाजे और खिड़की पर पर्दे लगे थे, कमरे में गर्मी थी और पंखा धीमी गति से चल रहा था। उन्होंने रोते हुए कहा, 'जब टीचर एक तरफ हटा तो मुझे सोफे पर प्रिंस के पैर दिखाई दिए। पास गई तो देखा उसका शरीर नीला पड़ चुका था, हाथ ठंडे थे, आँखें नीली हो गई थीं।' परिजन तत्काल प्रिंस को अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि समय पर लाया गया होता तो शायद उसे बचाया जा सकता था।
विरोध-प्रदर्शन और मांगें
घटना की जानकारी फैलते ही शुक्रवार को स्कूल के बाहर परिजन और छात्र एकत्र हो गए और स्कूल प्रशासन तथा कैंटीन संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि स्कूल स्टाफ ने समय पर एम्बुलेंस बुलाई होती या प्राथमिक उपचार किया होता, तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी।
भाजपा विधायक की प्रतिक्रिया
भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) विधायक बालमुकुंद आचार्य ने घटना को 'बहुत दुखद' बताते हुए कहा, 'मैं पूरे सोनी परिवार को भरोसा दिलाता हूँ कि मौत की असली वजह पता लगाने के लिए पूरी जाँच की जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार और प्रशासन दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूँकि अन्य छात्र बीमार नहीं पड़े, इसलिए सही कारण जानना जरूरी है।
जाँच और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने प्रिंस के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। स्कूल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह मामला स्कूलों में आपातकालीन चिकित्सा तैयारी और कैंटीन निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।