21 जुलाई 2026
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जक्कूर फ्लाइंग स्कूल का डीजीसीए ने 2026-2031 तक लाइसेंस नवीनीकृत किया, भाजपा बोली — 'जन जागरूकता की जीत'

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जक्कूर फ्लाइंग स्कूल का डीजीसीए ने 2026-2031 तक लाइसेंस नवीनीकृत किया, भाजपा बोली — 'जन जागरूकता की जीत'

सारांश

डीजीसीए ने बेंगलुरु के जक्कूर फ्लाइंग स्कूल का लाइसेंस 2026-2031 के लिए नवीनीकृत कर दिया — जिसे भाजपा ने कर्नाटक सरकार के 205 एकड़ पर खेल परिसर बनाने के प्रस्ताव के खिलाफ अपनी बड़ी जीत बताया। मैसूर शाही परिवार की दान की गई इस ऐतिहासिक भूमि का भविष्य अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है।

मुख्य बातें

डीजीसीए ने जक्कूर गवर्नमेंट फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (जीएफटीएस) का लाइसेंस 2026-2031 के लिए नवीनीकृत किया।
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर.
अशोक ने इसे 'राजनीतिक लालच पर जन जागरूकता की जीत' करार दिया।
कर्नाटक सरकार ने 205 एकड़ जक्कूर एयरोड्रोम पर अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो अभी प्रारंभिक अवधारणा चरण में है।
जक्कूर फ्लाइंग स्कूल तत्कालीन मैसूर शाही परिवार द्वारा दान की गई भूमि पर स्थित है और देश के सबसे पुराने विमानन प्रशिक्षण संस्थानों में गिना जाता है।
युवा सशक्तीकरण एवं खेल विभाग को खेल परिसर योजना और उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बेंगलुरु के जक्कूर स्थित गवर्नमेंट फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (जीएफटीएस) का लाइसेंस नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अगले पाँच वर्षों (2026-2031) के लिए नवीनीकृत कर दिया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को इसे जन जागरूकता और भाजपा के निरंतर विरोध की जीत करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

आर. अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार देश के सबसे पुराने फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों में से एक — जक्कूर जीएफटीएस — को हटाकर उस स्थान पर अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर विकसित करना चाहती थी। उनके अनुसार, डीजीसीए के लाइसेंस नवीनीकरण के बाद जक्कूर फ्लाइंग स्कूल में उड़ान संचालन फिर से शुरू होगा और संस्थान को स्थानांतरित करने की योजना फिलहाल टल गई है।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक सरकार ने उत्तर बेंगलुरु स्थित 205 एकड़ के जक्कूर एयरोड्रोम में अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो अभी प्रारंभिक अवधारणा चरण में है। सरकार के इस निर्णय के बाद युवा सशक्तीकरण एवं खेल विभाग को खेल परिसर की योजना तैयार करने और उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विमानन विरासत का सवाल

अशोक ने बताया कि जक्कूर फ्लाइंग स्कूल उस भूमि पर स्थापित है जिसे तत्कालीन मैसूर शाही परिवार ने दान में दिया था। उन्होंने इसे भारत की विमानन विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ऐतिहासिक सार्वजनिक भूमि के व्यावसायिक उपयोग पर बहस तेज हो रही है।

भाजपा का आरोप — रियल एस्टेट हित

भाजपा नेता ने कहा कि यह केवल लाइसेंस नवीनीकरण नहीं, बल्कि 'राजनीतिक लालच पर जन जागरूकता की जीत' है। उन्होंने आरोप लगाया कि विमानन गतिविधियाँ हटाकर क्षेत्र की जमीन को रियल एस्टेट हितों के लिए उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही थी। अशोक ने कहा, 'संदेश साफ है कि बेंगलुरु बिकाऊ नहीं है और कर्नाटक की सार्वजनिक संस्थाएँ राजनीतिक रूप से जुड़े बिल्डरों के लिए भूमि बैंक नहीं बन सकतीं।'

गौरतलब है कि भाजपा ने विधानसभा के भीतर और बाहर इस प्रस्ताव का लगातार विरोध किया था और फ्लाइंग स्कूल को स्थानांतरित करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया था।

सार्वजनिक भूमि प्रबंधन पर सवाल

अशोक ने राज्य में सार्वजनिक भूमि के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा सार्वजनिक संस्थानों और विरासत स्थलों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई है और भविष्य में भी सार्वजनिक संपत्तियों को किसी भी स्वार्थ के लिए कुर्बान करने के प्रयासों का विरोध करती रहेगी।

आगे क्या होगा

कर्नाटक सरकार का खेल परिसर प्रस्ताव अभी प्रारंभिक अवधारणा चरण में है और उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। डीजीसीए के लाइसेंस नवीनीकरण के बाद जीएफटीएस का भविष्य तत्काल सुरक्षित दिखता है, लेकिन खेल परिसर योजना पर अंतिम निर्णय न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी है — कर्नाटक सरकार का खेल परिसर प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है और उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल होनी है। भाजपा का 'रियल एस्टेट हित' वाला आरोप गंभीर है, परंतु इसे स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता है। गौरतलब है कि 205 एकड़ की यह भूमि बेंगलुरु के उत्तरी विस्तार में अत्यंत मूल्यवान है और ऐतिहासिक विमानन विरासत बनाम आधुनिक खेल अवसंरचना का यह टकराव केवल कर्नाटक का नहीं, बल्कि पूरे भारत में सार्वजनिक भूमि के भविष्य पर बड़े सवाल उठाता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जक्कूर गवर्नमेंट फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल का लाइसेंस किसने और कब नवीनीकृत किया?
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने जक्कूर गवर्नमेंट फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (जीएफटीएस) का लाइसेंस 2026-2031 के लिए नवीनीकृत किया है। इस नवीनीकरण के बाद जक्कूर में उड़ान संचालन फिर से शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
कर्नाटक सरकार जक्कूर एयरोड्रोम पर क्या बनाना चाहती है?
कर्नाटक सरकार ने उत्तर बेंगलुरु स्थित 205 एकड़ के जक्कूर एयरोड्रोम पर अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक अवधारणा चरण में है और युवा सशक्तीकरण एवं खेल विभाग को इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा ने इस लाइसेंस नवीनीकरण को अपनी जीत क्यों बताया?
भाजपा नेता आर. अशोक के अनुसार, पार्टी ने विधानसभा के भीतर और बाहर फ्लाइंग स्कूल को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का लगातार विरोध किया था। उनका आरोप है कि राज्य सरकार विमानन गतिविधियाँ हटाकर भूमि को रियल एस्टेट हितों के लिए उपलब्ध कराना चाहती थी, और डीजीसीए का नवीनीकरण इस प्रयास को रोकने में सफलता का प्रतीक है।
जक्कूर फ्लाइंग स्कूल का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
जक्कूर गवर्नमेंट फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल देश के सबसे पुराने विमानन प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यह उस भूमि पर स्थित है जिसे तत्कालीन मैसूर शाही परिवार ने दान में दिया था, जिससे इसे भारत की विमानन विरासत का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
जक्कूर फ्लाइंग स्कूल का भविष्य अब क्या है?
डीजीसीए के लाइसेंस नवीनीकरण के बाद जीएफटीएस में उड़ान संचालन तत्काल सुरक्षित दिखता है और स्थानांतरण की योजना फिलहाल टल गई है। हालाँकि, कर्नाटक सरकार का खेल परिसर प्रस्ताव उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण संस्थान का दीर्घकालिक भविष्य न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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