बेंगलुरु के GFTS को DGCA का 5 साल का लाइसेंस, 16 जुलाई 2026 से पायलट ट्रेनिंग फिर शुरू
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के जक्कूर स्थित गवर्नमेंट फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (GFTS) को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने 5 वर्षों के लिए नवीनीकृत लाइसेंस प्रदान किया है, जो 16 जुलाई 2026 से 15 जुलाई 2031 तक प्रभावी रहेगा। इससे दिसंबर 2023 में प्रशासनिक और नियामकीय कारणों से निलंबित पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम को पुनः आरंभ करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
उपमुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व, युवा सशक्तिकरण व खेल मंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को जक्कूर स्थित GFTS का दौरा कर संस्थान के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में युवा सशक्तीकरण और खेल विभाग के प्रमुख सचिव नवीन राज सिंह, आयुक्त एम.एन. अनुचेथ, संस्थान के निदेशक बसवराज और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
परमेश्वर के कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह लाइसेंस नवीनीकरण DGCA द्वारा की गई व्यापक जाँच के बाद संभव हुआ, जिसमें सभी परिचालन पहलुओं की परीक्षा, उड़ान प्रदर्शन और रनवे सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन शामिल था।
विमान बेड़ा और प्रशिक्षक स्थिति
अधिकारियों ने बताया कि संस्थान में अभी एक चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और दो फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर कार्यरत हैं। स्कूल के पास 5 विमानों का बेड़ा है, जिनमें से 3 विमान — सेसना 172पी, सेसना 172एस और टेक्नाम पी2006टी — फिलहाल पूरी तरह उड़ान के लिए तैयार और परिचालन में हैं। शेष दो विमान — टेक्नाम पी2010 और सेसना 152 — शीघ्र ही परिचालन में आने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रवेश
GFTS पूर्ववत प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL), कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) और मल्टी-इंजन एंडोर्समेंट के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखेगा। मौजूदा छात्रों की ट्रेनिंग बिना किसी व्यवधान के चलती रहेगी और नए छात्रों के लिए प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू होगी। संस्थान की कुल क्षमता 30 छात्रों की है।
ऐतिहासिक महत्व और भविष्य की भूमिका
1940 में स्थापित यह संस्थान देश के सबसे पुराने विमानन प्रशिक्षण केंद्रों में गिना जाता है। यह ऐसे समय में पुनः सक्रिय हो रहा है जब भारत में प्रशिक्षित पायलटों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। आधिकारिक बयान के अनुसार, DGCA की मंजूरी और विस्तृत सुरक्षा जाँच के बाद संस्थान अब परिचालन सुरक्षा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होकर उड़ान प्रशिक्षण देने के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि लाइसेंस निलंबन के बाद लगभग ढाई साल की रुकावट के बाद यह नवीनीकरण भारतीय विमानन क्षेत्र में सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की प्रासंगिकता को फिर से रेखांकित करता है।