48 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद सशस्त्र बलों को मिले 11 नए टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सशस्त्र बलों को 24 मई 2025 को 11 नए टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर मिले, जब बेंगलुरु स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल (AFTPS) में 48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स का ग्रेजुएशन समारोह सम्पन्न हुआ। 48 सप्ताह की बहुआयामी और अत्यंत कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन अधिकारियों ने यह उपलब्धि हासिल की है।
बैच की संरचना और विविधता
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस विशेष बैच में कुल 17 अधिकारी शामिल रहे। इनमें भारतीय वायुसेना के 14, भारतीय सेना का 1 और भारतीय नौसेना के 2 अधिकारी थे। तीनों सेनाओं की संयुक्त भागीदारी इस कोर्स की अंतर-सेवा प्रकृति को रेखांकित करती है, जो भारत की एकीकृत रक्षा क्षमता के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित इकाई एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) के एविएशन विंग में शामिल होंगे, जहाँ वे देश के लड़ाकू विमानों और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों की परीक्षण जिम्मेदारी संभालेंगे।
मुख्य पुरस्कार और सम्मान
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह ने सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड टेस्ट पायलट का खिताब जीतते हुए प्रतिष्ठित 'सुरंजन दास ट्रॉफी' अपने नाम की। स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को फ्लाइट इवैल्यूएशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 'चीफ ऑफ एयर स्टाफ ट्रॉफी' से नवाज़ा गया।
फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर श्रेणी में विंग कमांडर अभिनव कुमार को महाराजा हनुमंथ सिंह स्वॉर्ड प्रदान की गई। इसके अलावा, विंग कमांडर प्रणव शर्मा को डनलप ट्रॉफी और स्क्वाड्रन लीडर पारस शर्मा को कपिल भार्गव ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।
वायुसेना प्रमुख का संबोधन
समारोह के मुख्य अतिथि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रहे, जिन्होंने सफल अधिकारियों को प्रमाण पत्र और ट्रॉफियाँ प्रदान कीं। उल्लेखनीय है कि वायुसेना प्रमुख स्वयं AFTPS के 17वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के पूर्व छात्र रह चुके हैं, जो इस अवसर को और भी विशेष बनाता है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाला समय स्वदेशी रक्षा तकनीक और तेज आधुनिकीकरण का है। उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरणों और विमानों के डिजाइन से लेकर डिलीवरी तक की प्रक्रिया को तेज करना समय की माँग है, और सुरक्षा व गुणवत्ता के सर्वोच्च मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता के लिए महत्व
यह समारोह केवल एक पासिंग आउट परेड नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के एयर वॉरफेयर और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत तेजस Mk-2, AMCA और अन्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स के विकास में तेज़ी ला रहा है, जिनके लिए प्रशिक्षित टेस्ट पायलटों की माँग लगातार बढ़ रही है।
वायुसेना प्रमुख ने अधिकारियों से ईमानदारी, सटीकता, उत्कृष्टता और पेशेवर दक्षता को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही अधिकारी आने वाले वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।