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48 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद सशस्त्र बलों को मिले 11 नए टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर

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48 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद सशस्त्र बलों को मिले 11 नए टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर

सारांश

48 सप्ताह की कठोर ट्रेनिंग के बाद बेंगलुरु के AFTPS से 11 टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर ग्रेजुएट हुए। तीनों सेनाओं के 17 अधिकारियों का यह बैच अब ASTE में स्वदेशी लड़ाकू विमानों और सैन्य प्रणालियों की परीक्षण जिम्मेदारी संभालेगा — ऐसे वक्त में जब भारत का एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता का दांव सबसे ऊँचा है।

मुख्य बातें

48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स से 11 टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर ग्रेजुएट हुए।
बैच में 17 अधिकारी — वायुसेना के 14 , सेना का 1 , नौसेना के 2 ।
स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह को सर्वश्रेष्ठ टेस्ट पायलट के लिए सुरंजन दास ट्रॉफी मिली।
स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को चीफ ऑफ एयर स्टाफ ट्रॉफी , विंग कमांडर अभिनव कुमार को महाराजा हनुमंथ सिंह स्वॉर्ड प्रदान की गई।
ये अधिकारी अब एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) में सेवाएं देंगे।
मुख्य अतिथि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह स्वयं AFTPS के 17वें कोर्स के पूर्व छात्र हैं।

भारतीय सशस्त्र बलों को 24 मई 2025 को 11 नए टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर मिले, जब बेंगलुरु स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल (AFTPS) में 48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स का ग्रेजुएशन समारोह सम्पन्न हुआ। 48 सप्ताह की बहुआयामी और अत्यंत कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन अधिकारियों ने यह उपलब्धि हासिल की है।

बैच की संरचना और विविधता

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस विशेष बैच में कुल 17 अधिकारी शामिल रहे। इनमें भारतीय वायुसेना के 14, भारतीय सेना का 1 और भारतीय नौसेना के 2 अधिकारी थे। तीनों सेनाओं की संयुक्त भागीदारी इस कोर्स की अंतर-सेवा प्रकृति को रेखांकित करती है, जो भारत की एकीकृत रक्षा क्षमता के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित इकाई एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) के एविएशन विंग में शामिल होंगे, जहाँ वे देश के लड़ाकू विमानों और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों की परीक्षण जिम्मेदारी संभालेंगे।

मुख्य पुरस्कार और सम्मान

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह ने सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड टेस्ट पायलट का खिताब जीतते हुए प्रतिष्ठित 'सुरंजन दास ट्रॉफी' अपने नाम की। स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को फ्लाइट इवैल्यूएशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 'चीफ ऑफ एयर स्टाफ ट्रॉफी' से नवाज़ा गया।

फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर श्रेणी में विंग कमांडर अभिनव कुमार को महाराजा हनुमंथ सिंह स्वॉर्ड प्रदान की गई। इसके अलावा, विंग कमांडर प्रणव शर्मा को डनलप ट्रॉफी और स्क्वाड्रन लीडर पारस शर्मा को कपिल भार्गव ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।

वायुसेना प्रमुख का संबोधन

समारोह के मुख्य अतिथि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रहे, जिन्होंने सफल अधिकारियों को प्रमाण पत्र और ट्रॉफियाँ प्रदान कीं। उल्लेखनीय है कि वायुसेना प्रमुख स्वयं AFTPS के 17वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के पूर्व छात्र रह चुके हैं, जो इस अवसर को और भी विशेष बनाता है।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाला समय स्वदेशी रक्षा तकनीक और तेज आधुनिकीकरण का है। उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरणों और विमानों के डिजाइन से लेकर डिलीवरी तक की प्रक्रिया को तेज करना समय की माँग है, और सुरक्षा व गुणवत्ता के सर्वोच्च मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता के लिए महत्व

यह समारोह केवल एक पासिंग आउट परेड नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के एयर वॉरफेयर और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत तेजस Mk-2, AMCA और अन्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स के विकास में तेज़ी ला रहा है, जिनके लिए प्रशिक्षित टेस्ट पायलटों की माँग लगातार बढ़ रही है।

वायुसेना प्रमुख ने अधिकारियों से ईमानदारी, सटीकता, उत्कृष्टता और पेशेवर दक्षता को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही अधिकारी आने वाले वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

AMCA, DRDO के अनमैन्ड प्लेटफॉर्म्स — की रफ्तार जैसे-जैसे बढ़ रही है, प्रशिक्षित टेस्ट पायलटों की माँग उससे कहीं तेज़ है। AFTPS का यह 48वाँ बैच उस अंतर को पाटने की दिशा में एक ठोस कदम है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सालाना ग्रेजुएशन की यह संख्या भविष्य की ज़रूरतों के लिए पर्याप्त है। वायुसेना प्रमुख का खुद इसी स्कूल का पूर्व छात्र होना महज़ प्रतीकात्मक नहीं — यह संस्थागत गौरव और जवाबदेही दोनों को एक साथ रेखांकित करता है। स्वदेशी रक्षा तकनीक के दावों को ज़मीन पर उतारने के लिए इन्हीं अधिकारियों की विशेषज्ञता सबसे अहम कड़ी होगी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल का 48वाँ फ्लाइट टेस्ट कोर्स क्या है?
यह बेंगलुरु स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल (AFTPS) द्वारा संचालित 48 सप्ताह का कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें भारतीय वायुसेना, सेना और नौसेना के अधिकारी हिस्सा लेते हैं। इस कोर्स के 48वें बैच से 11 टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर ग्रेजुएट हुए।
ग्रेजुएट अधिकारी अब कहाँ तैनात होंगे?
ये अधिकारी भारतीय वायुसेना की एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) के एविएशन विंग में शामिल होंगे। वहाँ वे देश के लड़ाकू विमानों और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों की परीक्षण जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस बैच में किसे सर्वश्रेष्ठ टेस्ट पायलट चुना गया?
स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह को सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड टेस्ट पायलट के रूप में प्रतिष्ठित 'सुरंजन दास ट्रॉफी' से सम्मानित किया गया। स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को फ्लाइट इवैल्यूएशन में उत्कृष्टता के लिए 'चीफ ऑफ एयर स्टाफ ट्रॉफी' मिली।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का इस समारोह से क्या विशेष संबंध है?
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इस समारोह के मुख्य अतिथि थे और उन्होंने अधिकारियों को प्रमाण पत्र व ट्रॉफियाँ प्रदान कीं। विशेष बात यह है कि वे स्वयं AFTPS के 17वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के पूर्व छात्र रह चुके हैं।
टेस्ट पायलटों का प्रशिक्षण भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रशिक्षित टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर स्वदेशी विमानों व सैन्य प्रणालियों के परीक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तेजस Mk-2 और AMCA जैसे कार्यक्रमों की प्रगति के साथ इनकी माँग और बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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