वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने AFTPS के 17 स्नातकों को किया सम्मानित, आत्मनिर्भरता को बताई रणनीतिक ज़रूरत
सारांश
मुख्य बातें
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 23 मई 2025 को बेंगलुरु स्थित वायु सेना टेस्ट पायलट स्कूल (AFTPS) में आयोजित दीक्षांत समारोह में 48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के 17 अधिकारियों को प्रमाण पत्र और ट्रॉफियाँ प्रदान कीं। इस बैच में 11 टेस्ट पायलट और 6 फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर शामिल थे, जिन्होंने 48 सप्ताह के गहन बहु-विषयक प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया।
बैच की संरचना और पृष्ठभूमि
इस वर्ष स्नातक हुए 17 अधिकारियों में भारतीय वायु सेना के 14, भारतीय सेना का 1 और भारतीय नौसेना के 2 अधिकारी शामिल रहे। यह त्रि-सेवा भागीदारी भारत की संयुक्त परिचालन क्षमता को दर्शाती है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये सभी अधिकारी भारतीय वायु सेना की प्रमुख इकाई विमान और प्रणाली परीक्षण प्रतिष्ठान (ASTE) के विमानन विंग में अपनी सेवाएँ देंगे।
पुरस्कार और सम्मान
समारोह में कई प्रतिष्ठित ट्रॉफियाँ प्रदान की गईं। सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण छात्र परीक्षण पायलट के लिए 'सुरंजन दास ट्रॉफी' स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह, वीएम को मिली। उड़ान मूल्यांकन में सर्वश्रेष्ठ छात्र परीक्षण पायलट के लिए 'वायु सेना प्रमुख ट्रॉफी' स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को प्रदान की गई।
सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण छात्र उड़ान परीक्षण अभियंता के लिए 'महाराजा हनुमंत सिंह तलवार' ट्रॉफी विंग कमांडर अभिनव कुमार को, उड़ान मूल्यांकन में सर्वश्रेष्ठ छात्र उड़ान परीक्षण अभियंता के लिए 'डनलप ट्रॉफी' विंग कमांडर प्रणव शर्मा को और जमीनी विषयों में सर्वश्रेष्ठ छात्र के लिए 'कपिल भार्गव ट्रॉफी' स्क्वाड्रन लीडर पारस शर्मा को प्रदान की गई।
वायुसेना प्रमुख का संदेश
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एयर चीफ मार्शल एपी सिंह स्वयं 17वें उड़ान परीक्षण पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने स्नातक अधिकारियों से निरंतर लगन और परिश्रम का आग्रह करते हुए स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विकास में 'आत्मनिर्भरता' को एक रणनीतिक आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षण दल पर स्वदेशीकरण अभियान को गति देने और एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की भारी जिम्मेदारी है।
आत्मनिर्भरता और परिचालन उत्कृष्टता पर ज़ोर
वायुसेना प्रमुख ने डिज़ाइन से वितरण तक के समय-चक्र को अनुकूलित करने की आवश्यकता पर बल दिया — साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उपकरणों की सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, सटीकता और उत्कृष्टता के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया, ताकि विमान और प्रणालियाँ सेवाओं की परिचालन आवश्यकताओं पर पूरी तरह खरी उतरें।
गौरतलब है कि यह दीक्षांत समारोह ऐसे समय में हुआ जब भारत अपने रक्षा उत्पादन को तेज़ी से स्वदेशी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। AFTPS से प्रशिक्षित ये अधिकारी आने वाले वर्षों में भारतीय एयरोस्पेस क्षेत्र की रीढ़ बनेंगे।