सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026: जम्मू से पहली विशेष ट्रेन रवाना, 140 श्रद्धालुओं का सपना हुआ साकार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने 29 जून 2026 को जम्मू से सोमनाथ के लिए पहली विशेष तीर्थयात्रा ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा-2026' के तहत आयोजित इस छह दिवसीय यात्रा में 140 श्रद्धालु शामिल हैं, जिनके लिए यह जीवन की पहली सोमनाथ दर्शन की यात्रा है।
यात्रा की पृष्ठभूमि और आयोजन
जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी ने केंद्र शासित प्रदेश के संस्कृति विभाग के अंतर्गत यह यात्रा आयोजित की है। यह पहल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार संचालित की जा रही है। इस वर्ष जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए कुल 140 सीटें आरक्षित की गई थीं, जिनके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
यात्री गीता देवी ने कहा, 'मैं पहली बार दर्शन करने जा रही हूँ। कभी सोचा नहीं था कि सोमनाथ की यात्रा करूँगी। इसके लिए पहले से कोई तैयारी भी नहीं की थी। बेटे ने सिर्फ फॉर्म भर दिया था।' वहीं वेद प्रकाश शर्मा ने कहा, 'पहली बार सरकार ने सोमनाथ यात्रा का प्रबंध किया है, जो बहुत ही अच्छा है। पहले कभी सोच ही नहीं सकते थे कि इतनी दूर दर्शन करने जाएंगे।'
एक अन्य यात्री जनक सिंह ने कहा, 'मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सोमनाथ यात्रा पर जाएंगे, लेकिन सरकार की वजह से यह संभव हो पाया है। सरकार को चाहिए कि दूसरे ज्योतिर्लिंगों का दर्शन भी कराएं।' वरिष्ठ नागरिक नीलम रानी ने भावुक होते हुए कहा, 'मन में बहुत खुशी है। भगवान ने बुलाया है, तो हम जा रहे हैं। सरकार को इस तरह के आयोजन और करने चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग दर्शन कर सकें।'
यात्रा का उद्देश्य और महत्व
यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के निवासियों के लिए सोमनाथ मंदिर तक संगठित तीर्थयात्रा का आयोजन किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के उन श्रद्धालुओं के लिए गुजरात स्थित सोमनाथ दर्शन को सुलभ बनाना है, जो आर्थिक या व्यावहारिक कारणों से अब तक इस तीर्थ से वंचित रहे थे। यह यात्रा ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय है।
आगे की संभावनाएं
श्रद्धालुओं ने सरकार से आग्रह किया है कि भविष्य में अन्य ज्योतिर्लिंगों की यात्रा भी इसी तरह आयोजित की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग तीर्थ दर्शन का लाभ उठा सकें। यह पहली यात्रा आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम की निरंतरता की नींव रख सकती है।