सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा-2026: ओडिशा CM मांझी ने 1,100 श्रद्धालुओं को भुवनेश्वर से किया रवाना
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने सोमवार, 15 जून 2026 को भुवनेश्वर से ऐतिहासिक 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा-2026' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 1,100 से अधिक श्रद्धालुओं को लेकर चली यह विशेष ट्रेन गुजरात के प्रभास पाटन स्थित भगवान सोमनाथ के पवित्र धाम की ओर रवाना हुई। यह यात्रा ओडिशा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
यात्रा का ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री मांझी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक ट्रेन यात्रा नहीं, बल्कि एक भव्य तीर्थयात्रा है जो हमारी आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'पूर्व में भगवान जगन्नाथ और पश्चिम में भगवान सोमनाथ—ये दो दिव्य शक्तियाँ पूरे भारतवर्ष को एकता, आध्यात्मिकता और शाश्वत चेतना के धागे में बाँधती हैं।'
यह यात्रा राष्ट्रव्यापी 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का हिस्सा है, जो दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मील के पत्थरों को रेखांकित करती है। पहला — 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले हमले की 1,000वीं वर्षगांठ। दूसरा — स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रेरणा से मंदिर के पुनर्निर्माण और पुनर्प्रतिष्ठा की 75वीं वर्षगांठ (प्लेटिनम जुबली)।
राष्ट्रव्यापी तीर्थयात्रा कार्यक्रम
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस साल भर चलने वाले सांस्कृतिक उत्सव के तहत एक व्यापक राष्ट्रव्यापी तीर्थयात्रा कार्यक्रम का आयोजन किया है। ओडिशा की विशेष ट्रेन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के लखनऊ से 1,008 श्रद्धालु और दिल्ली से लगभग 1,300 श्रद्धालु भी प्रभास पाटन की यात्रा पर रवाना हुए हैं।
गौरतलब है कि यह आयोजन केंद्र सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं को एकजुट कर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है।
सोमनाथ में अवसंरचना विकास
मुख्यमंत्री मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए बताया कि सोमनाथ में विश्व स्तरीय तीर्थयात्री अवसंरचना विकसित की गई है। इसमें एक आधुनिक प्रदर्शनी गैलरी, संग्रहालय, समुद्र-दृश्य सैरगाह और प्रशाद (PRASHAD) योजना के तहत निर्मित सुविधाएँ शामिल हैं।
ओडिशा और सोमनाथ के बीच आध्यात्मिक सेतु
दोनों तीर्थस्थलों के बीच आध्यात्मिक बंधन को और प्रगाढ़ करने के लिए एकमरा क्षेत्र स्थित बिंदुसागर झील का पवित्र जल और केदार गौरी मंदिर (भुवनेश्वर) की पवित्र मिट्टी इस विशेष ट्रेन के माध्यम से सोमनाथ भेजी गई है, ताकि इसे भगवान सोमनाथ के चरणों में अर्पित किया जा सके। यात्रा में भाग लेने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री को 'ओम नमः शिवाय' शीर्षक वाली पुस्तिका भी प्रदान की गई है।
यह यात्रा ओडिशा और गुजरात के बीच सांस्कृतिक संपर्क को नई ऊँचाई देने के साथ-साथ भारत की साझा आध्यात्मिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।