जमुई नाबालिग उत्पीड़न मामला: JDU ने बताया अलग-थलग घटना, SIT गठित, 3 नाबालिग हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के जमुई जिले में 19 सितंबर 2026 की शाम दो नाबालिग छात्रों — जिनमें एक लड़की भी शामिल है — के साथ कथित उत्पीड़न की घटना ने राज्य में तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पुलिस के अनुसार यह घटना जमुई-लखीसराय मुख्य सड़क से लगभग तीन किलोमीटर दूर एक पहाड़ी इलाके में शाम 6:25 से 6:30 बजे के बीच हुई। अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है और मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है।
घटना का विवरण और पुलिस कार्रवाई
बिहार पुलिस के एडीजी (कानून-व्यवस्था) के.एस. अनुपम ने बताया कि जमुई पुलिस स्टेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 128, 74 और 75 के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 8 और 12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। हिरासत में लिए गए तीन नाबालिग आरोपियों में से दो की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
पुलिस ने कथित तौर पर सात से आठ युवकों की पहचान की है, जिनकी भूमिका की जाँच की जा रही है और उनके आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन किया जा रहा है। SIT की निगरानी जमुई के LDPO द्वारा की जा रही है। पुलिस उस स्थान और उसके आसपास की गश्त व्यवस्था की समीक्षा भी करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पुलिसिंग में कोई चूक हुई थी या नहीं।
सोशल मीडिया पर साइबर कार्रवाई
पुलिस की साइबर टीम ने घटना से जुड़े वीडियो को और फैलने से रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू की है। एडीजी अनुपम के अनुसार, 32 सोशल मीडिया अकाउंट्स को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है — जिनमें 13 फेसबुक, 12 इंस्टाग्राम और 7 एक्स (X) अकाउंट शामिल हैं।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान या चेहरा उजागर करने वाली किसी भी सामग्री को साझा या रीपोस्ट न किया जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जदयू और सरकार का बचाव
जनता दल (यूनाइटेड) — JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इस घटना को एक 'अलग-थलग मामला' बताया और कहा कि सरकार ऐसे मामलों को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा, 'जब ऐसी अलग-थलग घटनाएँ होती हैं, तो हम उन्हें लेकर संवेदनशील होते हैं। लेकिन 2005 से पहले के समय को देखिए — तब बिहार कैसा था? आज, जब कोई घटना होती है, तो प्रशासन कार्रवाई करता है। जिन लोगों ने अपराध किया है, वे जल्द ही पुलिस की हिरासत में होंगे।'
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी बिहार पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि 'उस समय महिलाएँ सूरज ढलने के बाद घर से बाहर निकलने से डरती थीं, जबकि आज वे आधी रात, रात 1 बजे, 2 बजे और सुबह 4 बजे भी बाहर निकलती हैं।' दोनों नेताओं ने 2005 पूर्व के बिहार से तुलना करते हुए वर्तमान कानून-व्यवस्था को बेहतर बताया।
विपक्ष का तीखा हमला
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार पर तीखा प्रहार किया। RJD के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि कानून के शासन को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'बिहार पुलिस और बिहार सरकार कहाँ है? महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है।' विपक्ष ने माँग की है कि सरकार जवाबदेही सुनिश्चित करे।
आगे क्या होगा
SIT जाँच जारी है और शेष संदिग्धों की गिरफ़्तारी अपेक्षित है। पुलिस गश्त में संभावित चूक की भी समीक्षा की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव निकट हैं और कानून-व्यवस्था एक केंद्रीय मुद्दा बनती जा रही है। गौरतलब है कि पॉक्सो मामलों में त्वरित SIT गठन एक सकारात्मक प्रशासनिक कदम है, परन्तु दोषसिद्धि दर और पीड़ितों को मिलने वाला न्याय ही अंतिम कसौटी होगी।