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झारखंड में एआई से स्वास्थ्य क्रांति: सीएम हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया 'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स', 13 स्टार्टअप करेंगे तकनीक का परीक्षण

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झारखंड में एआई से स्वास्थ्य क्रांति: सीएम हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया 'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स', 13 स्टार्टअप करेंगे तकनीक का परीक्षण

सारांश

झारखंड सरकार ने एआई और मेडटेक को सीधे जिला अस्पतालों से जोड़ने का साहसी प्रयोग शुरू किया है। 'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स' मॉडल के ज़रिए 13 स्टार्टअप टीबी, एनीमिया और मधुमेह जैसी बीमारियों की एआई-आधारित जांच तकनीकें परखेंगे — और सफल रहीं तो पूरे राज्य में लागू होंगी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 15 जून को रांची में 'मेडटेक इनोवेशन डे' पर 'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स' परियोजना लॉन्च की।
13 स्टार्टअप कंपनियों ने एनीमिया, टीबी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की एआई-आधारित जांच तकनीकों का प्रदर्शन किया।
नई तकनीकों को पहले चुनिंदा जिला अस्पतालों में परखा जाएगा, सफल होने पर पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ.
इरफान अंसारी ने राज्य में 745 'अबुआ मेडिकल स्टोर' खोलने की घोषणा की।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की योजना का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार, 15 जून को रांची में आयोजित 'मेडटेक इनोवेशन डे' के दौरान झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी 'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स' परियोजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक मेडिकल तकनीक से जोड़ना है। इस पहल के तहत नई तकनीकों को पहले चुनिंदा जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में वास्तविक परिस्थितियों में परखा जाएगा और सफल परिणाम मिलने पर उन्हें पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स: क्या है यह मॉडल

'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स' एक नियंत्रित परीक्षण व्यवस्था है, जिसमें किसी भी नई स्वास्थ्य तकनीक को राज्यव्यापी स्तर पर सीधे लागू करने के बजाय पहले सीमित जिलों में उसकी उपयोगिता, प्रभावशीलता और व्यावहारिक चुनौतियों का आकलन किया जाता है। मेडटेक के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने वाले उपकरण, सॉफ्टवेयर और डिजिटल समाधान शामिल होते हैं। यह मॉडल तकनीकी विफलता के जोखिम को कम करते हुए नवाचार को जमीनी स्तर पर जाँचने का अवसर देता है।

13 स्टार्टअप का प्रदर्शन, एनीमिया से लेकर टीबी तक की तकनीकें

कार्यक्रम में 13 स्टार्टअप कंपनियों ने एनीमिया, टीबी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियों की पहचान तथा निगरानी से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। इनमें एआई-आधारित जांच प्रणाली, पोर्टेबल मेडिकल उपकरण, डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम और रोग पहचान तकनीकें प्रमुख रहीं। इन समाधानों का मुख्य लक्ष्य जांच प्रक्रिया को तेज़, सटीक और कम खर्चीला बनाना है, ताकि दूरदराज के इलाकों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें।

सीएम सोरेन की प्राथमिकता: दूरस्थ क्षेत्र और रियल टाइम निगरानी

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के दूरदराज और दुर्गम इलाकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, और नई तकनीक व एआई की सहायता से इस चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि उपयोगी तकनीकों को जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि इलाज की गुणवत्ता बेहतर हो और मानवीय त्रुटियाँ कम हों। सोरेन ने रियल टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे क्षेत्रवार बीमारियों की पहचान कर बेहतर स्वास्थ्य योजनाएं बनाई जा सकेंगी।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले वर्षों में पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने घोषणा की कि राज्य में 745 'अबुआ मेडिकल स्टोर' खोले जाएंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में भी सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहा तो झारखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकता है जहाँ नई स्वास्थ्य तकनीकों का परीक्षण और उपयोग सीधे जिला एवं ग्रामीण स्तर पर किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से मरीजों को बेहतर, सुलभ और अपेक्षाकृत कम लागत वाली स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं — बशर्ते कार्यान्वयन समयबद्ध और पारदर्शी हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर लागू करो — लेकिन झारखंड जैसे राज्य में, जहाँ स्वास्थ्य अवसंरचना की बुनियादी कमियाँ अभी भी बनी हैं, सवाल यह है कि क्या एआई-आधारित उपकरण बिना मज़बूत कनेक्टिविटी और प्रशिक्षित जनशक्ति के टिकाऊ साबित होंगे। 13 स्टार्टअप का उत्साह और 745 अबुआ मेडिकल स्टोर की घोषणा स्वागतयोग्य है, पर इन पहलों की सफलता परीक्षण के बाद के कार्यान्वयन ढाँचे पर निर्भर करेगी, जिसका विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। गौरतलब है कि देश में इस तरह के कई पायलट प्रोजेक्ट जिला स्तर पर ही दम तोड़ देते हैं — झारखंड को इस चक्र से बाहर निकलने के लिए पारदर्शी मूल्यांकन मानदंड और जवाबदेही तंत्र सार्वजनिक करने होंगे।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड का 'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स' प्रोजेक्ट क्या है?
'डिस्ट्रिक्ट सैंडबॉक्स' एक नियंत्रित तकनीकी परीक्षण व्यवस्था है, जिसमें नई स्वास्थ्य तकनीकों को राज्यव्यापी स्तर पर लागू करने से पहले चुनिंदा जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में वास्तविक परिस्थितियों में परखा जाता है। सफल परिणाम मिलने पर इन्हें पूरे झारखंड में लागू किया जाएगा।
मेडटेक इनोवेशन डे में किन बीमारियों की तकनीकें प्रदर्शित की गईं?
कार्यक्रम में 13 स्टार्टअप कंपनियों ने एनीमिया, टीबी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की पहचान व निगरानी के लिए एआई-आधारित जांच प्रणाली, पोर्टेबल मेडिकल उपकरण और डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रदर्शन किया। इनका उद्देश्य जांच को तेज़, सटीक और कम खर्चीला बनाना है।
अबुआ मेडिकल स्टोर क्या है और इसका लाभ किसे मिलेगा?
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार, राज्य में 745 'अबुआ मेडिकल स्टोर' खोले जाएंगे, जिनका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सस्ती दवाइयाँ और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराना है। इससे मुख्यतः झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस पहल से झारखंड के दूरदराज के इलाकों को कैसे फायदा होगा?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुसार, एआई और नई तकनीकों की मदद से दूरदराज व दुर्गम क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाई जा सकेंगी। रियल टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से क्षेत्रवार बीमारियों की पहचान कर बेहतर स्वास्थ्य योजनाएं बनाना भी संभव होगा।
क्या यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहा तो झारखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकता है जहाँ नई स्वास्थ्य तकनीकों का परीक्षण सीधे जिला और ग्रामीण स्तर पर किया जाता है। इससे अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय ढाँचा तैयार हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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