श्रावणी मेला 2025: देवघर से बासुकीनाथ हेलीकॉप्टर सेवा 4 अगस्त से, 15 मिनट में पूरा होगा सफर
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने बाबा बैद्यनाथ धाम के विश्वविख्यात श्रावणी मेले में उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 4 अगस्त 2025 से देवघर और बासुकीनाथ के बीच विशेष हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (नागर विमानन) द्वारा शुरू की जा रही इस सेवा से श्रद्धालु जहाँ सड़क मार्ग पर एक घंटे से अधिक समय लगाते थे, वहीं अब मात्र 15 मिनट में गंतव्य तक पहुँच सकेंगे।
सेवा का विवरण और परिचालन केंद्र
इस हेलीकॉप्टर सेवा का मुख्य परिचालन केंद्र दुमका जिले के बासुकीनाथ हेलीपैड को बनाया गया है। सेवा का संचालन झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट (JFI) और मेसर्स एयरकैब एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से होगा। उड़ान के लिए बेल-407 हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाएगा, जिसमें एक पायलट के साथ अधिकतम पाँच यात्री एक साथ यात्रा कर सकेंगे।
हवाई दर्शन पैकेज और किराया
श्रद्धालुओं के लिए केवल यात्रा ही नहीं, बल्कि आकाशीय दर्शन के विशेष पैकेज भी तैयार किए गए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार:
बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) और बासुकीनाथ धाम का 7 से 10 मिनट का हवाई दर्शन ₹2,850 प्रति व्यक्ति की दर से उपलब्ध रहेगा। देवघर से त्रिकूट पर्वत के 10 से 15 मिनट के हवाई दर्शन पैकेज की कीमत ₹3,750 प्रति व्यक्ति निर्धारित की गई है। वहीं, देवघर से बासुकीनाथ तक एकतरफा हेलीकॉप्टर यात्रा के लिए ₹4,500 प्रति यात्री का किराया तय किया गया है।
सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था
यह ऐसे समय में आया है जब श्रावणी मेले में देश के कोने-कोने से लाखों कांवड़िए और श्रद्धालु बैद्यनाथ धाम पहुँचते हैं, जिससे सड़क मार्गों पर भारी दबाव रहता है। हेलीपैड पर सुरक्षा के लिए प्रत्येक स्थल पर एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन और सुरक्षा बलों की तैनाती की व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रा सुरक्षित और निर्बाध रहे।
ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा
राज्य सरकार ने टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी है। श्रद्धालु घर बैठे आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से हेलीकॉप्टर यात्रा और हवाई दर्शन की बुकिंग कर सकेंगे। गौरतलब है कि यह पहल झारखंड में धार्मिक पर्यटन को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आगे की संभावनाएँ
राज्य सरकार का मानना है कि इस सेवा से देवघर, बासुकीनाथ और त्रिकूट पर्वत जैसे धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यदि यह पहल सफल रहती है, तो भविष्य में इसे और अधिक मार्गों तक विस्तारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।