झारखंड में टावर पर चढ़ने का खतरनाक ट्रेंड: एक महीने में 10 घटनाएं, जमीन-प्यार-शराब सब वजह
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में पिछले एक महीने के भीतर मोबाइल और हाई-टेंशन बिजली टावरों पर चढ़कर मांगें मनवाने का एक खतरनाक और असामान्य चलन तेज़ी से पैर पसार रहा है। राज्य के अलग-अलग जिलों से मई से जून 2026 के बीच ऐसी कम-से-कम 10 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लोग प्रशासनिक भ्रष्टाचार, पारिवारिक जमीन विवाद, प्रेम-प्रसंग और यहाँ तक कि शराब की मांग को लेकर 70 से 100 फीट ऊंचे टावरों पर जा बैठ रहे हैं। यह सिलसिला स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
ताज़ा मामला: गिरिडीह में शराब के लिए टावर पर चढ़ा युवक
सबसे ताज़ा घटना गिरिडीह जिले के पचम्बा थाना क्षेत्र अंतर्गत पिंडाटांड पंचायत के परियाना गांव से सामने आई। 11 जून 2026 की देर रात शराब के नशे में 40 वर्षीय पंकज मिश्रा 33 हजार केवी की चालू हाई-टेंशन विद्युत टावर पर चढ़ गए और 70 फीट की ऊंचाई से नीचे खड़े लोगों से बार-बार शराब लाने की मांग करने लगे। उच्च वोल्टेज प्रवाहित होने के कारण किसी भी क्षण बड़े हादसे की आशंका बनी रही।
पचम्बा थाना प्रभारी राजीव कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस ड्रामे के दौरान पुलिसकर्मियों ने लगातार युवक से बातचीत कर काउंसिलिंग की, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।
मुख्य घटनाक्रम: एक महीने की घटनाओं की झलक
5 जून 2026 को हजारीबाग जिले के कटकमदाग प्रखंड के बानादाग में विकास कुमार नामक युवक अंचल कार्यालय की कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार से तंग आकर एयरटेल के 85 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गए। उनका आरोप था कि उनकी जमीन का म्यूटेशन पिछले 5-6 महीनों से अटका हुआ है। करीब 11 घंटे बाद प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिखित आश्वासन मिलने पर वह नीचे उतरे। इस मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी संज्ञान लिया।
10 जून 2026 को बोकारो के नावादीह क्षेत्र में एक युवक पुश्तैनी जमीन में उचित हिस्सेदारी न मिलने के कारण परिजनों से नाराज होकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। पुलिस और प्रशासन ने घंटों की मशक्कत के बाद कानूनी मदद का भरोसा देकर उसे नीचे उतारा।
प्रेम-प्रसंग और अजीब वजहें भी शामिल
3 जून 2026 को राजधानी रांची में एक लड़की इसलिए मोबाइल टावर पर चढ़ गई क्योंकि उसके नाबालिग प्रेमी ने उससे बातचीत बंद कर दी थी। पुलिस को जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उसने उस नाबालिग को ढूंढकर मौके पर बुलाया, जिसके बाद ही लड़की नीचे उतरी।
17 मई 2026 को धनबाद के गोमो क्षेत्र में पुलिस द्वारा एक युवक की गिरफ्तारी के विरोध में उसकी प्रेमिका मोबाइल टावर पर चढ़ गई और उसकी रिहाई की मांग करने लगी। इसी तरह मई 2026 में गिरिडीह के निमियाघाट में एक विवाहित युवक अपने भाई की साली से दोबारा शादी कराने की ज़िद पर 100 फीट ऊंचे टावर पर जा बैठा, जिसे पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर समझा-बुझाकर नीचे उतारा।
प्रशासन पर दबाव और सुरक्षा जोखिम
गौरतलब है कि ये घटनाएं केवल व्यक्तिगत विरोध का माध्यम नहीं रह गई हैं — इन्होंने एक खतरनाक सामाजिक प्रवृत्ति का रूप ले लिया है। 33 हजार केवी तक के चालू हाई-टेंशन टावरों पर चढ़ना जानलेवा हो सकता है, और हर घटना में पुलिस बल की भारी तैनाती के साथ-साथ बिजली विभाग को भी अलर्ट पर रहना पड़ता है।
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में जमीन म्यूटेशन और प्रशासनिक सेवाओं की धीमी गति को लेकर आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब शिकायत निवारण के सामान्य रास्ते नाकाम लगते हैं, तो लोग इस तरह के चरम कदम उठाने पर मजबूर होते हैं।
आगे क्या
इन घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य पुलिस और प्रशासन को अपनी शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस हो रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा हजारीबाग मामले पर संज्ञान लेना एक संकेत है कि राज्य सरकार इस प्रवृत्ति को गंभीरता से ले रही है, लेकिन ठोस नीतिगत कदम अभी बाकी हैं।