झारखंड में मतदाता सूची का पुनरीक्षण: बीएलओ के स्टिकर से बढ़ेगी पारदर्शिता
सारांश
मुख्य बातें
रांची, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियों को गति दी गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार ने बुधवार को सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में एसआईआर की पूर्व प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य एक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है, जिसमें कोई भी योग्य नागरिक छूट न जाए। समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं के घरों पर बीएलओ की जानकारी वाले स्टिकर लगाने के कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इन स्टिकरों पर संबंधित बीएलओ का नाम, मोबाइल नंबर और मकान संख्या अंकित होगी, ताकि मतदाता उनसे सीधे संपर्क कर सकें। यह पहल पहले से चल रहे घर-घर सत्यापन अभियान का हिस्सा है, जिसमें बीएलओ प्रत्येक घर जाकर इन्यूमरेशन फॉर्म भरवा रहे हैं।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जिन मतदाताओं का पिछली गहन पुनरीक्षण सूची से वर्तमान सूची में मैपिंग नहीं हो पाया है, वे निर्वाचन आयोग के ईसीआईनेट प्लेटफॉर्म के "बुक ए कॉल" फीचर का उपयोग कर अपने बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। इससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने या सुधार की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया गया है। बैठक में अधिकारियों को सभी मतदान केंद्रों पर एब्सेंट (अनुपस्थित), शिफ्टेड (स्थानांतरित), डेथ (मृतक) और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची तैयार करने का भी निर्देश दिया गया।
खासकर विस्थापित या ध्वस्त मकानों के पुराने पते पर दर्ज मतदाताओं को शिफ्टेड सूची में अनिवार्य रूप से शामिल करने को कहा गया है। इसके अलावा, मकानों की मैपिंग के दौरान पूर्व निर्धारित मकान संख्या को बनाए रखने और केवल आवश्यक होने पर ही नोशनल नंबर देने का निर्देश दिया गया।
इससे पहले मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर एसआईआर प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की थी और उनसे सहयोग की अपील की थी। आयोग ने राजनीतिक दलों से बूथ लेवल एजेंट बीएलए की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण में तेजी लाने को कहा है, ताकि जमीनी स्तर पर बीएलओ के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची को बीएलओ द्वारा राजनीतिक दलों के एजेंटों से प्रमाणित कराने के बाद सार्वजनिक किया जाएगा। इससे फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने और सूची को अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी।